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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (©doidam10 - stock.adobe.com)

महाधर्माध्यक्ष ने पाकिस्तान में अपहृत और प्रताड़ित नाबालिगों पर प्रकाश डाला

पाकिस्तान में लाहौर के महाधर्माध्यक्ष सेबस्तियन शॉ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान में ख्रीस्तीय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के युवाओं के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न को दूर करने के लिए और अधिक प्रयास करने का आग्रह किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वााटिकन सिटी

पाकिस्तान में हर साल 1,000 ख्रीस्तीय और हिंदू महिलाओं एवं 12 से 25 साल की लड़कियों का अपहरण किया जाता है।

इन आंकड़ों ने लाहौर के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन शॉ को देश में ख्रीस्तीय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के अपहरण, यौन उत्पीड़न और युवाओं के जबरन धर्मांतरण को संबोधित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करने हेतु प्रेरित किया है।

कमजोर युवा

सेतुबल धर्मप्रांत में ख्रीस्त राजा तीर्थस्थल पर महाधर्माध्यक्ष ने कहा, "ये बच्चे बगीचे में खेलने तक के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। हमारा कर्तव्य है कि जो हो रहा है उसे रोकने के लिए हम आवाज उठायें।"

उन्होंने पीड़ित बच्चों के माता-पिताओं के दुःख पर भी प्रकाश डाला, "“इन माता-पिताओं की स्थिति की कल्पना करें, जो अपने बच्चों के स्कूल बैग तैयार करते हैं, उन्हें स्कूल भेजते हैं, और फिर उन्हें कभी नहीं देखते क्योंकि उनका अपहरण कर लिया जाता है। कभी-कभी उनके शव मिल जाते हैं, और वे अंतिम संस्कार कर सकते हैं, और शोक मना सकते हैं। लेकिन कई बार, माता-पिता अपने बच्चों के लापता होने पर केवल रोते हैं।"

पुर्तगाल के काथलिक उदारता संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महाधर्माध्यक्ष शो ने याद किकया कि मामला केवल लड़कियों को प्रभावित नहीं करता, कई बार लड़के भी अपहरण कर लिये जाते हैं तथा यौन दुराचार एवं हत्या के शिकार होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय मदद

महाधर्माध्यक्ष शो ने रेखांकित किया कि पाकिस्तानी सरकार अपहरण, बलत्कार, जबरन शादी और जबरन धर्मांतरण के मामलों से निपटने का प्रयास कर रही थी किन्तु अंतरराष्ट्रीय समुदाय ही समस्या का समाधान करने में मदद कर सकता है।

उन्होंने कहा कि लाहौर महाधर्मप्रांत एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक दल के साथ इन मामलों के लिए कार्य कर रही थी।

इन मामलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए, महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि एड टू द चर्च इन नीड द्वारा आयोजित इस तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम, "मामलों की संख्या को कम करने के प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।"

2021 में ब्रिटेन की एड टू द चर्च शाखा ने उनकी पुकार सुनें रिपोर्ट तैयार किया था जिसमें ख्रीस्तीय महिलाओं और बालिकाओं के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और यौन दुराचार के शिकार लोगों पर ध्यान दिया गया था।

इसने मिस्र, इराक, मोजाम्बिक, नाइजीरिया और सीरिया के साथ-साथ पाकिस्तान में ख्रीस्तीय समुदायों की समस्याओं की जांच की है।

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14 July 2022, 17:25