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बैंक्वेट हॉल को कोविड-19 केंद्र में परिवर्तित बैंक्वेट हॉल को कोविड-19 केंद्र में परिवर्तित  (AFP or licensors)

काथलिक धर्मगुरूओं द्वारा कोविड-19 संकट में राहत लाने की कोशिश

महाधर्माध्यक्ष मचाडो का सुझाव है कि काथलिक स्कूल एवं संस्थाएँ उन रोगियों के लिए देखभाल केंद्र बनें जो अधिक गंभीर स्थिति में नहीं हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, बृहस्पतिवार, 28 अप्रैल 2021 (रेई)- जब भारत में हर दिन कोविड-19 के 3 लाख से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं, काथलिक धर्मगुरूओं ने लोगों की मदद करने का सुझाव दिया है।

बैंगलोर के महाधर्माध्यक्ष ने 28 अप्रैल को उका न्यूज को बतलाया, "हमारे अस्पताल भरे हुए हैं और नये मरीज की भर्ती के लिए जगह ही नहीं है जब तक कि कोई डिस्चार्ज नहीं होता।"

"गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को जगह नहीं है कह देना कोई समाधान नहीं है। उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा की जरूरत होती है, विशेषकर, उन लोगों को जिन्हें जीवन समर्थक व्यवस्था की जरूरत है।"

स्कूलों एवं संस्थानों को कोविड-19 केंद्र में परिवर्तित करने का सुझाव

महाधर्माध्यक्ष ने अपने महाधर्मप्रांत में काथलिक अस्पतालों को सुझाव दिया है कि अस्पतालों के निकट के काथलिक स्कूलों एवं संस्थानों को कम बीमार लोगों के लिए कोविड-19 देखभाल केंद्र में परिवर्तित करें।

उन्होंने कहा, "इस तरह हम गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए अधिक बेड उपलब्ध कर सकते हैं। जिन लोगों ने गंभीर स्थिति को पार किया है वे भी अस्थायी केंद्रों में सेवा प्राप्त कर सकते हैं।"

महाधर्माध्यक्ष ने बतलाया कि शहर में कुल 12 अस्पताल हैं जिनमें संत जॉन्स मेडिकल कॉलेज भी शामिल है जो देश के काथलिक धर्माध्यक्षों द्वारा संचालित है।

अभी जरूरत है जीवन बचाने की

महाधर्माध्यक्ष मचाडो ने कहा, "किन्तु हमारे सभी अस्पताल भरे हुए हैं और हम नये मरीजों की भर्ती नहीं कर पा रहे हैं। संत जॉन्स अस्पताल में करीब 500 मरीज भर्ती हैं और हमें हर दिन नये मरीजों की भर्ती के लिए फोन आ रहे हैं। हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि हमें गैर-अस्पताल सुविधा को एक कोविड-19 देखभाल केंद्र में बदलने हेतु सरकार से अनुमति की आवश्यकता है। 

"हमने इस ऑफर को राज्य सरकार के सामने रखी है किन्तु सरकार ने अब तक जवाब नहीं दी है।" 

सरकारी अस्पतालों के निकट कलीसिया अपने संस्थानों को प्रदान करने के लिए तैयार है ताकि कोविड-19 मरीजों की देखभाल हेतु अस्थायी केंद्र बनया जा सके। "अभी जरूरत है जीवन बचाने की।" महाधर्माध्यक्ष ने अस्पताल में मदद करने के लिए स्वयंसेवकों को भी उपलब्ध कराया है।

मध्य अप्रैल से ही भारत में हर दिन कोविड-19 के 3 लाख नये मामले सामने आ रहे हैं और करीब 2000 से अधिक लोगों की मौत हर 24 घंटे में हो रही है।

28 अप्रैल को देश में 3,60,960 नये मामले दर्ज किये गये तथा 3,293 लोगों की मौत हुई। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी हो गई है तथा मरीजों को बेड साझा करते एवं अस्पतालों के फर्श पर लेटे देखा जा सकता है।

नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा कि कई डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ लगातार काम करके एक्ससिटेड हैं। कुछ ने नौकरी ही छोड़ दी है।

