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फ्राँस में बाल यौन शोषण के शिकार युवाओं का साक्ष्य सुनते पुरोहितों का सम्मेलन,  17.10.21 फ्राँस में बाल यौन शोषण के शिकार युवाओं का साक्ष्य सुनते पुरोहितों का सम्मेलन, 17.10.21   (AFP or licensors)

बाल यौन शोषण पर रोक सम्बन्धी यूरोपीय दिवस पर कार्डिनल ओमाली

वाटिकन स्थित नाबालिगों की सुरक्षा सम्बन्धी परमधर्मपीठीय आयोग के अध्यक्ष अमरीका के कार्डिनल शॉन ओमाली ने गुरुवार 18 नवम्बर को बाल यौन शोषण को समाप्त करने हेतु मनाये गये यूरोपीय दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यशिविर में संदेश भेजकर बच्चों के विरुद्ध यौन दुराचार की गम्भीरता को रेखांकित किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 नवम्बर 2021 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित नाबालिगों की सुरक्षा सम्बन्धी परमधर्मपीठीय आयोग के अध्यक्ष अमरीका के कार्डिनल शॉन ओमाली ने गुरुवार 18 नवम्बर को बाल यौन शोषण को समाप्त करने हेतु मनाये गये यूरोपीय दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यशिविर में संदेश भेजकर बच्चों के विरुद्ध यौन दुराचार की गम्भीरता को रेखांकित किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बाल यौन शोषण पर प्रकाशित आँकड़ों का स्मरण दिलाकर कार्डिनल ओमाली ने कहा कि हमें स्वीकार करना होगा कि समस्या जटिल और गम्भीर है तथा उसी के अनुसार बाल यौन शोषण को रोकने के लिये उपयुक्त  कदम उठाने होंगे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पांच में से एक महिला और तेरह में से एक पुरुष अपने 18वें जन्मदिन से पहले यौन शोषण का शिकार बनता है। कम से कम साठ प्रतिशत बाल यौन शोषण के शिकार अथवा उत्तरजीवी कभी भी अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का खुलासा नहीं करते हैं।

यूरोपीय परिषद का प्रयास

 

यूरोपीय परिषद द्वारा 18 नवम्बर को स्थापित, बाल यौन शोषण पर रोक सम्बन्धी यूरोपीय दिवस पहली बार 2015 में मनाया गया था। इस वर्ष इस विशिष्ट दिवस का विषय है "बच्चों के लिए विश्वास के चक्र को वास्तव में सुरक्षित बनाना"। बॉस्टन के कार्डिनल ओमाली ने यूरोपीय परिषद की पहल की सराहना की और कहा कि इस दिवस ने नागर समाज एवं सरकारों को बाल यौन शोषण की समस्या के प्रति जागरुक किया है।  

कलीसिया के प्रयास 

नाबालिगों की सुरक्षा सम्बन्धी परमधर्मपीठीय आयोग के अध्यक्ष कार्डिनल ओमाली ने कहा कि हालांकि बाल यौन शोषण एक विश्वव्यापी समस्या है तथापि, उन्होंने स्वीकार किया कि बाल यौन शोषण की समस्या से कलीसिया भी अछूती नहीं रही है। उन्होंने कहा, "फ्रांस में, काथलिक कलीसिया द्वारा यौन शोषण पर स्थापित स्वतंत्र आयोग का अनुमान है कि 1950 से 2020 की अवधि में 216 000 बच्चों ने कलीसिया में  यौन शोषण का सामना किया। ऑस्ट्रेलिया में भी 40 प्रतिशत बच्चों को किसी न किसी प्रकार यौन दुराचार का शिकार बनाया गया।" उन्होंने कहा कि इस अभिशाप को रोकने हेतु कलीसिया ने उपयोगी सुझाव रखें हैं जिनपर अमल किया जाना नितान्त आवश्यक है।  

कार्डिनल ओमाली ने इस बात पर बल दिया कि जिस बात को हम स्वाकर नहीं करते उसका हम सुधार भी नहीं कर सकते, अस्तु सबसे पहले अपने ग़लतियों को स्वीकार किया जाना ज़रूरी है। समस्या की गम्भीरता का स्मरण दिलाते हुए उन्होंने कहा, “यदि हम मामले की जड़ को संबोधित नहीं करते हैं तो हम टूटे हुए भरोसे को बहाल नहीं कर सकते। इसके लिए ईमानदार और स्वतंत्र जांच तथा सूचित कार्रवाई की जरूरत है।"

कार्डिनल महोदय ने कहा कि सन्त पापा फ्राँसिस तथा नाबालिगों की सुरक्षा सम्बन्धी परमधर्मपीठीय आयोग का विश्वास है कि यौन दुराचार के शिकार बने नाबालिगों का पुनर्वास तथा उन्हें भौतिक ही नहीं अपितु मनोवैज्ञानिक समर्थन एवं उपचार प्रदान कर ही अर्थपूर्ण एवं प्रभावशाली नीतियों को लागू किया जा सकता है। बाल यौन शोषण पर 2018 में पुरोहितों एवं ईश प्रजा को सम्बोधित अपने पत्र में सन्त पापा फ्राँसिस ने स्पष्ट किया है कि "जैसे-जैसे समय बीता है, हमने पीड़ितों में से कई के दर्द को जाना है" और यह कि वे जो घाव सहते हैं, वे "कभी नहीं जाते।" 

18 नवम्बर को  बाल यौन शोषण को रोकने हेतु समर्पित यूरोपीय दिवस के साथ ही इटली की कलीसिया द्वारा भी बाल  यौन शोषण की समस्या के प्रति लोगों में चेतना जागरण हेतु प्रार्थना दिवस मनाया गया।

19 November 2021, 12:45