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बांग्लादेश लौदातो सी अभियान: "एक काथलिक एक पेड़"

बांग्लादेश में कलीसिया ने संत पापा फ्राँसिस के विश्वपत्र 'लौदातो सी' अभियान के तहत वृक्षारोपन शुरू किया है। कार्डिनल पैट्रिक डी'रोज़ारियो बताते हैं, इस पहल से उम्मीद की जाती है कि यह विश्वासियों को प्रकृति, सृष्टिकर्ता और मानव जाति के बीच अपने संबंधों को मजबूत करने में मदद करेगा।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 10 मार्च 2021 (वाटिकन न्यूज) : पेड़ कई चीजों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुछ के लिए, गर्मी के दिनों में चिलचिलाती धूप से छाया प्रदान करते हैं। दूसरों के लिए, वे जीविका का एक स्रोत और सुंदरता के कई अभिव्यक्तियों में से एक हैं जो हम प्रकृति में अनुभव करते हैं।

दक्षिण एशियाई देश बांग्लादेश में, काथलिक धर्माध्यक्षों ने संत पापा फ्राँसिस के विश्वपत्र लौदातो सी 2015 'हमारे आम धर की देखभाल’ की पांचवीं वर्षगांठ मनाने के लिए 400,000 पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया है।

गत साल अगस्त में ढाका में बांग्लादेशी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन केंद्र में  ढाका के महाधर्माध्यक्ष सेवानिवृत कार्डिनल डी'रोज़ारियो के नेतृत्व में धर्माध्यक्षों, धर्मसंघियों और लोक धर्मियों ने प्रतीक के रुप में तीन पेड़ लगाए। धर्माध्यक्षों ने देश के आठ धर्मप्रांतों में सभी को वृक्षारोपन के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्डिनल डी'रोज़ारियो और अन्य धर्माध्यक्ष वृक्ष-रोपण की पहल कर रहे हैं
कार्डिनल डी'रोज़ारियो और अन्य धर्माध्यक्ष वृक्ष-रोपण की पहल कर रहे हैं

पेड़, हर जगह पेड़!

लगाए जाने वाले 400,000 पेड़ों की विशिष्ट संख्या के बारे में कार्डिनल डी'रोज़ारियो ने कहा कि यह संख्या "एक काथलिक एक पेड़" सिद्धांत के आधार पर देश में काथलिकों की आबादी का एक अनुमानित प्रतिनिधित्व है।

उन्होंने कहा, "प्रत्येक काथलिक दुनिया में अपनी वफादार नागरिकता के संकेत के रूप में बांग्लादेश में एक पेड़ लगाएगा क्योंकि हमें अपने आम घर और देश की भी अच्छी देखभाल करनी है।"

पेड़ों को पल्ली के परिसर, धार्मिक संस्थानों के परिसर और धर्मप्रांत द्वारा संचालित स्कूलों के परिसरों में लगाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां भूमि प्रयाप्त मात्रा में है, लोगों को अपने बगानों में पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। शहरों में रहने वाले काथलिकों से आग्रह किया जाता है कि वे पेड़ लगाने वाले अभियान में भाग लेने के लिए छत पर बगीचों का लाभ उठाएं। शहरी निवासी जिनके पास गांवों में जमीन या घर हैं, वे अपने दोस्तों और पड़ोसियों से अपने बगानों में पेड़ लगाने में मदद करने के लिए कह सकते हैं।

कार्डिनल डी'रोज़ारियो ने बताया कि बांग्लादेश के आठ धर्मप्रांतों में से हर एक को अपनी आबादी के अनुसार पेड़ लगाने के लिए आवंटित किया गया है। वृक्षारोपन अभियान को बांग्लादेशी काथलिक विद्यार्थी संगठनों (बीसीएसएम) और कलीसियाई संयुक्त मंच ने भी लिया है, जिन्होंने अपने 200,000 काथलिकों और गैर-काथलिक संप्रदायों के साथ पेड़ लगाने की पहल में शामिल होने के लिए स्वीकार किया है।

वृक्षारोपण पहल करने वाले बांग्लादेशी छात्र
वृक्षारोपण पहल करने वाले बांग्लादेशी छात्र

ख्रीस्तियों को विभिन्न प्रकार के फलों के पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है "ताकि वे अपने बगीचों के फल खा सकें।"  धर्माध्यक्ष विश्वासियों से सागौन पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसकी लकड़ी टिकाऊ है, जो  भवन निर्माण और फर्नीचर बनाने के लिए काम आ सकता है। पेड़ों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए मानसून के मौसम में वृक्षारोपण करना होगा। 2021 के मानसून के मौसम में पहली पारी का पेड़ लगाया जाएगा और बाकी बाद में।

पेड़ क्यों लगाए?

