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मारियुपोल से  अपने वाहनों भागते हुए  लोग मारियुपोल से अपने वाहनों भागते हुए लोग  (ANSA)

मारियुपोल: एक शहर की पीड़ा जो अब नहीं रही

शहीद यूक्रेनी शहर मारियुपोल से भागने के बाद, एक पौलिन पुरोहित फादर पावलो, "बिना किसी राहत के अथक दैनिक गोलाबारी, एक चौकी से दूसरे तक भागने वाले उन लोगों की पीड़ा के बारे में अपनी गवाही देते हैं, जिन्होंने सब कुछ खो दिया।"

माग्रेट सनीता मिंज-वाटिकन सिटी

मारियुपोल, शनिवार 26 मार्च 2022 (वाटिकन न्यूज) : "यह समझना बहुत मुश्किल है कि यूक्रेन में वास्तव में क्या हो रहा है जब तक कि कोई इसे व्यक्तिगत रूप से अनुभव न करे।"

2011 से 5 मार्च 2022 तक, फादर पावलो टोमास्ज़ेवस्की ने सेंट पॉल द फर्स्ट हर्मिट धर्मसंघ के दो अन्य पुरोहितों के साथ, यूक्रेनी शहर मारियुपोल में अपने मिशन में संलग्न थे, जो कि रूसी सेना के आक्रमण अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण, दूसरों की तुलना में अधिक पीड़ित है।

फादर पावलो अपने दोनों पुरोहितों और कुछ पल्लीवासियों के साथ भागने में सफल रहे और अब देश के दक्षिण-पश्चिम में अपने गृहनगर कामजानेक-पोडिल्स्कीज में है।

एड टू द चर्च इन नीड (एसीएन) फाउंडेशन द्वारा आयोजित पत्रकारों के साथ एक ऑनलाइन बैठक के दौरान उन्होंने अपनी कहानी हमें यह समझने में मदद करने के लिए बताई, कि कितने अन्य लोग, जो अभी भी "सर्वनाश" में फंसे हुए हैं। फादर पावलो मारियुपोल में फंसे लोगों की स्थिति के बारे बता नहीं सकते, क्योंकि उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं। वहाँ बिजली नहीं है और मोबाइल फोन काम नहीं कर रहा है।

एक अप्रत्याशित आक्रमण

फदर पावलो ने कहा, "हालांकि मारियुपोल 2014 से संघर्ष की रेखा पर है, 24 फरवरी को शुरू हुआ आक्रमण अप्रत्याशित था," शुरुआत से ही रूसी सेना ने आसपास के गांवों और शहर के पूर्वी हिस्से पर गोलाबारी की। उनहोंने न केवल यूक्रेनी सेना बल्कि नागरिकों को भी मारना शुरु किया। गोलाबारी का शोर शहर के केंद्र में स्थित चेस्तोकोवा की माता मरियम पल्ली तक पहुंच गया, जो  पौलिन फादरों की देखरेख में है।

"मैं समझ गया था कि स्थिति गंभीर थी और हमें शायद लोगों को निकालना होगा," फादर पावलो ने जारी रखा, "हालांकि, पहले तो कई पल्लीवासी छोड़ना नहीं चाहते थे क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि बमबारी पूरे शहर में फैल जाएगी।"

बमबारी चौबीसों घंटे

इसलिए दो पुरोहितों ने लोगों के साथ रहने, उनकी मदद करने, पवित्र मिस्सा करने और उनके साथ प्रार्थना करने का फैसला किया।

4-5 दिनों के बाद स्थिति बहुत खराब हो गई थी, रूसियों ने शहर के केंद्र में आवासीय पड़ोस पर विभिन्न प्रकार के हथियारों से हमला करना शुरू कर दिया था। "गोलीबारी लगभग चार दिन, चौबीसों घंटे बंद नहीं हुई।" "गोलीबारी की तीव्रता इतनी लगातार थी कि किसी की सांस लेने का समय नहीं था। पूरे दिन और रात में, आधे घंटे का भी मौन नहीं था।"

दोनों पुरोहितों के पास छिपने के लिए आश्रय तक नहीं था; थोड़ा और सुरक्षित महसूस करने के लिए, वे अपने घर के उस कमरे में चले गए जहाँ से बमबारी कम सुनाई दे रही थी।

