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म्यांमार का गिरजाघर म्यांमार का गिरजाघर 

म्यांमार की सेना द्वारा एक और गिरजाघर पर गोलाबारी

6 जून को मरिया शांति की महारानी गिरजाघर पर हुए हमले में किसी के हताहत होने या घायल होने की सूचना नहीं है, परंतु गिरजाघर क्षतिग्रस्त हो गई है और इसकी खिड़कियां टूट गई हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

यांगून, बुधवार 9 जून 2021 (वाटिकन न्यूज) : म्यांमार में सेना द्वारा एक और काथलिक गिरजाघर पर गोलाबारी की गई है। विडंबना यह है कि गिरजाघर काया राज्य में दाऊ नगन खा में मरिया शांति की महारानी को समर्पित है। रविवार को यह आग की चपेट में आ गया, लेकिन कोई हताहत या घायल नहीं हुआ, क्योंकि अंदर शरण लिए हुए पल्लीवासियों ने हमले को भांप लिया और अपने रिश्तेदारों के पास या जंगल में भाग गए। हालांकि, गिरजाघऱ की दीवारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और खिड़कियां टूट गईं। यह हमला जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है क्योंकि गिरजाघऱ का परिसर काफी बड़ा है और एक व्यस्त सड़क से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। गोलाबारी से आसपास के कई घर भी क्षतिग्रस्त हो गए।

काया के तीसरे गिरजाघर में हमला

काया में दो सप्ताह में सैन्य हमले में मरिया शांति की महारानी गिरजाघर कथित तौर पर तीसरा गिरजाघर है। लोइकाव के पास कायनथायार गांव में 23 मई की रात को पवित्र हृदय गिरजाघर पर तोपखाने से गोलाबारी की गई, जिसमें चार काथलिक मारे गए थे और कम से कम आठ अन्य घायल हो गए थे। लड़ाई के प्रमुख क्षेत्रों में से एक, डेमोसो शहर में 26 मई की रात को संत जोसेफ गिरजाघऱ में सैन्य तोपखाने से गोलाबारी की गई। हालांकि, 6 जून को काया में लोइकाव के पास पेखोन में जेरोब्लो मरियम गिरजाघऱ पर एक अन्य सैन्य हमले की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी।

वाटिकन की फीडेस समाचार एजेंसी के अनुसार, काया की 75 प्रतिशत आबादी जातीय अल्पसंख्यक समूहों से संबंधित है और यह ख्रीस्तियों के उच्चतम प्रतिशत वाला राज्य है। 90,000 से अधिक काथलिक हैं, जो राज्य के 355,000 निवासियों में से लगभग एक तिहाई हैं। काथलिक कलीसिया की सामाजिक शाखा, कारितास, अंधाधुंध हिंसा से विस्थापित हुए लगभग 300,000 लोगों की मदद करने के लिए विभिन्न भागीदारों और दानदाताओं के साथ काम कर रही है।

नागरिकों का विस्थापन

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त के कार्यालय के अनुसार, तख्तापलट के बाद से काचिन, करेन, चिन, काया और शान राज्यों में 175, 000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इन संघर्षों में फंसे कई नागरिकों ने पड़ोसी देशों में शरण ली है, जबकि बड़ी संख्या में विस्थापित हुए हैं, उनमें से कई कलीसियाई संस्थानों, बौद्ध मठों और मंदिरों में आश्रय की तलाश कर रहे हैं। लेकिन यहां तक कि गिरजाघर, जिन्हें नागरिकों के लिए सुरक्षित माना गया है, को भी सेना ने नहीं बख्शा है।

मरिया शांति की महारानी गिरजाघर पर रविवार का हमला म्यांमार के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष यांगून के कार्डिनल चार्ल्स बो की अपील के बावजूद हुआ, जिन्होंने संघर्ष में सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और सम्मेलनों को ध्यान में रखते हुए पूजा स्थलों को साफ रखने का आग्रह किया। .

रविवार को, संत पापा फ्राँसिस ने विभिन्न धर्मों के विश्वासियों से आग्रह किया कि वे पवित्र भूमि और म्यांमार की शांति के लिए प्रार्थना करने हेतु मंगलवार दोपहर 1:00 बजे एक मिनट का समय अलग रखें। इंटरनेशनल फोरम ऑफ काथलिक एक्शन (आईएफसीए) की शांति पहल को स्थानीय काथलिक एक्शन संगठनों, काथलिक महिला संगठनों के विश्व संघ और अन्य संस्थाओं का समर्थन मिला।

09 June 2021, 15:23