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पवित्र क्रूस पवित्र क्रूस  (Vatican Media)

बच्चों के द्वारा लिखा गया क्रूस-रास्ता चिंतन ˸ येसु हमारे भय को शांत करते हैं

संत पापा फ्रांसिस ने इस साल के पुण्य शुक्रवार के लिए क्रूस-रास्ता चिंतन को तैयार करने की जिम्मेदारी अजेशी स्काऊट ग्रूप "फोलिनो आई" (उम्ब्रिया) और रोम स्थित यूगांडा के शहीद संत पल्ली को दी है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पुण्य शुक्रवार को क्रूस-रास्ता का संचालन संत पापा फ्राँसिस करेंगे, जिसका चिंतन रोम के यूगांडा के शहीद पल्ली के बच्चे और युवा, अजेशी स्काऊट दल के "फोलिन्यो आई" और रोम के दो अतिथि परिवार के सदस्य प्रस्तुत करेंगे। क्रूस रास्ता संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में सम्पन्न किया जाएगा।

बच्चों और युवाओं द्वारा तैयार चिंतन सरल एवं ठोस है जो हृदय को गहराई से स्पर्श करता है। यह बेहतर और अधिक न्यायपूर्ण समाज के लिए सोचने एवं कार्य करने हेतु प्रेरित करता है। यह अपने आपसे सवाल पूछने एवं अपने हृदय में और दुनिया में परिवर्तन लाने के लिए अग्रसर करता है।

दुनिया में बच्चों के कई क्रूस

बच्चों की पीड़ा को बहुधा अनदेखा किया जाता है। क्रूस-रास्ता पुस्तिका की प्रस्तावना में बच्चों की प्रार्थनाओं पर जोर दिया गया है, "प्यारे येसु, आप जानते हैं कि हम बच्चों के लिए भी क्रूस हैं। वे क्रूस युवाओं और प्रौढ़ लोगों के क्रूस से कम भारी नहीं हैं बल्कि वास्तविक क्रूस हैं, क्रूस जो हमें रात में भी अपने भार से दबाते हैं। केवल आप जानते है कि वे क्या हैं और आप उन्हें गंभीरता से लेते हैं। सिर्फ आप। अंधकार के भय का क्रूस, एकाकी एवं परित्यक्त होने का क्रूस, महामारी का क्रूस, अपनी कमजोरियों को महसूस करने, दूसरों के द्वारा उपहास किये जाने, दूसरे साथियों से अधिक गरीब होने के एहसास और परिवार में झगड़े का दुःख। कुछ लोग पीड़ित इसलिए हैं क्योंकि उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है, वे स्कूल नहीं जा सकते, कई बच्चों को बाल सैनिक बनाये जाने एवं प्रयोग किये जाने के लिए मजबूर किया जाता है।" येसु आप हमेशा हमारे नजदीक हैं और हमें कभी नहीं छोड़ते हैं। हमें अपने दैनिक क्रूस को ढोने में मदद दीजिए, जिस तरह आप अपना क्रूस उठाते हैं।

निर्दोष लोगों पर दोषारोपण और साहस की कमी

पहला स्थान ˸ पोन्तुस पिलातुस येसु को प्राँणदण्ड की सजा देते हैं। इस चिंतन में एक वर्ग का दृश्य प्रस्तुत किया गया है ˸ मार्क नाम के एक बच्चे पर अपने क्लास के एक बच्चे की टिफिन चोरी करने का इल्जाम लगा है। उनमें से एक बच्चा जानता है कि वह निर्दोष है किन्तु वह उसे बचाने के लिए कुछ नहीं कहता। वह सच्चाई बताने के साहस की कमी के कारण पिलातुस के समान व्यवहार करता है और अपने लिए सहज रास्ता चुनने के कारण बाद में पछतावा करता है। "कभी कभी हम बुराई की आवाज को सुनते हैं जो बुरा सोचता और बुरा काम करता है जबकि सही काम करना चढ़ान वाली सड़क के समान होता है जिसपर आगे बढ़ना कठिन लगता है। किन्तु हमारे साथ येसु हैं जो हमेशा हमारा साथ देने एवं हमारी मदद करने के लिए तैयार हैं।"  

