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दक्षिण कोरियाई कार्डिनल निकोलस चेयोंग जिनसुक अब नहीं रहे

दक्षिण कोरिया के सियोल महाधर्मप्रांत के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल निकोलस चेयोंग जिनसुक का निधन 27 अप्रैल को हो गया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

सियोल,बुधवार 28 अप्रैल 2021 (वाटिकन न्यूज) : सियोल महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता ने सूचित किया कि 27 अप्रैल को सियोल के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष 89 वर्षीय कार्डिनल निकोलस चेयोंग जिनसुक का निधन हो गया, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

2006 में बेनेडिक्ट सोलहवें द्वारा उन्हें कार्डिनल बनाया गया था और 2012 तक 14 वर्षों के लिए दक्षिण कोरियाई राजधानी शियोल के महाधर्माध्यक्ष थो। जीवन भर, प्रभु से उनकी प्रार्थना थी कि उनके देश में काथलिक विश्वासियों और पुरोहितों की संख्या बढ़ती रहे।

कार्डिनल निकोलस च्योंग जिनसुक की मृत्यु के बाद, कार्डिनल मंडल में कुल 223 कार्डिनल हैं, जिनमें से 126 मतदाता हैं और 97 गैर-निर्वाचक हैं।

बायोडाटा

कार्डिनल निकोलस चेयोंग जिनसुक का जन्म सियोल के पास सुप्रियो डोंग में 7 दिसंबर 1931 को एक काथलिक परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने आविष्कारक बनने का सपना देखा था और 1950, कोरियाई युद्ध के प्रकोप का वर्ष था, उन्होंने सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग संकाय में दाखिला लिया, लेकिन संघर्ष के कारण अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ थे। बाद में उन्होंने सॉन्ग शिन मेजर सेमिनरी में प्रवेश किया और 18 मार्च, 1961 को उनका पुरोहिताभिषेक हुआ। उस समय, कोरियाई काथलिक कुल आबादी का 1% भी नहीं थी। उन्होंने प्रार्थना की कि उनकी संख्या बढ़कर 10% हो जाए, जो 2000 में हुई थी। जंग रिम डोंग पल्ली में वे सहायक पल्ली पुरोहित और सोंग शिन हाई स्कूल में एक शिक्षक और वाइस प्रिंसिपल बन गए। बाद में महाधर्मप्रांत में धर्माध्यक्ष के निजी सचिव और चांसलर के रुप में उनहोंने महाधर्मप्रांत के भीतर कई गतिविधियों में लगे रहे।

रोम में उनकी पढ़ाई और कोरिया वापसी

उन्होंने रोम के उर्बान विश्वविद्यालय में कैनन लॉ में डिग्री प्राप्त की और कोरिया लौटने पर, 25 जून 1970 को उन्हें संत पापा पॉल छठे  ने चेओन्जू का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया। उसी वर्ष 3 अक्टूबर को उन्हें एपिस्कोपल ऑर्डिनेशन मिला। धर्माध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति के समय चेओंगजू में अपने प्रेरितिक क्षेत्राधिकार के तहत 22 पल्लियाँ थीं और  6 कोरियाई पुरोहित और 20 मैरीनाकोल पुरोहित थे। पहले दिन से उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की: "इस धर्मप्रांत को 100 पुरोहित दान करें!"। 28 साल बाद जब उसने धर्मप्रांत छोड़ा, तो धर्मप्रांतीय पुरोहितों की संख्या 106 थी। 1975 से 1999 तक वे कोरियाई धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की कार्यकारी समिति के सदस्य थे। 1996 से 1999 तक उन्होंने कोरियाई धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष का पद संभाला। 3 अप्रैल, 1998 को, संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें सियोल के महाधर्माध्यक्ष के रूप में चुना और उसी वर्ष के 6 जून से उन्हें प्योंगयांग धर्मप्रांत का प्रेरितिक प्रशासक भी नियुक्त किया।

निकोलस चेयोंग जिनसुक को 24 मार्च 2006 के सामान्य लोक सभा परिषद में संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें द्वारा कार्डिनल बनाया गया। कार्डिनल निकोलस परमधर्मपीठ के संगठनात्मक और आर्थिक समस्याओं के अध्ययन के लिए कार्डिनलों की परिषद का सदस्य था। उन्होंने कई विदेशी पुस्तकों का अनुवाद किया है और कैनन लॉ पर उनकी टिप्पणियों की श्रृंखला एशिया में पहली थी। 2005 में उन्होंने "मूसा, अपने लोगों के नेता" नामक पुस्तक को भी प्रकाशित किया। 10 मई 2012 से वे सियोल महाधर्मप्रांत के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष थे।

28 April 2021, 14:46