धर्मगुरूओं की लोगों से अपील

कलीसिया के धर्मगुरूओं ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड-19 निर्देश का पालन करें और जितना हो सके घर में रहें क्योंकि महामारी से बचने का यही उपाय है जब चिकित्सा सुविधा गंभीर हालत में भी मिलना मुश्किल है।

इंदौर के धर्माध्यक्ष चाको थोत्तूमरिकल ने 27 अप्रैल को अपने धर्मप्रांत के काथलिकों के लिए बेड उपलब्ध कराने की असमर्थता जताते हुए लिखा है, "मैं आपके प्रियजनों के लिए एक बेड की व्यवस्था नहीं कर सका। यह इसलिए क्योंकि वहाँ बेड खाली नहीं थे। सभी अस्पताल भरे हुए हैं।"

उन्होंने लिखा है कि "यह समय सभी के लिए कठिन है। हर दिन हम किसी न किसी प्रियजन की मौत की खबर सुन रहे हैं। यदि मौत नहीं तो किसी मित्र के वेंटीलेटर में या आईसीयू में होने की खबर। जो अस्पतालों में बेड पा जाते हैं वे भाग्यशाली हैं।"

कोविड-19 की दूसरी लहर 100 गुणा अधिक खतरनाक

कोविड-19 की दूसरी लहर पहले की तुलना में सौ गुणा अधिक खतरनाक है। लोग पागलों की तरह ऑक्सीजन सिलेंडर और रेमेडिसविर इंजेक्शन की खोज कर रहे हैं। इस बीच कुछ लोगों का अनुमान है कि बदत्तर स्थिति अभी आना बाकी है। 

मुम्बई और नई दिल्ली जैसे सबसे अधिक संक्रमित शहरों में भी काथलिक अस्पताल भरे हुए हैं और मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। 

मुम्बई के अंधेरी क्षेत्र में स्थित हॉली स्पिरिट अस्पताल के प्रशासक सिस्टर स्नेहा जोसेफ ने कहा, "हमें कोविड-19 मरीजों को वापस भेजना पड़ा क्योंकि बेड उपलब्ध नहीं थे।"

"हमें दुःख होता है जब गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। पहले की तुलना में दूसरी लहर 100 गुणा अधिक खतरनाक है।

कोविड-19 से बुरा हाल एवं दूसरी समस्याएँ

न केवल बड़े शहरों में बल्कि राँची जैसे छोटे शहरों और गाँवों में भी कोविड-19 मरीजों की हालात गंभीर है। यहाँ भी सभी अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं। राँची महाधर्मप्रांत के सचिव फादर सुशील टोप्पो ने बतलाया कि शहर में न बेड खाली है न दवाई, न ऑक्सीजन मिल पा रहा है। लोग लगातार मर रहे हैं। बहुत सारे नर्स और डॉक्टर भी संक्रमित हो चुके हैं। अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाने पर लोगों से धमकियाँ भी मिलती हैं।

उन्होंने खेद प्रकट किया कि ऐसी स्थिति में भी कुछ लोग जमाखोरी से पैसा कमाने की कोशिश में लगे हैं। एक ऑक्सीजन सिलेंडर का दाम 20 हजार से 50 हजार तक हो गया है। अम्बुलेंस के लिए लम्बी लाईन लगानी पड़ती है।

फादर टोप्पो ने बतलाया कि कलीसिया की ओर से हरसंभव लोगों की मदद की कोशिश की जा रही है। कुछ बेसहारे लोगों को आर्थिक मदद और भोजन दिये जा रहे हैं। मांडर स्थित वृद्धाश्रम को कम गंभीर मरीजों के लिए कोविड-19 देखभाल केंद्र बनाया गया है। लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराने में भी मदद की जा रही है। काथलिक स्कूलों और कॉलेजों को कोविड-19 केंद्र बनाने के लिए सरकार से अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है। लोगों को आध्यात्मिक मदद पहुँचाने के लिए ऑन लाईन रोजरी प्रार्थना का संचालन किया जा रहा है।

29 April 2021, 15:36