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सीरिया के पूर्वी शहर राका में ध्वस्त घरों के ऊपर उड़ते कबूतर सीरिया के पूर्वी शहर राका में ध्वस्त घरों के ऊपर उड़ते कबूतर  (AFP or licensors)

कार्डिनल ज़ेनारी ˸ सीरिया में आशा को बचाने हेतु मदद की आवश्यकता

अरब गणराज्य पर छाए संकट के दस साल बाद, सीरिया के प्रेरितिक राजदूत ने जोर दिया है कि लोगों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए मदद देने की जरूरत है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 16 मार्च 2021 (रेई)- सीरिया में युद्ध ने असंख्या लोगों के जीवन और उनकी शांति को छीन लिया है तथा आशा को समाप्त कर रहा है। प्रेरितिक राजदूत कार्डिनल मारियो ज़ेनारी को डर है जो युद्ध, हिंसा और निहित स्वार्थ द्वारा 10 वर्षों तक तोड़े गये देश में रह रहे हैं।

वे याद करते हैं कि देश की स्थिति हमेशा ऐसी नहीं थी लेकिन आज सब कुछ खो रहा है और बहुत अधिक मदद की जरूरत है।

संत पापा फ्राँसिस ने इराक की यात्रा से लौटते समय एवं 15 मार्च को देवदूत प्रार्थना के दौरान "प्यारे एवं संतप्त देश सीरिया की याद की थी।"

सवाल- मान्यवर, पोप ने सीरिया में मेल-मिलाप, सहअस्तित्व एवं शांति का पुनः आह्वान किया है...  

उत्तर – संघर्ष के शुरू से ही संत पापा फ्रांसिस के बारम्बार दुहराये गये अपील के वाक्यांश आम हो गये हैं ˸ "प्यारे और संतप्त सीरिया"। यह उन देशों में से एक है जो उनके हृदय के सबसे करीब हैं। पिछले दिनों इराक की प्रेरितिक यात्रा में भी संत पापा ने सीरिया का नाम लिया था। पिछले रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान, युद्ध की दुखद 10वीं वर्षगाँठ पर बोलते हुए उन्होंने लोगों के घोर दुःख की याद की तथा अंतरराष्ट्रीय एकात्मता एवं हथियारों के प्रयोग के अंत की जबरजस्त अपील की एवं मेल-मिलाप, पुनःनिर्माण और आर्थिक सुधार का प्रोत्साहन दिया ताकि उन लोगों की आशा को पुनः जागृत किया जा सके, जो बढ़ती गरीबी एवं अनिश्चित भविष्य के शिकार हो रहे हैं।

संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें एवं संत पापा फ्राँसिस दोनों ने हाल के वर्षों में कई पहल किये हैं जिससे हिंसा का अंत हो एवं शांति प्रक्रिया आगे बढ़े।  

मानवीय सहायता से संबंधित भी कई कदम उठाये गये हैं। संत पापा फ्राँसिस ने परमाध्यक्ष चुने जाने के कुछ ही दिनों बाद 7 सितम्बर 2013 को एक दिवसीय उपवास एवं प्रार्थना की घोषणा की थी। उस उत्तेजक घड़ी में, जो शायद सीरिया के लिए सबसे  महत्वपूर्ण समय था, संत पेत्रुस महागिरजाघर का प्रांगण विश्वासियों से भरा था। इराक की प्रेरितिक यात्रा से वापस लौटते हुए विमान में भी उन्होंने इसकी याद की।  

सवाल- इस समय देश की क्या स्थिति है जब यह कोविड-19 संकट का भी सामना कर रहा है?

उत्तर – प्रेरितिक राजदूत के रूप में जब मैं 12 साल पहले सीरिया पहुँचा तो जिस सीरिया को मैं जानता था वह अब नहीं है। आज जब मैं दमिस्क की सड़कों पर जाता हूँ तब लोगों को बेकरी के सामने लम्बी कतारों में देखता हूँ, जो राज्य द्वारा रियायती मूल्य पर ब्रेड खरीदने के लिए धीरज से अपनी बारी का इंतजार करते हैं। कई बार सिर्फ यही उनका भोजन होता है। कई ऐसे दृश्य भी देखने को मिलते हैं जिनको पहले कभी नहीं देखा गया था, युद्ध के समय में भी नहीं। आप पेट्रोल टंकी के सामने भी लोगों की लम्बी कतार देख सकते हैं और घरों को गर्म करने के लिए डीजल ईंधन प्राप्त करना मुश्किल होता है यद्यपि देश के पूर्वी भाग, इराक की सीमा पर तेल के कुएँ हैं जिनसे घरेलू उपयोग के लिए ईंधन की लगभग पूरी आवश्यकता की आपूर्ति हो सकती थी।  

सवाल- 10 सालों तक युद्ध के बाद अब इसके क्या असर दिखाई पड़ रहे हैं?

