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रोम रेलवे स्टेशन के पास डेरा डाले हुए एक बेघर व्यक्ति रोम रेलवे स्टेशन के पास डेरा डाले हुए एक बेघर व्यक्ति  (ANSA) #SistersProject

सिस्टर मरिया का प्रवासियों और बेघरों के लिए केंद्र चलाने का अनुभव

सिस्टर मारिया जोवान्ना टिटोने, सीएसजे, शम्बरी के संत जोसेफ की धर्मबहन, उत्तरी इटली में एक पल्ली शयनागार केंद्र चलाती हैं और बताती हैं कि कैसे वे कई लोगों के जीवन को जानने में सक्षम हुई और बड़ी-बड़ी चुनौतियों का सामना करना सीखा।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

रवेन्ना, शनिवार 17 सितम्बर 2022 (वाटिकन न्यूज) : एक पल्ली शयनागार केंद्र के प्रबंधन का समन्वय कई कहानियों के साथ सीधे संपर्क में आने का अवसर देता है। सिस्टर मारिया जोवान्ना बताती हैं, “बेघर लोगों के साथ मेरे पिछले स्वयंसेवी अनुभव शायद उनसे संपर्क करने के लिए "रणनीतियों" को खोजने और उन्हें वह देने पर अधिक केंद्रित थे जो मैं कर सकती थी: खाने या पीने के लिए कुछ सामग्री, आराम और प्रोत्साहन के कुछ शब्द, उपयोगी या संभावित रूप से उपयोगी जानकारी।”

दूसरी ओर, ऐसे केंद्र का प्रबंधन करना, चुनौतियों की अपनी कड़ियों के साथ आता है। इसमें हमारे द्वारा स्वागत किए जाने वाले लोगों के लिए जगह बनाने के बावजूद भी ख्रीस्तीय आशा की घोषणा करना जारी रखने के सर्वोत्तम इरादे शामिल हैं, जिसके लिए हम अक्सर जाने जाते हैं।

संत रोक्को पल्ली के शयनागार
संत रोक्को पल्ली के शयनागार

इतालवी शहर रवेन्ना में शयनागार

हमारा "गुड समारिटन" शयनागार, इतालवी शहर रवेन्ना में संत रोक्को पल्ली में स्थित है, जो इसे बंद करने से संबंधित दैनिक चुनौती का सामना करता है। युवा प्रवासियों से लगातार आवास का अनुरोध बहुत ज्यादा हैं, जो कागजात की प्रतीक्षा करते हैं और सीएएस (असाधारण आवास केंद्र) में डाले जाते हैं, जो अधिक भीड़ वाले होते हैं।

रवेन्ना प्राथमिक प्रवास मार्ग का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह बात सामने आई है कि वहां की पुलिस मुख्यालय की कागजी कार्रवाई के लिए इटली में कानूनी स्थिति प्राप्त करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की उम्मीद में कई प्रवासी यहाँ आते हैं। लेकिन उन्हें काम, आवास या पैसे के बिना लंबी प्रतीक्षा अवधि (औसतन दो से आठ महीने तक) का सामना करना पड़ता है।

हमारे पास समान रूप से मानसिक बीमारी और नशे की लत से पीड़ित लोगों के अनुरोध भी असंख्य हैं, जो अपने परिवारों या स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा नहीं पा सकते हैं और हमारे जैसे शयनगारों में आते-जाते रहते हैं।