व्यवहार द्वारा दूसरों को चोट पहुंचाया जा सकता है

दूसरा स्थान ˸ येसु अपना क्रूस उठाते हैं। संत लूकस रचित सुसमाचार से लिया गया पाठ बतलाता है कि येसु का उपहास किया गया एवं उन्हें पीटा गया तथा उन्हें हिरासत में रखा गया। बच्चों के बीच आपस में एक-दूसरे का उपहास करना असाधारण बात नहीं है, यहाँ तक कि धमकियाँ भी दी जाती हैं जैसा कि मर्टिना के साथ किया जाता है जो क्लास में जोर से नहीं पढ़ सकती है। शायद उसका मजाक उड़ाना उनका मकसद नहीं था किन्तु उसपर हंसने से उसे कितना अधिक चोट पहुँचा होगा। प्रताड़ना सिर्फ दो हजार वर्षों पहले नहीं दी गईं। हमारे व्यवहार द्वारा हम दूसरों का न्याय करते, दुर्व्यवहार करते एवं असफल भाई बहनों को चोट पहुँचाते हैं।  

गिरने का अनुभव

तीसरा स्थान ˸ येसु पहली बार गिरते हैं। येसु हमारे पाप के बोझ से दबे हैं। वे पीटे और अपमानित किये गये हैं। इस तरह का अनुभव बच्चे क्लास में तब करते हैं जब वे पढ़ने में अच्छे रहते हैं किन्तु फेल हो जाते हैं। "असफलता का यह एहसास मेरे लिए बहुत अधिक था। मैंने अचानक अकेलापन महसूस किया, मुझे सांत्वना देने के लिए कोई नहीं था। किन्तु परिस्थिति ने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया...आज मैं महसूस करता हूँ कि हम प्रतिदिन लड़खड़ाते एवं गिरते हैं, परन्तु येसु हमेशा हमारी बगल में रहते हैं जो हमारा हाथ पकड़कर हमें उठाते हैं।"  

एक माँ का स्नेह

चौथा स्थान ˸ येसु अपनी माँ से भेंट करते हैं। पाठ काना के विवाह का है। इसमें बेटे और माता के बीच संबंध पर प्रकाश डाला गया है। इस दृश्य में एक बच्चे का अपनी माँ के प्रति सोच का चित्रण किया गया है। माँ हमेशा स्नेह से अपने बच्चों को साथ देती है। वह उन्हें फूटबॉल अभ्यास कराने, भाषा सीखने और रविवार को धर्मशिक्षा के क्लास में भी साथ देती है। चिंतन में बच्चों के लिए मां के स्नेह की आवश्यकता एवं अच्छे माता-पिता बनने में मदद देने पर प्रकाश डाला गया है।" यदि मुझे कुछ समस्या है, कोई सवाल अथवा कोई अप्रिये सोच है तो माँ हमेशा मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ सुनने के लिए तैयार रहती है।

दूसरों के चेहरे में येसु को देखना

पाँचवाँ स्थान : सिरीनी सिमोन येसु को क्रूस ढोने में मदद करता है। दूसरों को मदद करने के कई अवसर हैं। यहाँ एक विदेशी साथी के प्रति दिखायी गई सहानुभूति का साक्ष्य दिया गया है जो कुछ ही दिनों पहले आया है। वह बच्चों को फूटबॉल खेलते देखता है किन्तु अपने आपको उनके साथ शामिल करने में कठिनाई महसूस करता है। दल का एक बच्चा उसे देख लेता है और उससे मिलने जाता। वह उसे दल में शामिल होने का निमंत्रण देता है। तब से वालिद उनका सबसे अच्छा मित्र एवं टीम का गोलकीपर बन गया है। जब हम व्यक्ति को भाई के रूप में देख पाते हैं तभी हम येसु के लिए अपना हृदय खोलते हैं।   

अकेलापन महसूस नहीं करने के लिए छोटी सहायता

छटवाँ स्थान : एक महिला येसु का चेहरा पोंछती है। मैं सच कहता हूँ, यदि तुमने इन सबसे छोटे भाई-बहनों के लिए कुछ किया, तुमने मेरे लिए किया। ये शब्द संत मती रचित सुसमाचार से लिया गया है। बच्चे भी अपने दैनिक जीवन में कठिनाई और उदासी की घड़ी से होकर गुजरते हैं और उन्हें किसी की सांत्वना की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, फूटबॉल मैच हारने के कारण निराश स्थिति में एक मित्र कॉल्ड ड्रिंक्स के साथ उसका इंतजार करता है। उसके साथ रहकर वह मैच हारने के गम को भूल जाता है।