उत्तर – आज की सीरिया के पास एक ऐसे देश का चेहरा है जहाँ 10 साल पहले की कई श्रेणियोँ के लोग नहीं रह गये हैं ˸ करीब आधे मिलियन लोग युद्ध में मारे जा चुके हैं; 5.5 मिलियन सीरियाई पड़ोसी देशों में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं; अन्य 6 मिलियन लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हैं और एक गाँव से दूसरे गाँव भटक रहे हैं। करीब एक मिलियन आप्रवासी लापता है। युवा जो देश के भविष्य हैं वे भी लापता हैं। देश में ख्रीस्तियों की आधी आबादी लापता है। कई बच्चों के पिता अथवा माता नहीं हैं। बहुत सारे लोगों के पास रहने का घर नहीं है। स्कूल, अस्पताल, दवाखाना एवं नर्सों की कमी है और ऐसी स्थिति में कोविड-19 संकट से जूझना है। फैक्ट्रियों एवं अन्य कामों का अभाव है। पूरे गाँव और पड़ोस गायब है। जमीन मटियामेट और बेजान है। प्रसिद्ध पुरातात्विक धरोहर जो दुनियाभर के दर्शकों को लुभाता था, अब जीर्ण-शीर्ण पड़ा है। सामाजिक ताने-बाने, जातीय और धार्मिक समूहों के बीच अनुकरणीय सह अस्तित्व को गंभीर रूप से नष्ट किया गया है। दस सालों तक विभिन्न प्रकार के विस्फोटक और उपकरणों के प्रयोग से प्रकृति भी हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषण के साथ कराह रही है। जमीन रौंदा गया है और आसमान एक-दूसरे के साथ मतभेद पर पाँच शक्तियों के सशस्त्र बलों द्वारा भड़का है, जैसा कि सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मिस्टर गेर पेदेरसन अक्सर याद दिलाते हैं। संक्षेप में, बिलकुल धूमिल तस्वीर है।  

सवाल- बच्चे जिन्होंने सिर्फ हिंसा और नुकसान देखा है। उनके घाव किस तरह चंगे हो सकते हैं?

उत्तर- हर युद्ध की तरह, इस लम्बे और क्रूर संघर्ष का विनाशकारी प्रभाव रहा है खासकर, बच्चों, महिलाओं और बुजूर्गों जैसे कमजोर लोगों के लिए। बहुत सारे बच्चे बमबारी या गोलीबारी में मौत के शिकार हो गये, कुछ को मलवे से घायल और विकलांग स्थिति में बाहर निकाला गया। कुछ की मौत समुद्र पर करते समय हुई, अनेक बच्चे मनोवैज्ञानिक आघात से पीड़ित हैं, जिनसे चंगा होना मुश्किल है और कई अनाथ हो गये हैं। कई बच्चों की मौत कुपोषण, ठंढ और प्यास से हुई है। कुछ अपनी माताओं के साथ विभिन्न शरणार्थी शिविरों में प्रतीक्षा कर रहे हैं कि वे कब अपने देश लौटेंगे। 2016 में खूनी संघर्ष के बाद हजारों बच्चे बिना परिवार, बिना नाम और कुलनाम के सड़कों एवं खंडहरों में घूमने के लिए छोड़ दिये गये थे। जिन्हें अलेप्पो के मुस्लिम और ख्रीस्तीय अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से, एक नाम और उपनाम के साथ रजिस्ट्री कार्यालय में पंजीकृत कर, सामाजिक सुदृढीकरण के मार्ग पर लाया गया। हर तीन में से एक स्कूल उपयोग के लायक नहीं रह गया है जिसके कारण सीरिया के 2 मिलियन बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। कुछ बच्चे यौन शोषण के शिकार हैं। बालिकाओं को बाल-विवाह का खतरा है। ये सभी मासूमों का असली नरसंहार है।  

सवाल- इस पृष्टभूमि पर कलीसिया की क्या भूमिका है?

उत्तर- सीरिया में मौजूद विभिन्न धर्मों के सामने एक बड़ी चुनौती है, खासकर, ख्रीस्तीय एवं इस्लाम धर्मों के सामने, वह है मेल-मिलाप एवं युद्ध में ध्वस्त सामाजिक ताने-बाने को ठीक करना। हालांकि, कलीसिया विश्वभर के विभिन्न परोपकारी संस्थाओं की सहायता से, सभी के लिए खुले मानवीय परियोजनाओं के विशाल नेटवर्क के साथ वहाँ सक्रिय है। हम कह सकते हैं कि वह "भले समारी" का कार्य कर रहा है।  

सवाल- आप इस चालीसा काल की अवधि को किस तरह और किस क्षितिज के साथ जी रहे हैं?

उत्तर- हम इस चालीसा काल को लोगों के साथ रहकर जीने की कोशिश कर रहे हैं। यह बिना रूके 10 साल से चल रहा है। हम देश के पुनरूत्थान के रूप में, सुरांग के अंत और सीरिया के सुधार को देखने का इंतजार कर रहे हैं।  

सवाल- आप देश के लिए क्या अपील करना चाहते हैं?

उत्तर - वाड अल-काटेब के उपनाम से एक सीरियाई पत्रकार ने "द न्यूयॉर्क टाइम्स" में 7 फरवरी, 2020 को एक लेख लिखा, जिसका शीर्षक है: "हम अकेले मौत का सामना करने के लिए बचे हैं"। सीरिया ने युद्ध की इस लम्बी अवधि में शांति खो दी है, लोगों को खोया है, युवाओं को खोया है, ख्रीस्तियों को खोया है। लोगों ने बहुत कुछ खोया है और आशा भी खो रहे हैं। हमारी तुलना भले समारी के दृष्टांत में घायल व्यक्ति से की जा सकती है जो डाकूओं द्वारा लूटे और सड़क किनारे अधमरे एवं अपमानित पड़े हैं तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से मदद दिये जाने का इंतजार कर रहे हैं एवं अपनी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करना चाहते हैं। सीरिया के प्रेरितिक राजदूत ने उन अंतरराष्ट्रीय मानवीय संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और व्यक्तियों के प्रति आभार प्रकट किया जिन्होंने भले समारी के समान अपनी उदारता दिखलायी है।

    

16 March 2021, 16:06