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जेसुइट आदिवासी कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी जेसुइट आदिवासी कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी   (AFP or licensors)

फादर स्टैन स्वामी के लिए "शीघ्र संत" घोषणा का आह्वान

मुंबई में एक मुक्तिदाता धर्मसमाजी पुरोहित ने जेसुइट आदिवासी कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी को तत्काल संत की उपाधि का आह्वान किया है।

उषा मनोरमा-तिरकी-वाटिकन सिटी

फादर इवेल मेनडन्हा ने 11 जुलाई को एक ऑनलाइन रविवार मिस्सा में कहा, "फादर स्टैन स्वामी 'सुबिटो सैंटो' (शीघ्र संत) घोषित हों, हमारा आह्वान है।"

मुक्तिदाता धर्मसमाज के मजेल्ला प्रोविंस के सहायक प्रोविंशल, जो वर्तमान में मुंबई के चेंबूर में 'अवर लेडी ऑफ परपेचुअल सुक्कोर' में हैं, उन्होंने कहा कि 5 जुलाई को फादर स्वामी की मृत्यु ने "कई सवाल उठाए हैं, जवाब ढूंढना मुश्किल है, इसने दर्द, पीड़ा और दुःख का झटका दिया है।"

फादर स्वामी का मुंबई के हॉली फैमिली अस्पताल में एक विचाराधीन कैदी के रूप में निधन हो गया। भारत के आतंकवाद विरोधी संगठन, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें 8 अक्टूबर, 2020 को मुंबई से लगभग 1,700 किलोमीटर उत्तर पूर्व में झारखंड राज्य की राजधानी रांची के पास उनके आवास से गिरफ्तार किया था। मुंबई की एक अदालत ने कई बीमारियों से ग्रसित जेसुइट फादर को शहर के पास एक भीड़भाड़ वाले तलोजा जेल में भेज दिया था और उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के तहत काथलिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

फादर मेनडान्हा ने कहा, "जैसे ही मुझे फादर स्टैन की मृत्यु की खबर मिली, मेरी तत्काल प्रतिक्रिया थी 'भारत को हमारे विश्वास के लिए एक शहीद मिला है।" उनके अनुसार, भारत में अब "एक ऐसे शहीद हैं जिन्होंने सुसमाचार को जीने और सुसमाचार के लिए मरने का विकल्प चुना।"

उन्होंने जमशेदपुर जेसुइट प्रोविंस से उसके सदस्यों में से एक, फादर स्वामी के लिए धन्य घोषणा की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का आग्रह किया।

फादर याद करते हैं कि पोप जॉन पॉल द्वितीय की मृत्यु के समय "सुबिटो सैंटो" का आह्वान किया गया था।" उन्होंने जोर दिया कि फादर स्वामी, येसु के मिशन - गरीबों और दलितों की मुक्ति के लिए जीये और मर गये।

फादर मेनडन्हा के अनुसार, 84 वर्षीय जेसुइट ने अपने जीवन के दशकों को झारखंड राज्य के आदिवासियों के बीच काम करने में बिताया ताकि उन्हें यह महसूस हो सके कि वे ईश्वर की संतान हैं। फादर स्वामी चाहते थे कि आदिवासियों को "देश में हर दूसरे नागरिक की तरह अधिकार" मिले और "निहित स्वार्थों" से उनकी रक्षा हो जिन्हें  लोग जमीन हड़प कर विस्थापित करना चाहते हैं।

मुक्तिदाता धर्मसमाजी पुरोहित ने जोर देकर कहा है कि जेसुइट फादर ने येसु का अनुसरण किया। फादर स्वामी "संस्थागत हत्या के शिकार हैं और उन्हें एक संत, न्याय के लिए एक पैगंबर, एक अच्छा चरवाहा, एक मसीहा कहा जाना चाहिए।"

फादर ने बताया कि फादर स्वामी की "जमानत की सुनवाई से पहले हिरासत में मौत ने मानवाधिकार रक्षकों को झकझोर कर रख दिया है," और सत्ताधारी प्रतिष्ठान को छोड़कर, हर राजनीतिक दल को इसकी निंदा करने के लिए प्रेरित किया है।

उनके अनुसार, विभिन्न मानवीय समूहों और भारत में सभी ईसाई समुदायों के नेताओं ने हमारी कानूनी और न्यायिक प्रणाली एवं जांच एजेंसियों की "दयनीय" गिरावट की निंदा करते हुए दुःख, सदमा और क्रोध व्यक्त किया है।

चिकित्सकीय जमानत के लिए फादर स्वामी के आवेदन को अभियोजन पक्ष द्वारा नियमित रूप से खारिज कर दिया गया, यहां तक कि उनकी बीमारी की साख पर भी सवाल उठाया गया। फादर मेनडन्हा ने शोक व्यक्त किया कि उन्हें वृद्धावस्था और गंभीर पीड़ा सहना पड़ा।

15 July 2021, 16:13