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मुम्बई के युवा वैक्सीन केंद्र में पंजीकृत कराते हुए मुम्बई के युवा वैक्सीन केंद्र में पंजीकृत कराते हुए  (AFP or licensors)

कोरोना से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे भारतीय काथलिक युवा

पूरे देश में, भारतीय काथलिक युवा आंदोलन ने मदद के लिए शुरु किया है, खाने के पार्सल देने से लेकर परिवारों को अपने प्रियजनों को दफनाने या उनका अंतिम संस्कार करने में मदद करना। कुछ अपने अनुभव के बारे में बोलते हैं और लोगों की कृतज्ञता का वर्णन करना कठिन है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

मुंबई, शनिवार 5 जून 2021 (एशिया न्यूज) : एक ऐसे देश में, जो महामारी के कारण जल्दी ही अपने घुटनों पर आ गया है, भारतीय काथलिक युवा कोरोनावायरस से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं, गरीबों को खाने के पार्सल सौंपने से लेकर मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार करने तक, अस्पताल के बाहर रक्तदान करने के लिए इंतजार कर रहे लोगों की सहायता कर रहे हैं।

भारतीय काथलिक युवा आंदोलन

काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीसीबीआई) के युवा आयोग के कार्यकारी सचिव फादर चेतन मचाडो ने एशिया न्यूज से बात करते हुए कहा, "इस अनकही त्रासदी के बीच, धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की युवा शाखा, भारतीय काथलिक युवा आंदोलन (आईसीवाईएम) देश के कई हिस्सों में राहत कार्यों में सबसे आगे रहा है।"

उन्होंने कहा, "युवाओं ने खुद को वायरस से संक्रमित होने के जोखिम में डाल दिया और जरूरतमंदों, गरीबों और प्रवासियों की मदद के लिए राहत के प्रयास कर रहे हैं। आईसीवाईएम इकाइयों ने लोगों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ऑनलाइन डिजिटल सामग्री जैसे वीडियो और पोस्टर के माध्यम से जागरूकता अभियान बनाने के अलावा, लोगों को उनके राहत प्रयासों, शारीरिक सहायता, नैतिक समर्थन, आर्थिक सहायता और परामर्श के साथ मदद की है।"

युवा लोगों की भागीदारी ने कई लोगों के जीवन को बढ़ावा दिया है, "अस्पतालों में लोगों की मदद और सम्मान जनक तरीके से दफनाने और दाह संस्कार करने में" बड़ी उदारता दिखाई है। आईसीवाईएम ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं में आगे बढ़कर नेतृत्व किया है, चाहे 2018 में केरल और कर्नाटक में बाढ़, नेपाल में भूकंप, या नवीनतम चक्रवात हो।

देश भर में 2.5 मिलियन से अधिक सदस्यों के साथ, आईसीवाईएम सबसे कठिन समय में भी लोगों के करीब रहा है। और अब यह कोविद-19 से प्रभावित लोगों के साथ ऐसा करना जारी रखता है।

आईसीवाईएम युवाओं की जबानी

बैंगलोर में आईसीवाईएम समूह के युवा राजेश ने कोविद-19 पीड़ितों का अंतिम संस्कार करने और उन्हें दफनाने में मदद की है।

उन्होंने कहा, "मेरे माता-पिता नहीं चाहते थे कि मैं जाऊं, लेकिन यह एक नेक काम है। परिवारों को उनके प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने और उन्हें दफनाने में मदद करने के बाद, मुझे काथलिक युवा कहलाने पर गर्व है।”

रॉबिन डिसूजा दिल्ली का एक युवक है, उसने एशिया न्यूज को बताया कि उसके लिए, "कोविड राहत के लिए काम करना उन लोगों तक पहुंचने का एक अवसर है, जो इस महामारी के कारण या तो अकेले हो गए हैं, या अकेले छोड़ दिए गए हैं।"

रॉबिन ने कहा, “हम प्रभावितों को वित्तीय और चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहे हैं। हम मुख्य रूप से बुनियादी राशन किट और दवाएँ मुहैया करा रहे हैं। मैं हर रोज मदद की गुहार करने वाले फोन कॉल को सत्यापित करने का प्रभारी हूँ और जब मैं इन लोगों से बात करता हूँ तो मैं उनकी आवाजों में दर्द सुन सकता हूँ। हम सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी संकट कॉल अनुत्तरित न हो और वह सहायता एक या दो दिन में उन तक पहुंच जाए।”

मैंगलोर में आईसीवाईएम धर्मप्रांतीय अध्यक्ष लियोन सल्दान्हा ने बताया कि "अनुभव हर दिन अलग होता है। हम सड़कों पर लोगों को भोजन के लिए हमारे पास दौड़ते हुए देखते हैं और जिस तरह से वे हमें धन्यवाद देते हैं वह कुछ ऐसा है जिसे व्यक्त नहीं किया जा सकता है। कुछ शरीर में इतने कमजोर होते हैं कि जब हम उनसे पूछते हैं कि क्या उन्हें भोजन की आवश्यकता है, तो उनके चेहरे खिल उठते हैं। हमें यकीन है कि उनका आशीर्वाद और प्रार्थना हमारे जीवन में हमारी मदद करेगा।”

"मध्यम वर्ग के लोगों के मामले में जिनके पास रहने के लिए एक अच्छा घर है लेकिन आर्थिक रूप से गरीब हैं क्योंकि वे काम से निकाल दिये गये हैं या काम बंद है, वे भोजन मांगने में शर्म महसूस करते हैं लेकिन उनके पड़ोसी और अन्य लोग जो जानते हैं हमें फोन करते हैं।"

“हम उन तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि ईश्वर हमारे माध्यम से काम कर रहे हैं क्योंकि पहले दिन से गी हमारे पास धन की कमी नहीं है। हमें दैनिक आधार पर धन मिलता है, जिससे हमें 33 दिनों में बहुत आगे जाने में मदद मिली है। हम सभी के समर्थन और मार्गदर्शन के लिए आभारी हैं।"

कर्नाटक के जेसन ने एशिया न्यूज को बताया,“हमने देखा कि कई दैनिक वेतन भोगी और अंतर-राज्य प्रवासी तालाबंदी के कारण एक दिन का भोजन पाने के लिए संघर्ष करते हैं। इसलिए हमने खाने के पार्सल सौंपने का फैसला किया।”

उसने कहा, “हमने अंतिम संस्कार सेवा के लिए एक टीम भी शुरू की है, ‘कोविद मौतों के लिए कोरोना वारियर्स’। हमने न केवल काथलिकों की बल्कि गैर-काथलिकों की भी उनके संस्कारों के अनुसार सेवा की है। ये सभी के लिए परीक्षा का समय है, इसलिए लोगों की मदद के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए।"

05 June 2021, 13:37