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कार्डिनल चार्ल्स बो कार्डिनल चार्ल्स बो 

म्यांमार के काथलिकों से अपने देश के लिए आवाज उठाने की अपील

म्यांमार के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल चार्ल्स बो ने मिशन रविवार को विश्वासियों का आह्वान किया है कि वे इस चुनौतीपूर्ण समय में अपने देश के लिए आवाज बनें। उन्होंने इस बात पर गौर किया है कि हर प्रकार के अंधेरे में कलीसिया आशा की ज्योति बनी है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

म्यांमार, मंगलवार, 26 अक्तूबर 2021 (वीएनएस)- यांगून के कार्डिनल ने म्यांमार के काथलिकों से आग्रह किया है कि वे बुराई के खिलाफ आवाज उठायें जो उनके देश को तबाह कर रही है, "घृणा से नहीं बल्कि प्रेम से।" उन्होंने यह आग्रह 24 अक्टूबर मिशन रविवार को मिस्सा के दौरान किया।

संत पापा द्वारा इस साल के लिए चुनी गयी विषयवस्तु – हमने जो देखा और सुना है उसके विषय में नहीं बोलना हमारे लिए संभव नहीं" - उसपर चिंतन करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश में बोलने के लिए चुनौतीपूर्ण समय है, जहाँ 1 फरवरी को तख्तापलट के नौ महीने बाद भी सेना द्वारा क्रूर दमन का सिलसिला जारी है।

चुप रहना अपराध

क्रूर हिंसा जो कलीसिया पर भी निशाना साध रही है उसके सामने कार्डिनल ने विश्वासियों का आह्वान किया है कि शक्तिशाली लोगों को बोलें, जो आध्यात्मिक रूप से अंधे हैं, जैसा कि प्रेरितों एवं आरम्भिक कलीसिया के ख्रीस्तीयों ने रोमी सम्राठ के खिलाफ आवाज उठायी थी। उन्होंने कहा कि "इस समय में चुप रहना अपराध हो सकता है जब बुराई सड़कों पर नाच रही है।"

कार्डिनल ने याद दिलाया कि येसु ने किस तरह शक्तिशालियों के खिलाफ आवाज उठायी थी और उन्हें रोमी सैनिकों द्वारा थप्पर मारा गया था, तब उन्होंने कहा था, "यदि मैंने सच बोला तो तुम मुझे मारते क्यों हो?" सैनिक जिन्होंने येसु को थप्पर मारा था उनके पास जवाब नहीं था। सच्चाई के सामने हथियार अधिक महत्वपूर्ण हो गया और पिलातुस ने भी आपराधिक चुप्पी का चुनाव किया।  

हमारे लोगों की पुकार सुनें

याद करते हुए कि इस साल का मिशन रविवार कलीसिया से सुनने, देखने और एक सिनॉडल कलीसिया के रूप में लोगों के साथ चलने का आह्वान कर रहा है, यांगून के महाधर्माध्यक्ष ने "क्रूस के अनन्त रास्ते" की याद की है जिसको सैन्य तख्तापलट के बाद से ही म्यांमार के लोग सह रहे हैं। "हम हमारे लोगों के रूदन को सुन रहे हैं जो येसु के समान पाँच घावों से घायल हैं ˸ कोविड, युद्ध, विस्थापन, आर्थिक पतन, जलवायु तबाही और संकट।"  

प्रेरितों के समान ईश्वर के प्रेम एवं आशा का अनुभव

कार्डिनल बो ने स्मरण दिलाया कि देश में ईश्वर के प्रेम के सुसमाचार की घोषणा, जिसने कई निर्दोष लोगों पर अत्यन्त अमानवीय पीड़ा देखी है, सिर्फ प्रभु से मुलाकात करने एवं प्रेरितों के समान उनके प्रेम का एहसास करने के द्वारा किया जा सकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा, "हमारे दुश्मनों द्वारा पोषित नफरत को अपने अंदर लेने का मतलब होगा, "पराजय"। हालांकि, जीवित ईश्वर का अनुभव करना चीजों को आसान नहीं बनाता। प्रथम ख्रीस्तियों ने विश्वास के जीवन की शुरूआत विरोध और कठिनाई के बीच की, वही क्रूर हिंसा, मौत और भय का अनुभव हमारे लोग कर रहे हैं खासकर, युवा।

शत्रुओं तक पहुँचना

कार्डिनल ने कहा कि करुणामय आशा यहाँ तक कि हमारे शत्रुओं के लिए भी यही कलीसिया का मिशन है, खासकर, आज के म्यांमार में। म्यांमार की कलीसिया को ऊँचे नीचे रास्तों से होकर चलना है, विस्थापित लोगों के जंगल से, शोक से डूबे परिवारों, सुदूर गाँवों से जो गरीबी से परेशान हैं, असमय मौत से अपने बच्चों को बचाने की कोशिश में छिपे लोगों तक पहुँचें। उन लोगों के पास भी पहुँचे जिन्होंने बुराई का रास्ता चुना है।

म्यांमार में हथियार बेचना बंद करें

कार्डिनल बो ने अपने प्रवचन में शक्तिशालियों से जोर देकर अपील की है कि वे म्यांमार में हथियार बेचना बंद करें। “हम सभी म्यांमार के लोग प्रार्थना करें और प्रार्थना करना जारी रखें, कि यह राष्ट्र शांति का दिन देख सके। हम उस आशा को पोषित करें कि म्यांमार अपने करुणामय प्रेम में फिर से उठ सके। आइए हम एक शांतिपूर्ण राष्ट्र की आशा इस देश में प्रचार का हमारा संदेश बनें।"

म्यांमार में मानव अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र का रिपोर्ट

22 अक्टूबर को यूएन ने चिंता जतायी है कि देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिम में हजारों सैनिकों की आवाजाही के बाद म्यांमार में मानवाधिकार की स्थिति और खराब हो सकती है, जहां जातीय मिलिशिया के साथ संघर्ष जारी है।

1 फरवरी के तख्तापलट के बाद से, जिसने आंग सान सू की, की लोकतांत्रिक सरकार को गिरा दिया, देश अराजकता में डूब गया है क्योंकि सेना तख्तापलट के विरोध को बेअसर करने में विफल रही है, जबकि पीपुल्स डिफेंस फोर्स बर्मी सेना से लड़ना जारी रखी हुई है।

26 October 2021, 16:41