संत पापा फ्राँसिस के ‘लौदातो सी’ के 'तत्काल और प्रासंगिक अपील' के जवाब के कई संभावित तरीकों में से, बांग्लादेश के धर्माध्यक्षों ने वृक्षारोपण अभियान को चुना क्योंकि यह विशेष रूप से राष्ट्रीय संदर्भ के लिए उपयुक्त है और क्योंकि यह विचार अच्छी तरह से धर्मप्रांत और पल्लियों के विश्वासियों द्वारा स्वीकारा गया।

कार्डिनल डी'रोज़ारियो ने आगे बताया कि बांग्लादेश के धर्माध्यक्षों ने राष्ट्र के संस्थापक बंगबंधु शेख मुज्जफुर रहमान के जन्म के शताब्दी वर्ष के समरोह की योजना बनाने के लिए एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया था। यह जयंती इस पूरे वर्ष मनाई जा रही है और इसके बाद बांग्लादेश की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती है जो पूरे 2021 तक चलेगी।

बांग्लादेश ने 26 मार्च 1971 को पाकिस्तान से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर ली और 26 मार्च 2021 से 26 मार्च 2022 तक एक साल उत्सव का आयोजन किया जाएगा।

कार्डिनल डी'रोज़ारियो ने कहा कि  ये दो जुबली लौदातो सी की 5वीं वर्षगांठ के साथ मेल खाते हैं, जो "अन्य दो जयंती के लिए ख्रीस्तीय और मानवीय दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।"

इसके अलावा, बांग्लादेश में कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण भी चल रहा है, जहाँ पेड़ कटाव, चक्रवातों और वनों की कटाई के कारण नष्ट हो गए हैं और जहाँ धर्माध्यक्षों की पहल से यह कार्यक्रम पहले से ही लागू किया गया है उनका उद्देश्य एक मिलियन पेड़ लगाना है। ।

पारिस्थितिक परिवर्तन

कार्डिनल डी'रोज़ारियो ने उल्लेख किया कि पेड़ कई उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं। पेड़ जलवायु परिवर्तन के बारे में लाए गए "पारिस्थितिक असंतुलन के लिए संतुलन" लाते हैं और बांग्लादेश में लगातार चक्रवातों के कारण होने वाली तबाही से लोगों और उनकी संपत्ति की रक्षा करते हैं और शुष्क मौसम में वर्षा लाने में मदद करते हैं।"

वृक्षारोपण अभियान में भाग लेती हुई कुछ धर्मबहनें
वृक्षारोपण अभियान में भाग लेती हुई कुछ धर्मबहनें

हालाँकि, यह वृक्षारोपण अभियान केवल एक अलग कृषि कार्यक्रम नहीं है: इसका उद्देश्य विश्वपत्र लौदातो सी में सामने लाए गए वर्तमान पारिस्थितिक संकट को उजागर करना है। यह पर्यावरणीय देखभाल में हमारी गैरजिम्मेदारी और विफलताओं पर ध्यान आकर्षित करके पारिस्थितिक रूपांतरण को बढ़ावा देता है और "पालन, देखभाल और साझा करने" की भावना को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, यह "हमें प्रकृति, सृष्टिकर्ता और मनुष्यों के साथ संबंध - विशेष रूप से गरीबों" के साथ संबंध विकसित करने के लिए हमें सिखाने का शैक्षणिक कार्य करता है।

लौदातो सी वर्ष और उससे आगे

मई 2015 में लौदातो सी विश्वपत्र के प्रकाशन के बाद से, बांग्लादेश में कलीसिया ने सेमिनार, रैलियों और संगोष्ठियों के आयोजन के साथ-साथ विश्वासियों के बीच जागरूकता पैदा करने और सृष्टि के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

सृष्टि के मौसम (1 सितंबर - 4 अक्टूबर 2020) बांग्लादेश में “पृथ्वी के लिए जुबली” का आयोजन किया गया, जिसे प्रार्थना दिवस, सेमिनार और शैक्षिक कार्यक्रमों के साथ बांग्लादेश में मनाया गया। एशिया के धर्माध्यक्षों के संघों के सम्मेलन (एफएबीसी) ने भी विश्वासियों के लिए एक प्रेरितिक पत्र लिखा, जिसमें उन्हें अपव्यय और प्रदूषण को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, साथ ही उन उपायों को अपनाया गया जो उनके परिवेश में स्वच्छता को बढ़ावा देते हैं। इसी तरह से, धर्माध्यक्षों ने अपने धर्मप्रांतों में विश्वासियों को लिखकर पल्ली समुदायों और पल्ली स्तर के संगठनों द्वारा किये जाने वाले कई ठोस कार्यों का सुझाव दिया।

पृथ्वी के नमक

वृक्षारोपण अभियान की निरंतर सफलता के बारे में आशावादी, कार्डिनल डी'रोज़ारियो को उम्मीद है कि इस पहल से जागरूकता बढ़ेगी और लोगों को पृथ्वी के रोने का जवाब देने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जो ईश्वर, हमारे पड़ोसियों और सृष्टि से प्यार करके विश्वासियों को अपनी आध्यात्मिकता में बढ़ने में मदद करेगा।

हालांकि काथलिक कलीसिया बांग्लादेशी आबादी का केवल 0.2 प्रतिशत है, कार्डिनल पुष्टि करते हैं कि कलीसिया का प्रभाव उत्सुकता से महसूस किया गया है। उन्होंने कहा कि पहल राष्ट्रीय वृक्षारोपण कार्यक्रम में योगदान करती है, यह एक ईशशास्त्रीय, ख्रीस्तीय और कलीसियाई दृष्टिकोण देती है।

कार्डिनल डी'रोज़ारियो ने कहा, "कलीसिया पृथ्वी के नमक की तरह है," "एक प्लेट चावल के लिए आपको बहुत अधिक नमक की आवश्यकता नहीं होती है - इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए आपको चुटकी भर नमक की आवश्यकता होती है।"

10 March 2021, 14:56