हमारा छोटा सा केंद्र, जिसमें कोविद के समय में अधिकतम 15 पुरुष और तीन महिलाएं रह सकती थीं, उन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जो खुद से बहुत बड़ा है। मैं अक्सर सोचा करती हूँ कि इस शयनगार में सुसमाचार संदेश को जीने का क्या मतलब है? इसके लिए दृढ़ संकल्प और एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है, सार्वजनिक संस्थानों के साथ संबंधों की देखभाल, क्षेत्र और इसके संसाधनों का ज्ञान और अपने स्वयं के बारे में जागरूकता की आवश्यकता है। वास्तव में, हमें कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं, जैसे कुछ लोगों को आक्रामकता या आंतरिक नियमों के गंभीर उल्लंघन के कारण उन्हें भेज देना या यह स्वीकार करना कि हम अपने मेहमानों द्वारा अनुभव की जाने वाली कुछ समस्याओं का समाधान करने में असमर्थ हैं।

स्वंय सेवकों का कार्य

अकेले इन लोगों की देखभाल करने का बोझ उठाना हमारे छोटे स्वागत केंद्र की ज़िम्मेदारी नहीं है, जिसकी स्थापना 20 साल पहले रवेन्ना महाधर्मप्रांत के फादर उगो सालवातोरी ने स्वंय सेवकों की मदद से की थी।

जिन प्रशासनों के साथ हम नेटवर्क बनाने की कोशिश करते हैं, वे अक्सर हमारे जैसे केंद्रों पर आधारित हो जाते हैं ताकि उन स्थितियों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रदान की जा सके, जहां ऐसी सहायता को अधिकार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। यह सर्वविदित है कि मामलों को आगे बढ़ाने करने के लिए आर्थिक संसाधनों और सहायता कर्मियों की कमी है। स्वास्थ्य और आवास की जरूरतों वाले लोगों के स्वागत के लिए पर्याप्त संरचनाओं की कमी है और हमारे देश में प्रवासियों की उपस्थिति को वैध बनाने के लिए प्रतीक्षा समय बहुत लंबा और अनिश्चित है।

इन सभी कारणों से, बिस्तर और स्नानगृह प्रदान करना पर्याप्त नहीं है, हालांकि जिन लोगों का हम स्वागत करते हैं, उन्हें सड़कों से और हताशा से बचाने के लिए एक बिस्तर और स्नानगृह पर्याप्त है। हमें उन लोगों की आवाज बनने की जरूरत है जो हमारे पश्चिमी समाज में आवाजहीन हैं, संस्थानों और जनमत का ध्यान आकर्षित करते हैं ताकि कमजोर लोगों को याद रखना केवल चुनावी अभियान का नारा नहीं है बल्कि नागरिकता की मांग है, यहां तक ​​कि मांग से पहले उदारता है।

दया और ख्रीस्तीय आशा

ख्रीस्तियों के रूप में हम उन नीतियों के लिए समझौता नहीं कर सकते हैं जो वोट एकत्र करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का उपयोग करते हैं। हमें मांग करनी चाहिए और पूछना चाहिए कि परियोजनाएं और संबंधित प्रशासनिक विकल्प लोगों और विशेष रूप से सबसे कमजोर लोगों की वास्तविक जरूरतों का जवाब दें।

दया और ख्रीस्तीय आशा के परिप्रेक्ष्य से हम हमारे पल्ली शयनगार केंद्र में जो कुछ कर रहे हैं उससे संतुष्ट नहीं हो सकते। हमें एक सक्रिय और आलोचनात्मक विवेक की आवश्यकता है जो सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए अनिवार्य महसूस करता है और ठोस विकल्पों के माध्यम से यह पूछने के लिए प्रतिबद्ध है कि कम से कम शोषण न किया जाए और बाद में भुला दिया जाए।

एक कलीसिया के रूप में, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे संस्थापक मूल्यों का उपयोग उन लोगों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए नहीं किया जाता है जो ख्रीस्तीय और गैर ख्रीस्तीय हैं, बल्कि यह कि वे राजनीतिक और सामाजिक निर्णयों में ठोस रूप से पूरे होते हैं जो एक ऐसे समाज को बढ़ावा देते हैं जिसमें प्रत्येक महिला की मानवीय गरिमा होती है और हर मनुष्य पहचाना जाता है।

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17 September 2022, 15:33