सबसे जरूरतमंद लोगों की मदद

सातवाँ स्थान : येसु दूसरी बार गिरते हैं। चिंतन, चौथे क्लास में पढ़नेवाले छात्र का है। साल के अंत में एक नाटक की तैयारी की जा रही थी जिसमें वह हर हाल में मुख्य पात्र की भूमिका निभाना चाहता था। जबकि शिक्षक ने योहन को चुना जो प्रायः अकेला रहता था। इससे शुरू में थोड़ी निराशा हुई लेकिन बाद में समझ गया एवं खुश हो गया। उस समय से योहन क्लास में अधिक भाग लेने लगा। उसने कहा, "मेरी निराशा ने दूसरे व्यक्ति को बचने में मदद किया। शिक्षक के चुनाव ने एक ऐसे छात्र को अवसर दिया जिसको सचमुच इसकी आवश्यकता थी।  

गलती करनेवालों की मदद

आठवाँ स्थान : येसु येरूसालेम की स्त्रियों से मुलाकात करते हैं। संत लूकस के सुसमाचार में हम पढ़ते हैं कि जब येसु ने उन्हें देखा तो कहा, "येरूसालेम की पुत्रियो, मेरे लिए मत रोओ बल्कि अपने और अपने बालकों के लिए रोओ।" यह प्रथम बिन्दु हैं यह कहने के लिए कि किसी भाई या बहन को सुधारना कठिन है किन्तु आवश्यक भी है। इसका अनुभव दो भाइयों ने किया जिन्होंने अपनी माँ से झूठ बोला था कि उन्होंने अपना घर काम पूरा कर लिया है जबकि पूरा समय खेलने में बिताया था। दूसरे दिन दोनों में से एक ने कहा कि वह अच्छा महसूस नहीं कर रहा है और स्कूल नहीं गया। दूसरा स्कूल गया और घर लौटकर अपने भाई से बात किया। उसने कहा, "हमारी माँ से झूठ बोलना एवं पेट दर्द का बहाना बनाना गलत है। हमें अपना घर काम पूरा करना चाहिए और उसने अपने भाई को छूटे क्लास को समझने में भी मदद दी। इस प्रकार घर काम पूरा करने के बाद ही वे बाकी समय में खेलने गये।

महामारी के कारण अकेलापन

नौवाँ स्थान : येसु तीसरी बार गिरते हैं। सुसमाचार पाठ में गेहूँ के दाने को लिया गया है जो बहुत फल लाता है। कोविड-19 महामारी अपने हर प्रभावों के साथ शुरू हुआ और युवाओं को भी अछूता नहीं छोड़ा। इस समय का एक खास अनुभव रहा अकेलापन। बच्चे अपने दादा-दादी से मुलाकात नहीं कर सकते थे, स्कूल बंद थे, वे अपने क्लास के साथियों और मित्रों से भी नहीं मिल सकते थे। अकेलापन की यह दयनीय स्थिति कभी कभी असहनीय प्रतीत हुई। मानो कि सभी के द्वारा त्याग दिये गये हों, मुस्कुरा भी नहीं सकते थे। येसु के समान अपने आप को जमीन पर पड़ा हो महसूस कर रहे थे।

देने से मिलनेवाला आनन्द

दसवाँ स्थान : येसु के शरीर से कपड़ों को उतारा जाता है। यहाँ एक छोटी लड़की कहानी बतलाती है। उसके पास बहुत सारे खिलौने थे। एक दिन उसने सुना कि पल्ली में शरणार्थी बच्चों के लिए खिलौने जमा किये जा रहे हैं तब उसने अपने पास के उन खिलौनों को चुना जो पुराने हो चुके थे अथवा जिनको वह अधिक पसंद नहीं करती थी। उनको अलग कर एक डिब्बे में बंद किया। वह कहती है कि उस शाम को उसने महसूस किया कि पर्याप्त नहीं किया है। उसके बाद सोने से पहले उसने डिब्बे को खिलौनों से भर दिया और अलमारी को खाली कर दिया। जरूरत से ज्यादा को दान कर देना आत्मा को हल्का करता एवं हमें खुशी प्रदान करता है।

