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संत पापा हंगरी में कार्डिनल एर्दो के संग संत पापा हंगरी में कार्डिनल एर्दो के संग  (ANSA)

कार्डिनल एर्दो: संत पापा फ्रांसिस की हंगरी यात्रा प्रेम भरी

संत पापा फ्रांसिस की हंगरी, प्रेरितिक यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए बुडापेस्ट के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल पेटर एर्दो ने कहा कि वे प्रेम में शांति के संदेशवाहक बन कर आये।

दिलीप संजय  एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रोमवार, 01 मई 2023 (रेई) बुडापेस्ट के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल पेटर एर्दो ने वाटिकन न्यूज़ को दिया गये एक साक्षात्कार में कहा कि संत पापा फ्रांसिस प्रेम में हंगरी आये, वे शांति के सच्चे तीर्थयात्री के रूप में आए और विश्वासियों को अपार खुशी और शांति के लिए काम करने को प्रेरित किया।

“मैं इस बात का अनुभव करता हूँ कि संत पापा फ्रांसिस बड़े प्रेम से हमारे बीच आये। लोगों ने उनके प्रेम का अनुभव किया और इसका प्रत्युत्तर दिया, वे इस कठिन समाय में शांति के तीर्थयात्री और विश्वास के व्यक्तित्व स्वरूप हमारे बीच आये।” उक्त बातें बुडापेस्ट के कार्डिनल ने संत पापा फ्रांसिस की हंगरी, 41वीं प्रेरितिक यात्रा के समापन के उपरांत वाटिकन रेडियो को दिये गये अपने साक्षात्कर में कही।

हंगरी के लिए प्रेरितिक प्रेम

“यह कोई अंतराष्ट्रीय घटना या अन्य उद्देश्य नहीं है जो उन्हें यहाँ लाया, लेकिन यह उनका प्रेरितिक प्रेम था, जहाँ वे हमसे मिलना चाहते थे, यह हमारे लिए एक बड़े प्रोत्साहन की बात है।”

कार्डिनल ने कहा कि जब हम संत स्तेफन के महागिरजाघर गयें हमने शहर को भरा हुआ पाया। न केवल महागिरजागर के सामने चौक में, बल्कि सड़कों के किनारे भी भीड़ उनका अभिनंदन कर रही थी। उन्होंने कहा, “संत पापा ने उन लोगों के लिए बहुत स्नेह व्यक्त किया जिनसे वे मिले।”

कार्डिनल ने यह भी कहा कि संत पापा फ्राँसिस अक्सर विश्वासियों से हाथ मिलाने शिशुओं और छोटे बच्चों के प्रति अपना स्नेह दर्शाने के लिए पापामोबिले को रोकते थे। “यह वास्तव में, निष्ठावान समुदाय के प्रति उनका एक महान, प्यार भरा रिश्ता था”।

ख्रीस्त का मिलन प्रेम में

कार्डिनल एर्दो ने कहा कि कई गैर-काथलिक थे जो संत पापा के इस समारोह में सहभागी हो रहे थे। कई अंतरधार्मिक वार्ता के अतिथि, सामाजिक जीवन के प्रतिनिधि थे जिनमें से कई कथालिक नहीं थे। उन्होंने अपने बीच संत पापा को पाकर अति खुशी का अनुभव किया, क्योंकि उन्होंने इस बात का अनुभव किया कि यह यात्रा उनके लिए थी।

कार्डिनल ने कहा, “संत पापा के व्यक्तित्व के माध्यम से हमने अनुभव किया कि ख्रीस्त हमारे पास आ रहे हैं- यह एक बहुत बड़ी बात है।” येसु हर ख्रीस्तयाग में आते हैं। हम उसे गरीब व्यक्ति में देखते हैं। और फिर, जब संत पापा आये तो हमने इसे वास्तविकता में भावनात्मक रूप से अपने को प्रभावित होता पाया।

युद्ध की स्थिति में शांति के तीर्थयात्री

मिस्सा बलिदान के उपरांत स्वर्गीय रानी के पूर्व संत पापा फ्रांसिस ने हंगरी और पूरे यूरोप को माता मरियम की सुरक्षा में अर्पित करते हुए शांति के लिए प्रार्थना की। कार्डिनल ने कहा, “मिस्सा के अंत में यह समर्पण अति विशिष्ट रहा क्योंकि पिछले साल उन्होंने दुनिया के धर्माध्यक्षों के संग यूक्रेन और रूस को धन्य कुंवारी मरियम को समर्पित किया था। यह हंगरीवासियों की अति प्राचीन परंपरा से मेल खाता है,  क्योंकि संत स्तीफन ने भी ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, पूरे देश को,  कुंवारी मरियम को समर्पित किया था।” इसकी यादगारी में संत स्तीफन की प्रतिमा आज भी फतिमा में स्थापित है जो इस ऐतिहासिक घटना का साक्ष्य देता है।

चमत्कारों को मरियम को सौंपना

“हमने पिछले साल यह चिन्हित किया जिसे पूर्वी और पश्चिमी ख्रीस्तीय ने समझा कि हम सारी चीजों को दिव्य ईश्वर के हाथों कुंवारी मरियम की प्रेममयी मध्यस्थ में सौंपते हैं क्योंकि हम अकेले मानव शक्ति से जीवन का हल नहीं कर सकते हैं" कार्डिनल ने कहा।

कार्डिनल एर्दो ने इस बात की याद दिलाई कि रविवार को ख्रीस्तयाग के अंत में संत पापा फ्राँसिस ने धन्य कुँवारी मरियम की मूर्ति के सामने प्रार्थना की।

“यह वह चिह्न है, जो ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, बाकोज़ गिरजाघर के मार्ग में मिला था जब एज़्टरगोम शहर को तुर्कों से मुक्त किया गया था, और यह पुराना चिह्न महागिरजाघर के खंडहरों के नीचे पाया गया था", उन्होंने कहा।

कार्डिनल ने प्रेरितिक यात्रा की कुछ झलकियों पर विचार करते हुए साक्षात्कार का समापन किया। उन्होंने कहा, “संत पापा की प्रेरितिक यात्रा धर्माध्यक्षों, पुरोहित, उपयाजक, लोकधार्मियों, विश्वास के शिक्षक और कलीसिया के जीवन में सक्रिय सभी लोगों के साथ-साथ गरीबों, विकलांगों, नेत्रहीन बच्चों, बेघरों और अन्य लोगों को बहुत ही प्रोत्साहित किया है।”

कार्डिनल एर्दो ने कहा कि हंगरी के विश्वासीगण संत ऐलिजबेद के गिरजाघर में एक शरणार्थी परिवार द्वारा दी गई अविस्मरणीय गवाही, ग्रीक काथलिक समुदाय के लिए संत पापा की श्रद्धेय और भावभिनी यात्रा, रविवार की सुबह संसद के प्रांगण में अर्पित ख्रीस्तीयाग जो आनंद से भरा शांतिपूर्ण और प्रार्थनापूर्ण वातावरण में समापन हुआ कभी नहीं भूलेंगे। 

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01 May 2023, 16:29