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बुडढापेस्ट के संत स्तेफन महागिरजाघर के सामने बच्चे हाथ में झंडा लिए हुए बुडढापेस्ट के संत स्तेफन महागिरजाघर के सामने बच्चे हाथ में झंडा लिए हुए 

यूखरीस्तीय कॉन्ग्रेस कलीसिया के प्रति हमारी दृष्टिकोण को विस्तृत करेगा

अंतराष्ट्रीय यूखरीस्तीय कॉन्ग्रेस जब शुरू हो चुका है तब आयरलैंड में एलफिन के धर्माध्यक्ष केविन डोरान ने इस पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किये जाने पर प्रकाश डाला। अंतराष्ट्रीय यूखरीस्तीय कॉन्ग्रेस 5 –12 सितम्बर को आयोजित की गई है जिसके समापन के लिए संत पापा फ्रांसिस भी बुड्ढापेस्ट आ रहे हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

आयरलैंड, मंगलवार, 7 सितम्बर 21 (रेई)- द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के ठीक एक साल पहले, बुड्ढापेस्ट ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस की मेजबानी की थी।

कॉन्ग्रेस की शुरूआत फ्राँस से हुई थी और यह एक लोकधर्मी महिला मेरी-मार्थे-बैप्टिस्टाइन टैमिसियर की दृढ़ता थी कि पहली बार कांग्रेस 1881 में लिली में आयोजित की गई थी, जिसको वास्तव में पावन संस्कार में उपस्थित येसु ख्रीस्त की भक्ति और विश्वास को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस अब हंगरी लौट रहा है एक ऐसे देश में जिसने अपने इतिहास में कई चुनौतियों का सामना किया है।

कॉन्ग्रेस का उद्घाटन 5 सितम्बर को किया गया जिसकी विषयवस्तु है, "मेरा पूरा जलस्रोत आप में है।" इसे स्रोत्र 87 से लिया गया है और येरूसालेम को एक ऐसे स्थान के रूप में मनाया जाता है जहाँ ईश्वर अपनी प्रजा के बीच निवास करते हैं।

एलफिन के धर्माध्यक्ष केविन डॉरान ने कहा, "विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के बावजूद ओलम्पिक खेल के समान, वर्तमान के इस कॉन्ग्रेस के कारण यह एक वैश्विक सभा बन चुका है। इसे पिछले साल मनाया जाना था, इसीलिए यह 2020 का कॉन्ग्रेस है किन्तु 2021 में मनाया जा रहा है।"    

धर्माध्यक्ष डॉरान जो 2012 में डबलिन के कॉन्ग्रेस के आयोजन के लिए जिम्मेदार थे तथा अंतरराष्ट्रीय यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस में आयरिस धर्माध्यक्षों के प्रतिनिधि हैं उन्होंने गौर किया कि कॉन्ग्रेस का प्रयास, अपनी पल्ली स्तर की सीमा से ऊपर तथा कुछ हद तक कलीसिया के लिए हमारे दृष्टिकोण को विस्तृत करेगा। साथ ही, ईश प्रजा को ईश वचन एवं उनके शरीर और रक्त से पोषित करेगा।   

डबलिन में 2012 के कॉन्ग्रेस के आयोजन में मुख्य भूमिका निभा चुके धर्माध्यक्ष ने विनम्रता से कहा कि उन्होंने "छोटे रूप में" इस साल के कॉन्ग्रेस के ईशशास्त्रीय दस्तावेज के अंग्रेजी अनुवाद में मदद की है। उन्होंने गौर किया कि इस कार्य ने उन्हें "कांग्रेस के विषय के पीछे की कहानी में अंतर्दृष्टि और बुडापेस्ट में जमीन पर लोगों के साथ कुछ कामकाजी संबंध रखने का मौका भी दिया।"

कॉन्ग्रेस का आयोजन

यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस के आयोजन के कार्य के बारे पूछे जाने पर धर्माध्यक्ष ने बतलाया कि इसमें धर्मविधि एवं धर्मशिक्षा दोनों के परिपेक्ष्य शामिल हैं। इसका तीसरा आयाम जिसे हम तैयारी कह सकते हैं, स्थान की तैयारी, ध्वनि उपकरण, स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण, इंटरनेट और फेसबुक पर सामग्री डालना ताकि लोग विदेशों से जुड़ सकें। मैं कह सकता हूँ कि जब हमने 2012 में आयोजन किया था तब 50 स्टाफ और 2500 स्वयंसेवक थे।"  

पोप की सहभागिता

यूरोप और विश्व के कई देश, कोविड-19 और उसके कारण लॉकडाऊन की स्थिति में एक लम्बे समय के लिए पवित्र यूखरिस्त को ग्रहण नहीं कर सके। धर्माध्यक्ष डोरान ने कहा कि यह कॉन्ग्रेस खास है क्योंकि इसके द्वारा भले ही छोटे दलों में किन्तु लोग पुनः एक साथ आ पायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समापन समारोह के लिए संत पापा फ्राँसिस का बुडढापेस्ट में होना एक विशेष अवसर होगा किन्तु सुरक्षा के मामले में एक चुनौती भी है। उन्होंने कहा, "मैं कल्पना करता हूँ कि पोप के एक विशेष अतिथि के रूप में आने के कारण हंगरी के लोगों के बीच आपार खुशी होगी। लेकिन यह भी आवश्यक होगा कि वे और भी अधिक मेहनत करें, ताकि वे कॉग्रेस और पोप की यात्रा की सफलता के लिए अपना समर्थन और अपनी प्रार्थना अर्पित कर सकें।"

बुडढापेस्ट एवं इतिहास

धर्माध्यक्ष ने कहा कि "यह हर देश पर निर्भर करता है, उदाहरण के लिए, पिछली बार बुडढापेस्ट में कॉन्ग्रेस 1938 में द्वितीय विश्व युद्ध के पहले हुआ था और उस समय हंगरी के लोग नाजी शासन और फिर मार्क्सवादी समाजवाद का शोषण झेल रहे थे। मुझे लगता है कि पिछले 30 वर्षों में जो हो रहा है वह वास्तव में बुडापेस्ट में कलीसिया का नवीनीकरण है।"

उन्होंने यह भी गौर किया कि 1938 से 1991 के बीच काथलिकों को ही नहीं सताया गया बल्कि यहूदियों के अस्तित्व को ही समाप्त करने की कोशिश की गई साथ ही साथ अन्य समुदायों को भी अत्याचार सहना पड़ा। "इसलिए, हंगरी में उस विशेष संदर्भ में एक निश्चित अर्थ में, मुझे लगता है कि वे जिन चीजों की आशा करते हैं, उनमें से एक यह है कि एक साथ कष्ट झेलने के बाद, विश्वास के लोग अब एक साथ बढ़ेंगे, और आपसी प्रेम और शांति में विश्वास की विविधता की खुशी मनाना सीखेंगे।"

07 September 2021, 15:17