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दलित ख्रीस्तीय एवं मु्स्लिम, अनुसूचित जाति की सूची में रखे जाने की मांग करते हुए। दलित ख्रीस्तीय एवं मु्स्लिम, अनुसूचित जाति की सूची में रखे जाने की मांग करते हुए।  (AFP or licensors)

दलितों के अधिकारों की रक्षा हेतु भारत काला दिवस

10 अगस्त को भारत के ख्रीस्तियों ने दलितों के साथ मिलकर "काला दिवस" मनाया। जिन्हें अन्य धर्मों के अनुसूचित जातियों (एससी) के बराबर विशेषाधिकार और लाभ से वंचित किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, मंगलवार, 12 अगस्त 2021 (वीएनएस)- भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के दलित विभाग के सचिव फादर विजय कुमार नायक ने ऊका न्यूज से कहा, "हमारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक कि हमें न्याय नहीं मिल जाता। हमें बड़ी उम्मीद है कि इस साल हमारे मामले की सुनवाई भारत के सुप्रीम कोर्ट में होगी।"

वे भारत में कलीसियाओं की राष्ट्रीय परिषद द्वारा दायर एक याचिका का जिक्र कर रहे थे जिसमें दलित ख्रीस्तियों के लिए शिक्षा, नौकरियों और कल्याणकारी लाभों में विशेषाधिकार प्राप्त करने और अत्याचारों के खिलाफ एक विशेष कानून के तहत सुरक्षा के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा मांगा गया है।   

दलील में तर्क दिया गया कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से अलग धर्म को मानने वाले एससी व्यक्ति को लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है क्योंकि धर्म में बदलाव से जाति नहीं बदलती है।

एनसीसीआई, भारत में प्रोटेस्टेंट और ऑर्थोडॉक्स कलीसियाओं के लिए एक विश्वव्यापी मंच है। एनसीसीआई के महासचिव असिर एबेनेज़र ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इसकी याचिका 2013 में दायर की गई थी और भारत की शीर्ष अदालत, जनवरी 2020 में इसकी जांच करने के लिए सहमत हुई थी। हालांकि, कोविद -19 महामारी के कारण सुनवाई में देरी हुई।

फादर नायक ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले सात दशकों से दलित ईसाइयों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है।

हमें जनता को संगठित करना होगा और मामले को देखने के लिए संवैधानिक निकायों पर दबाव बनाना होगा। उन्होंने कहा, "देश की सभी कलीसियाएँ दलित ईसाइयों को उनका हक देने के पक्ष में हैं। हमें जनता को संगठित करना होगा और मामले को देखने के लिए संवैधानिक निकायों पर दबाव बनाना होगा।

फादर नायक ने कहा कि वे राष्ट्रीय राजधानी में एक रैली आयोजित करना चाहते थे, लेकिन इसे महामारी प्रतिबंधों के कारण रोका गया। फिर भी, मांग बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूरे भारत में कई लोग एकत्र हुए।

10 अगस्त को पूरे भारत के दलित ख्रीस्तीयों द्वारा काला दिवस मनाया जाता है क्योंकि 1950 में उसी दिन राष्ट्रपति का एक फरमान जारी किया गया था जिसमें ईसाई और मुस्लिम दलितों को इस आधार पर अनुसूचित जाति का दर्जा देने से इनकार किया गया था कि उनके धर्म, जाति व्यवस्था को मान्यता नहीं देते हैं।

हालांकि, सरकार द्वारा नियुक्त आयोगों ने भी कहा है कि यह फैसला संविधान की भावना के खिलाफ थी।

12 August 2021, 15:10