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संत जॉन लातेरन महागिरजाघर संत जॉन लातेरन महागिरजाघर   (Vatican Media)

परिवारों की विश्वसभा के लिए लातेरन में 'सिंडोनी' की प्रदर्शनी

सिंडोनी समकालीन कला प्रदर्शनी का नाम है जिसका आयोजन परमधर्मपीठीय जॉन पौल द्वितीय ईशशास्त्रीय संस्थान एवं सिदिवल फिला फाऊँडेशन के सहयोग से रोम धर्मप्रांत एवं रोम में लोकधर्मी, परिवार एवं जीवन के लिए गठित परिषद द्वारा परिवारों के लिए विश्व दिवस हेतु किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत जॉन लातेरन के बपतिस्मा जलकुण्ड के आसपास जलकुण्ड के आठ चित्रफलक हैं।

चित्रफलक का निर्माण सिदिवल फिला के द्वारा किया गया था जो 8वीं 18वीं और 19वीं सदी में बनायी गई थी। वे धर्मविधि में प्रयोग किये जानेवाले याजकों के परिधान हैं जिन्हें सूती कपड़ों को सुरक्षित रखने की खास विधि से रखा गया है। चित्रफलक के पीछे दर्पण लगे हैं, जो तत्वों को प्रतिबिंबित करते जबकि खिड़कियाँ अनंत और अपरिभाषित रिक्त स्थान के लिए खुली हैं।

प्रदर्शनी के लिए प्रवेश निःशुल्क है जो 17 से 30 जून 2022 तक, हर दिन सुबह 9 बजे से शाम 8 बजे तक खुली है। प्रदर्शनी को परिवारों के लिए विश्व दिवस के अवसर पर रात 10.00 बजे तक खुला रखा जाएगा।

इसका उद्घाटन 17 जून को शाम 7 बजे एक समारोह के साथ किया जाएगा। यह पहल, परिवारों के लिए विश्व दिवस हेतु जॉन पौल द्वितीय संस्थान के तत्वधान में आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा है।  

प्रोफेसर जोवन्नी चेसारे पागाजी ने बतलाया कि जॉन पौल द्वितीय संस्थान पेंटिंग, मूर्तिकला, संगीत, साहित्य, फोटोग्राफी और सिनेमा जैसी कलाओं की प्रेरणा को सुनने और प्रतिक्रिया व्यक्त करने का प्रयास करता है। कला, वास्तव में, रूपों और ताकतों के एक साथ बुनाई के रूप में, परिवार की वास्तविकता के बारे में बहुत कुछ कहने के लिए है, जिसके साथ स्पष्ट रूप से या परोक्ष रूप से व्यवहार करना।

प्रदर्शनी समय, स्मृति, कई लोगों के अनुभवों पर चिंतन करने का अवसर देता है जो कपड़ों पर अमिट रूप से छापी गयी है। कपड़ों पर आकृतियों की झलक दिखाई देती है, जो शरीर के 'कफ़न' की तरह, पसीना, दाग और घाव के साथ, एक निरंतर संवाद में एक साथ हैं।

इस प्रदर्शनी में हम सभी परिवारों के शरीर और चेहरे को देख सकते हैं, उनके दैनिक जीवन की थकान और संबंधों द्वारा उत्पन्न घावों को जो विश्व के इतिहास में सार्वभौमिक स्वीकृति और मुक्ति की आशा की ओर ले जाती हैं।

सिदिवल फिला एक फ्रांसिसकन धर्मबंधु और 1999 से एक पुरोहित

फादर सिदिवल फिला का जन्म ब्राजील में 1962 में हुआ था जिन्होंने रोम के जेमेली अस्पताल एवं रेबिबिया जेल में अपनी प्रेरिताई की।

उन्होंने अपनी कलात्मक कार्यों को छोड़ दिया था जब धर्मसमाज में प्रवेश किया, जिसको उन्होंने अठारह साल बाद एक शोध पथ के साथ फिर से शुरू किया, जिसने उन्हें अनुपयोगी सामग्री, विशेष रूप से कपड़े, कपास, रेशम, पटसन, बेल बूटेदार वस्त्र आदि से बने कपड़ों से निपटने के लिए प्रेरित किया कि वे इसके लिए एक आवाज दें। जिससे कि वे बेकार न हो जाएँ।

फिला ने मडरिड, पेरिस, मियामी और बोगोटा में भी प्रदर्शनी की है। वे वाटिकन संग्रहालयों के आधुनिक और समकालीन कला के स्थायी संग्रहालय के लिए भी प्रयासरत हैं और उनकी एक कृति जॉन पौल द्वितीय संस्थान के सभागार में प्रदर्शित है।

प्रदर्शनी का आयोजन परिवारों के लिए विश्वसभा के अवसर पर जॉन पौल द्वितीय संस्थान के द्वारा किया गया है जिसका उद्घाटन 21 जून को पूर्वाहन 10 बजे होगा जब दर्शक संस्थान का भी दौरा कर सकेंगे।

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16 June 2022, 16:52