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श्रीलंका की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर पानी की बौछार करती पुलिस श्रीलंका की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर पानी की बौछार करती पुलिस   (AFP or licensors)

श्रीलंका के धर्माध्यक्षों ने रानिल विक्रमसिंघे से मुलाकात की

श्रीलंका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष हारोल्ड अंतोनी पेरेरा और श्रीलंका के नवनियुक्त राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने देश में राजनीतिक एवं आर्थिक संकट के बीच काथलिक धार्मिक मामले पर एक विशेष बातचीत की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

जुलाई 2021 में कार्यभाल संभालने के बाद राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ काथलिक धर्माध्यक्षों की यह पहली मुलाकात है जिसमें उन्होंने काथलिक धार्मिक मामलों एवं देश के वर्तमान संकट पर चर्चा की।  

धर्माध्यक्ष पेरेरा और विक्रमसिंघे दोनों ने बातचीत को "फलप्रद" बतलाया। मुलाकात 2 अक्टूबर को कुरूरेगाला के धर्माध्यक्षीय आवास में सम्पन्न हुई। सभा में धर्मप्रांत के और दो पुरोहित एवं पूर्व मंत्री रवि करूणानायक भी उपस्थित थे।

चर्चा में काथलिक धार्मिक मामले और वर्तमान संकट

बिशप परेरा ने विक्रमसिंघे को उन चिंताओं और मुद्दों से अवगत कराया, जिनका सामना एशियाई देश में लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक संकट के बीच स्थानीय ख्रीस्तीय समुदाय कर रहा है।

हालांकि, सरकार विरोधी अभूतपूर्व प्रदर्शनों और विरोधों के कारण 15 जुलाई को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को पद से हटा दिया गया, आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, ईंधन, दवा एवं अन्य बुनियादी वस्तुओं की कमी से देश अभी भी जूझ रहा है जो अपने इतिहास में मुद्रा एवं ऋण संकट और सामाजिक-राजनीतिक अशांति के साथ सबसे खराब स्थिति में है।

श्रीलंका के 2.3 मिलियन बच्चों को पोषण सहायता की आवश्यकता

आर्थिक और वित्तीय कठिनाइयाँ, सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन, कोविड-19 महामारी, और फिर यूक्रेन में युद्ध, श्रीलंका में लोगों के जीवन और आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं, जिनमें मध्यम वर्ग भी शामिल हैं जो अपनी जरूरतों को पूरा करने और अपने बच्चों को खिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

यूनिसेफ ने कहा कि श्रीलंका के 2.3 मिलियन बच्चों को पोषण सहायता की आवश्यकता है।

वित्तीय और पेशेवर साधनों के साथ श्रीलंका से जो विदेश जा सकते हैं ऐसे करीब 22 मिलियन लोग राष्ट्र छोड़ रहे हैं: फिदेस न्यूज एजेंसी के अनुसार, पिछले आठ महीनों में 500 से अधिक डॉक्टरों ने देश छोड़ दिया है, और इंजीनियर भी ऐसा ही कर रहे हैं।

श्रीलंका में काथलिक कलीसिया के लिए बड़ी चिंता 2019 में पास्का रविवार को बम विस्फोटों के लिए न्याय और सच्चाई का मुद्दा है जिसमें 270 से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग 500 घायल हुए थे क्योंकि समन्वित इस्लामी आतंकवादी आत्मघाती हमलों की एक श्रृंखला से तीन गिरजाघरों और तीन होटल प्रभावित हुए थे।

जांच लड़खड़ा गई है और कलीसिया ने श्रीलंकाई अधिकारियों पर आसन्न हमले पर खुफिया रिपोर्टों की उपेक्षा करने और फिर राजनीतिक लाभ के लिए वास्तविक अपराधियों को ढंकने का आरोप लगाया है।

इन आरोपों को कोलंबो के कार्डिनल मालकोम रंजीत ने बार-बार और जोरदार तरीके से आवाज दी है, जो पिछले महीनों से श्रीलंका के सामाजिक और आर्थिक संकटों के समाधान के लिए अपनी आवाज दे रहे हैं।

हालांकि, कोलम्बो के अधिकारियों ने 16 सितम्बर को जाँच में एक कदम आगे बढ़ाया, जब एक स्थानीय अदालत ने पास्का रविवार के हमले के शिकार लोगों के लिए नैशनल काथलिक कमेटी फॉर जस्टिस के साथ एक पीड़ित द्वारा दायर एक याचिका के परिणामस्वरूप पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना को एक संदिग्ध बताया है। उनके 14 अक्टूबर को अदालत में पेश होने की उम्मीद है।

सिरिसेना, जिन्हें इस मामले में विशेष राष्ट्रपति जांच द्वारा नरसंहार के लिए पहले ही जिम्मेदार ठहराया जा चुका है, लेकिन कभी मुकदमे का सामना नहीं किया था, उनपर हमलों पर चेतावनियों को नजरअंदाज करने और निवारक कार्रवाई का आदेश नहीं देने का आरोप है। किन्तु उन्होंने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया है।

 

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06 October 2022, 16:08