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मुम्बई की एक छात्रा अफगानिस्तान संकट का चित्र बनाती हुई मुम्बई की एक छात्रा अफगानिस्तान संकट का चित्र बनाती हुई  (AFP or licensors)

अफगानिस्तान में फंसे जेस्विट द्वारा प्रार्थना की मांग

संघर्षग्रस्त अफगानिस्तान में फंसे दो जेसुइट पुरोहितों ने प्रार्थना की मांग की है क्योंकि तालिबान आतंकवादियों ने पहाड़ी भूमि से घिरा देश पर कब्जा कर लिया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, मंगलवार, 17 अगस्त 2021 (मैटर्स इंडिया)- अफगानिस्तान में जेस्विट मिशन के राष्ट्रीय प्रमुख फादर जेरोम सेक्वेइरा ने एक पत्र में लिखा है, "हमारी सुरक्षा हेतु आपकी निरंतर प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद। देश में जिस तरह हालात बदल रहे हैं, जिसकी कल्पना सभी कर सकते हैं...सुरक्षा का यहाँ कोई मतलब नहीं रह गया है। यह एक अराजकता की स्थिति है।"

राष्ट्रपति के भाग जाने और तालिबान के खुद को राष्ट्रपति भवन में स्थापित करने के बाद 16 अगस्त से अफ़ग़ानिस्तान में अनिश्चितता का शासन है।  

हजारों निराश लोग देश से भागने की कोशिश कर रहे हैं और राजधानी कबुल में अराजकता की स्थिति है।

संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अपने सुरक्षाकर्मियों को वापस बुलाये जाने पर, 20 वर्षों के बाद अफगानिस्तान तालिबान के हाथों पड़ गया है।

फादर सेक्वेइरा 10˸45 बजे भारत का विमान लेने, काबुल हवाई अड्डा पहुँचे। उन्होंने एक सुरक्षित स्थान से मैटर्स इंडिया को बतलाया कि वहाँ "एक अराजक रेलवे स्टेशन जैसा दृश्य दिखाई पड़ रहा था।" उन्होंने कहा, "मैं इस देश में 2006 में आया। मैंने पिछले 15 सालों में इस तरह की अव्यवस्था पहले कभी नहीं देखी।"  

अपने भाइयों को लिखे पत्र में उन्होंने बतलाया कि उन्हें लोगों एवं वाहनों से भरी सड़कों पर समान खींचकर जाना पड़ा।  

उन्होंने कहा, "हजारों लोग भागने की कोशिश कर रहे थे। मैं दूसरे गेट तक जाने में सफल रहा किन्तु तालिबान हवा में फायरिंग कर रहा था और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा था। मेरे पहुँचने से पहले ही हजारों लोग हवाई अड्डा में प्रवेश करने में सफल हो गये थे किन्तु हवाई अड्डा के कर्मचारी स्थान छोड़ चुके थे। बिना किसी सुरक्षा जाँच और बोर्डिंग पास के लोग विमान में चढ़ चुके थे।"

उन्होंने सोशल मीडिया में दिखायी गयी तस्वीर जिसमें कुछ लोग विमान के ऊपर बैठे हैं उसके बारे कहा, "इस अराजक स्थिति में कोई भी विमान हवाई अड्डे पर नहीं उतरेगा। इस मूर्खतापूर्ण स्थिति को देखते हुए इस समय कोई भी देश का विमान काबुल आने का साहस नहीं करेगा। यह एक भयावाह अनुभव है।"        

कर्नाटक के फादर रॉबर्ट रोड्रिगेस भी मध्य अफगानिस्तान के बमियान में फंसे हैं। वे भी 15 अगस्त को बमियान हवाई अड्डा गये हुए थे। चेक्ड-इन करने के बाद वे यूएन विमान के लैंड करने का इंतजार कर रहे थे। बमियान से कबुल जाने में सिर्फ 25 मिनट का समय लगता है।   

फादर सेक्वेइरा ने कहा, "स्थिति नाटकीय तरीके से बदल गई है, हवाई अड्डा के सभी सुरक्षाकर्मी एयरपोर्ट छोड़कर जा चुके हैं। हमने फादर रॉबर्ट की सुरक्षा के बारे जानकारी ली और वे आज बेहतर एवं शांत हैं। हम उन्हें यूएन एजेंसी की मदद से बामियान से काबुल लाने की कोशिश कर रहे हैं।"

उनके अनुसार तालिबान सरकारी प्रणाली पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। "वे इस समय नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं, लेकिन वह तब आएगा जब वे देश की सभी प्रणालियों पर पूरी तरह से कब्जा कर लेंगे।" उनके पास सभी संगठनों की सूची है और प्रोफाईल भी।

उन्होंने कहा, "जेसुइट रिफ्यूजी सर्विस ने अफगानिस्तान में अपनी गतिविधियों को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया है "और सभी अपने घरों या समुदायों में बंद हैं।"

"सभी विमान सुविधाएँ रद्द कर दी गई हैं और यह यूएन एवं तालिबान के बीच सहमति पर सब कुछ निर्भर है। जीआरएस के सभी लोग मुझे और रॉबर्ट को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। मैं इस समय सुरक्षित हूँ।"  

जेस्विट फादर ने कहा, "क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने पिछले 20 वर्षों में तालिबान को कुछ ही दिनों में सौंपने के लिए इतना निवेश किया और इतना स्थापित किया? "मेरी कल्पना से परे है विश्वास करना।"

फादर सेक्वेइरा कहते हैं कि काबुल को सौंपने के लिए कोई तैयार नहीं थे। जिस तरह तालिबान ने प्रांतों पर कब्जा किया, सभी लोग सोच रहे थे कि उन्हें काबुल पहुंचने में करीब 90 दिन लगेंगे, किन्तु उन्होंने राजधानी को 10 दिनों में ही कब्जा कर लिया।  

उनके अनुसार, तालिबान आतंकवादियों ने अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से 33 पर कब्जा कर लिया है।

अफगानिस्तान में जेस्विट पुरोहितों का आगमन 2004 में हुआ था कि वे युद्ध के बाद अफगानियों को शिक्षा द्वारा पुनःनिर्माण करने में मदद दे सकें।  

जेआरएस ने युवाओं, विशेष रूप से आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों, पड़ोसी देशों से लौटे लोगों और अन्य कमजोर वर्गों को शिक्षित करने के लिए कार्यक्रम शुरू किए।

उन्होंने 300 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया है और उनके द्वारा चार प्रांतों के करीब 25,000 बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

2001 में तख्तापलट से पहले तालिबान के स्त्री द्वेषी शासन की यादों से भरे देश में युवा लड़कियाँ जेसुइट मिशन की प्रमुख लाभार्थी हैं।

भारतीय जेसुइट भी आजीविका पाने हेतु मदद देने में शामिल

जेसुइट पुरोहितों ने भी तालिबान की परेशानियों का सामना किया है। 2 जून 2014 को संदिग्ध तालिबान लड़ाकों ने फादर एलेक्सिस प्रेम कुमार का अपहरण कर लिया था जो जीआरएस निदेशक के रूप में सेवारत थे और हेरात प्रांत में एक स्कूल का दौरा कर रहे थे। वे फरवरी 2015 को भारत सरकार के हस्ताक्षेप के बाद रिहा कर दिये गये थे।

 

17 August 2021, 16:13