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संत थोमस और प्रभु येसु संत थोमस और प्रभु येसु 

प्रेरित संत थोमस थोमस के पर्व पर "भारतीय ख्रीस्तीय दिवस"

प्रेरित संत थोमस 52 ईस्वी के आसपास भारत आए और 72 ईस्वी में दक्षिण भारत के तमिलनाडु में चेन्नई के पास शहीद हो गए थे। उनकी शहादत 3 जुलाई को याद की जाती है। इस वर्ष, पहली बार, भारत के सभी कलीसियाओं के ख्रीस्तीय प्रेरित संत थोमस थॉमस के पर्व पर "भारतीय ख्रीस्तीय दिवस" मना रहे हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शनिवार 3 जुलाई 2021 (फीदेस) - पहली बार भारतीय ख्रीस्तीय 3 जुलाई को उपमहाद्वीप के प्रचारक, येसु के बारह प्रेरितों में से एक, प्रेरित संत थोमस के पर्व के दिन "भारतीय ख्रीस्तीय दिवस" ​​मना रहे हैं। प्रेरित संत थोमस 52 ईस्वी के आसपास भारत आए और 72 ईस्वी में दक्षिण भारत के तमिलनाडु में चेन्नई के पास शहीद हो गए थे। उनकी शहादत 3 जुलाई को याद की जाती है। इस वर्ष, पहली बार भारत के सभी कलीसियाओं के ख्रीस्तीय (दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले भी) "भारतीय ख्रीस्तीय दिवस"​​(येसु भक्ति दिवस) मनाने के लिए एकत्रित हुए।

विभिन्न कलीसियाओं के प्रतिनिधियों द्वारा तैयार की गई घोषणा बताती है: "3 जुलाई, 2021 को भारतीय ख्रीस्तीय दिवस के रूप में घोषित करना, भारतीय मूल के प्रभु येसु मसीह के अनुयायियों के लिए, येसु मसीह के संदेश का जश्न मनाने का क्षण है। 52 ई. में संत थोमस भारत आये। आज से, हर साल, हम प्रभु येसु के अनुयायी, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत के भीतर हमारी पहचान को भी बनाए रखते हैं, भाषा, रीति-रिवाजों, पंथ की परवाह किए बिना उन सभी के साथ एकजुट होंगे, जो भली इच्छा वाले पुरुष और महिलाएं समारोह मनाने की इच्छा रखते हैं।

भारतीय ख्रीस्तीय दिवस कई मायने में महत्वपूर्ण है: सबसे पहले यह अलग-अलग विश्वासी समुदाय द्वारा प्रचारित एक पहल है, यह गैर-राजनीतिक है, यह भारत के विभिन्न कलीसियाओं के ख्रीस्तीयों को अपने देश में मसीह की सेवा और प्रेम करने के लिए एक साथ लाता है। इस पहल का उद्देश्य भारत में ख्रीस्तीय धर्म के प्रभाव और योगदान को रेखांकित करना, पहचानना और समारोह मनाना है। यह दिन स्थानीय स्तर पर (कलीसियाओं, संगठनों, परिवारों), राष्ट्रीय स्तर पर और एक वैश्विक कार्यक्रम की एक श्रृंखला देखेंगे।

वेबसाइट www.indianchristianday.com महत्वपूर्ण जानकारी और भारतीय ख्रीस्तीय दिवस में भाग लेने की संभावना प्रदान करती है।

आयोजक बताते हैं कि भारतीय ख्रस्तीयों ने देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है: वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम का अभिन्न अंग रहे हैं और संविधान सभा के सदस्य भी रहे हैं। वे केंद्र और राज्य सरकारों, राज्य के राज्यपालों, न्यायपालिका के सदस्य और देश के अन्य संवैधानिक निकायों में मंत्री रहे हैं।

भारतीय जेसुइट फादर सेड्रिक प्रकाश ने फीदेस को बताया, "3 जुलाई 2021 को, भारतीय ख्रीस्तीय एकता में अपने विश्वास का समारोह मनाने के लिए एक बहुत ही खास तरीके से बुलाये जाते हैं, जिसका अर्थ है: ईश्वर से प्यार करना और दूसरों की सेवा करना, समाज की भलाई करना, न्याय, शांति और सच्चाई का गवाह बनना, जैसा कि येसु ने किया।”

2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार, 1.3 अरब की आबादी में से, हिंदू धर्म की जनसंख्या 966 मिलियन (80%) है। मुसलमान 172 मिलियन (14%) हैं, जबकि ख्रीस्तीय कुल 29 मिलियन (2.3%) हैं।

03 July 2021, 15:27