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बाल श्रम का इति हो बाल श्रम का इति हो 

बच्चों के अधिकारों की रक्षा हो

कैंडी के धर्माध्यक्ष जोसेफ विनय फर्नाडों ने श्रीलंका की सरकार से बाल श्रम और बच्चों के अधिकार की रक्षा हेतु अपील की।

दिलीप संजय  एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रोमवार, 09 अगस्त 2021 (रेई) 16 वार्षीय ईशानी की मृत्यु पर जो श्रीलंका के पूर्व मंत्री रिशद बथिउद्दीन के आवास पर घरेलू कामगार के रूप में कार्यरत थी, कैंडी के धर्माध्यक्ष जोसेफ विनय फर्नाडों ने श्रीलंका की सरकार से बाल श्रम और बच्चों के अधिकार की रक्षा हेतु अपील की है।

विदित हो की 03 जुलाई को ईशानी आग से जलने के कारण कोलम्बो के राष्ट्रीय अस्पताल में दखिल की गई थी जहाँ 15 जुलाई को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्टानुसार उसके साथ कई बार शारीरिक रुप से शोषण किया गया था। पुलिस ने इस मामले में पूर्व मंत्री की पत्नी, उनके ससुर और भाई को मानव तस्करी और बाल श्रम कराने के आरोप में हिरासत में लिया है।

धर्माध्यक्ष ने इस घटना के संबंध में एक निष्पक्ष जाँच की मांग करते हुए दोषीदारों को उचित सजा की मांग की है। सरकार को दिये गये अपने लिखित आवेदन में उन्होंने इस बात की आवश्यकता पर बल दिया है कि बाल श्रम से बचाव हेतु देश में सक्त कानून लागू करने की जरुरत है।

इसके साथ ही धर्माध्यक्ष ने घरेलू कामगार लोगों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा की मांग की खास कर जो चाय बगानों में कार्यरत हैं जिससे उनके बच्चे सम्मानजनक जिन्दगी बीता सकें और उन्हें देश में समान नागरिकता का अधिकार मिल सकें।

 कैंडी में मानवाधिकार कार्यालय के अध्यक्ष फादर नंदना मनातुंगा ने “चाय बागान श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी सहित उचित और स्थिर आय के साथ उचित नौकरी के अवसर” की बात कही। उन्होंने कहा, “हमें नाबालिगों की शिक्षा के लिए एक निरंतर निगरानी तंत्र स्थापित करना चाहिए; प्रारंभिक स्कूल छोड़ने को रोकने के लिए सक्रिय उपाय करें और यदि ऐसा होता है, तो हमेशा बच्चों की भलाई और अधिकारों को ध्यान में रखें।” अंत में, फादर मनतुंगा ने “ईशानी की मृत्यु का राजनीतिक या किसी विशेष समुदाय के लोगों हेतु उपयोग करने से बचने" की आवश्यकता पर बल दिया।

विदित हो की श्रीलंका विश्व का चौथा सबसे बड़ा चाय निर्यातक देश है जिसमें एक मिलियन सिंहाली रोजगार प्राप्त हैं। जबकि कार्यक्षेत्र की स्थिति बहुत ही दयनीय है जहाँ ज्यादातर तमिल श्रमिक हैं, जो उन्नीसवीं शताब्दी में मौसमी श्रमिकों के रूप में अंग्रेजों के बाद श्रीलंका आये। चाय पत्तियों को तोड़ना ज्यादातर महिलाओं के लिए आरक्षित है जो एक कठिन और ऊबाऊ कार्य है। एकत्र किए गए प्रत्येक 15 किलो पत्तियों के लिए लगभग 1 यूरो निर्धारित है, जो प्रति माह 30 यूरो से कम मासिक वेतन के रुप में आता है। श्रमिकों को उनके परिवारों के साथ खेतों की तलहटी में बनाए गए गांवों में रखा जाता है, ताकि उन्हें हमेशा काम में लगाया सके साथ ही उन्हें बाकी समुदाय से अलग किया जा सके।

09 August 2021, 16:22