गरीबों के लिए समर्पित एक क्रिसमस

ग्यारहवाँ स्थान : येसु को कीलों से जकड़ दिया जाता है। चिंतन में बतलाते हुए कहा गया है, "एक क्रिसमस के दिन हम स्काऊट के साथ रोम गये ताकि मिशनरीस ऑफ चैरिटी की धर्मबहनों से मुलाकात कर सकें और अपने परिवार में पर्व मनाने के बदले, गरीब लोगों के लिए भोजन परोसने में उनकी मदद कर सकें। यह कोई छोटा त्याग नहीं था। वापस लौटते समय दल के एक लड़के ने खाना परोसे जानेवाले लोगों के बारे बतलाया, उनकी मुस्कान और उनकी कहानियों को...उन लोगों को थोड़ी खुशी प्रदान कर उसके लिए यह क्रिसमस अविस्मरणीय हो गया। प्रेम से दूसरों की सेवा करना एक शिक्षा है जिसको येसु ने क्रूस पर से दी है।

येसु पछतापी पापी को क्षमा प्रदान करते हैं

बारहवाँ स्थान : येसु क्रूस पर मर जाते हैं। येसु का उदाहरण, बुराई के लिए क्षमा कर देना, बच्चों को दुनिया में वर्तमान में हो रही बुराइयों पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है। उदाहरण के लिए माफिया जो बच्चों को भी मार डालते हैं। ऐसी चीजों के लिए किस तरह माफ किया जा सकता है? क्रूस पर मरते हुए येसु ने सभी के लिए मुक्ति प्रदान की है। वे धर्मियों को नहीं बल्कि उन पापियों को बचाने आये जो विनम्र बनकर, मन-परिवर्तन करने का साहस करते हैं।

वे दादाजी को ले गये और मैं उन्हें कभी नहीं देख पाया

तेरहवाँ स्थान : येसु को क्रूस पर से उतारा जाता है। इन दिनों कई बच्चे अचानक अपने दादा-दादी को खो रहे हैं। एक बच्चे ने बतलाया, "अम्बुलेंस से कुछ लोग उतरे जो अंतरिक्ष यात्री की तरह ड्रेस पहने हुए थे। वे सुरक्षा कवच, दस्ताने और मास्क पहने हुए थे। वे मेरे दादाजी जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी उन्हें ले गये। वह अंतिम बार था जब मैंने अपने दादाजी को देखा।" उसे इस बात का भी दुःख है कि वह अपने दादाजी के निकट नहीं आ सके। उसने रोज दिन उसके लिए प्रार्थना की और सिर्फ इसी के द्वारा वह अपने दादाजी की अंतिम यात्रा में साथ दे सके।

धन्यवाद प्रभु, प्रेम करने की शिक्षा देने के लिए

चौदहवाँ स्थान : येसु कब्र में रखे जाते हैं। इस स्थान पर 14 वर्षीय सारा ने चिंतन किया है। उसने येसु को धन्यवाद दिया है। वह करती है, "मैं आपको धन्यवाद देना चाहती हूँ क्योंकि आपने मुझे आप पर भरोसा रखकर अपनी परेशानियों से ऊपर उठना सिखाया है, दूसरों को भाई और बहन के रूप में प्यार करना और जब गिर जाते हैं तो हर बार उठना सिखाया है...आपके असीम प्रेम के लिए धन्यवाद। मैं जानती हूँ कि मौत सब कुछ का अंत नहीं है।"

यदि आप बच्चों के समान नहीं हो जाते ...

क्रूस रास्ता की अंतिम प्रार्थना। येसु ने बच्चों का उदाहरण दिया था जब उन्होंने स्वर्ग राज में प्रवेश करने हेतु आवश्यक गुणों का जिक्र किया था। ये आवश्यक चीजें हैं उनके समान छोटा बनना, सब कुछ के लिए निर्भर रहना, जीवन के लिए खुला होना। उसके बाद दुनिया के सभी बच्चों को प्रभु को समर्पित किया गया है ताकि वे प्रज्ञा, उम्र और कृपा में बढ़ सकें। अंततः उनके माता-पिताओं एवं शिक्षकों के लिए भी प्रार्थना की गई है ताकि वे जो जीवन एवं प्रेम देनेवाले हैं अपने बच्चों से हमेशा संयुक्त रह सकें।

02 April 2021, 12:27