डर और यात्रा

मारियुपोल पर हमले के तीसरे दिन, शहर बिजली और पानी के बिना रह गया था। घर छोड़ने का मतलब था मारे जाने का जोखिम उठाना।

फादर पावलो का न केवल अपने पल्लीवासियों से, बल्कि पूरी बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया। उन संक्षिप्त क्षणों में जब इंटरनेट काम करता था, वे अपने सेल फोन पर कुछ समाचार पढ़ते थे या अपनी कार में रेडियो सुनते थे, लेकिन ईंधन बचाने के लिए लंबे समय तक सुन नहीं पाते थे।

उन्होंने कहा, "छोड़ने का फैसला लेना आसान नहीं था। एक तरफ, हमें डर था कि एक बार खाली हो जाने पर हमारा घर लूट लिया जा सकता है, दूसरी तरफ, हम जानते थे कि एक बम घर और हम दोनों को नष्ट कर सकता है।" और फिर, हम रूसी सेना के हाथों में पड़ने से भी डरते थे जिसने मारियुपोल को घेर लिया था।"

चौकियाँ

अंत में, दो पुरोहितों ने अपनी सबसे आवश्यक चीजें कार में रखीं, अपने दस्तावेज ले लिए, अपने याजकीय कपड़े पहने और ज़ापोरिज्जिया निकास की ओर चल पड़े, जो मारियुपोल से 220 किमी दूर है। रास्ते में, वे शहर से बाहर निकलने की कोशिश में 5-6 अन्य निजी कारों के साथ शामिल हो गए।

सड़कों से गुजरते हुए नष्ट हुई इमारतें, जली हुई कारें, परित्यक्त दुकानों के माध्यम से खोज रहे लोगों का दृश्य दिल दहला देने वाला था। हमने कुछ रूसी सेना चौकियों को पार किया जहां हमारी पहचान पत्र की जांच की गई और हमें अपनी यात्रा जारी रखने की अनुमति दी गई।

लगभग 20 किमी के बाद, वे एक और रूसी चौकी के पास आए, जहां उन्हें बताया गया कि एक दिन पहले सैनिकों को केवल महिलाओं और बच्चों को आगे जाने का आदेश मिला है, पुरुषों को नहीं।

फादर पावलो ने कहा, "आपको इस दृश्य की कल्पना करनी होगी, ठंड में हम खेतों के बीच में थे। कारों की एक लंबी लाइन थी (लगभग सौ), ड्राइविंग सीट पर पुरुष, और यात्री सीटों पर उनकी पत्नियां और बच्चे। गाड़ी को पीछे मोड़ने की कोई संभावना नहीं थी। कुछ के पास ज्यादा ईंधन नहीं था। लोग सैनिकों के पास जाते थे, महिलाएं घुटने टेकती थीं, उनसे भीख मांगती थीं, क्योंकि कई महिलाएं गाड़ी चलाना भी नहीं जानती थीं, लेकिन यह सब व्यर्थ था।"

सबसे बड़ी आशा

लगभग पांच घंटे के बाद अचानक पास के एक गांव के मेयर पहुंचे और कहा कि वह रात के लिए सभी लोगों को आतिथ्य देना चाहते हैं। गांव के निवासियों ने मारियुपोल के लगभग 400 लोगों का अपने घरों में स्वागत किया।

अगले दिन वे उस चौकी से बचने के लिए एक और सड़क खोजने में कामयाब रहे और वे ज़ापोरिज्जिया की ओर चल पड़े। वे अत्यधिक चिंचित थे। किसी तरह रुसी चौकी पार करते हुए आगे बढ़ने में कामयाब रहे और अंत में जीवित अपने गंतव्य पर पहुँच गए।

फादर पावलो के लिए ये घटनाएँ अभी भी वर्तमान का हिस्सा हैं, और वह उन्हें भूलना नहीं चाहते, क्योंकि मारियुपोल में, उनके पल्लीवासी फंस गए हैं। उन्होंने कहा, "मुझे सबसे ज्यादा चिंता मेरे पल्ली वासियों के लिए है और मेरी सबसे बड़ी आशा भी है कि मेरी पल्ली के लोग जीवित रहें। मुझे आशा है कि ईश्वर उनकी रक्षा करेंगे।" उन्होंने सभी से इस नरसंहार को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का आग्रह किया।

 

 

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26 March 2022, 15:17