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शपथ ग्रहण करते अमरीका के नये राष्ट्रपति जो बाइडन शपथ ग्रहण करते अमरीका के नये राष्ट्रपति जो बाइडन 

अमरीकी धर्माध्यक्ष: मेरी प्रार्थना नये राष्ट्रपति के लिए

अमरीकी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष एवं लोस एंजेल्स के महाधर्माध्यक्ष जोश गोम्स ने जो बाइडन के अमरीका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में उद्घाटन के अवसर पर एक बयान जारी कर कहा कि वे राष्ट्रपति जो बाइडन एवं उनके प्रशासन के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

अमरीका, बृहस्पतिवार, 21 जनवरी 2021 (वीएनएस)- महाधर्माध्यक्ष गोम्स ने लिखा, "मेरी प्रार्थना हमारे नये राष्ट्रपति एवं उनके परिवार के लिए है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर उन्हें इस राष्ट्र का संचालन करने हेतु प्रज्ञा एवं साहस प्रदान करे ताकि इस महामारी के कारण हुए घावों को ठीक किया जा सके, हमारे गहन राजनीतिक और सांस्कृतिक विभाजन को कम किया जा सके, और अमेरिका के संस्थापक के उद्देश्यों के लिए नवीकृत समर्पण के साथ लोगों को एक साथ लाया जा सके, जिससे कि सभी लोग स्वतंत्रता और समानता के लिए प्रतिबद्ध होकर ईश्वर की छत्रछाया में एक राष्ट्र बन सकें।"

अमरीकी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष की उम्मीद है कि वे बाइडन प्रशासन एवं नये कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर काम कर पायें। उन्होंने गौर किया कि "हर प्रशासन की तरह एक क्षेत्र होगा जहाँ वे एक-दूसरे से सहमत होंगे एवं नजदीकी से काम कर पायेंगे और ऐसे भी क्षेत्र होंगे जहाँ असहमति और कड़ा विरोध होगा।"

उन्होंने यह भी गौर किया कि 60 सालों में पहली बार है जब वाईट हाऊस में एक काथलिक की उपस्थिति होगी अतः यह एक विशिष्ठ स्थिति है। "एक ऐसे राष्ट्रपति के साथ जुड़ना खुशी की बात है, जो धार्मिक विश्वास और संस्थानों के महत्व को गहरे एवं व्यक्तिगत रूप में, स्पष्ट रूप से समझते हैं।" उन्होंने कहा कि वे बाइडन की धार्मिकता एवं व्यक्तिगत जीवन में, आशा एवं प्रेरणा पाते हैं।  

हालांकि, अमरीकी धर्माध्यक्षों के अध्यक्ष ने धर्माध्यक्षों के कर्तव्य पर जोर दिया है कि सुसमाचार की घोषणा इसकी पूरी सच्चाई एवं सामर्थ्य से किया जाना चाहिए जब शिक्षा सुविधाजनक न हो अथवा सुसमाचार की सच्चाई समाज एवं संस्कृति की विपरीत दिशा में जाए। महाधर्माध्यक्ष गोम्स ने कहा, "इसलिए, मुझे यह बताना चाहिए कि हमारे नए राष्ट्रपति ने कुछ ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाने का वादा किया है जो नैतिक बुराइयों को बढ़ावा देगा, जिससे मानव जीवन एवं गरिमा को खतरा होगा, खासकर, गर्भपात, गर्भनिरोधक, विवाह और लिंग के क्षेत्रों में सबसे अधिक गंभीर होगा। सबसे बड़ी चिंता कलीसिया की स्वतंत्रता, विश्वासियों की स्वतंत्रता एवं उनके अंतःकरण की स्वतंत्रता के अनुसार जीने की है।”

महाधर्माध्यक्ष ने जोर दिया कि देश के धर्माध्यक्षों के लिए "गर्भपात का अन्याय प्रमुख प्राथमिकता के रूप में जारी है" किन्तु स्पष्ट रूप से बताते हुए कहा कि प्राथमिक का अर्थ "केवल" नहीं है। धर्माध्यक्षों को मानव जीवन एवं समाज में प्रतिष्ठा के भय को लेकर भी गहरी चिंता है। उन्होंने कहा, "हम चुप नहीं रह सकते जब देश में लाखों अजन्मे जीवन को गर्भपात के द्वारा अलग कर दिया जाता है।"

महाधर्माध्यक्ष गोम्स ने अपनी आशा व्यक्त की कि राष्ट्रपति बाइडन और उनका प्रशासन कलीसिया एवं अन्य भली इच्छा रखनेवाले लोगों के साथ मिलकर कार्य करेंगे न कि गर्भपात एवं गर्भनिरोधक के विस्तार को बढ़ावा देंगे जैसा कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान वादा किया है। उनकी उम्मीद है कि एक साथ काम करते हुए वे गर्भपात को बढ़ावा देनेवाले मुद्दों पर वार्ता करेंगे जिससे कि अमेरिका में एक सुसंगत पारिवारिक नीति लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा, "यदि राष्ट्रपति, कलीसिया की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए पूरे सम्मान के साथ इस बातचीत में संलग्न होंगे, तो यह नागरिक संतुलन को बहाल करने और हमारे देश की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करेगा।"

महाधर्माध्यक्ष गोम्स ने विभाजित देश में मेल-मिलाप करने की जोरदार अपील की है। राष्ट्रपति के राष्ट्रीय चंगाई एवं एकता का हर स्तर पर स्वागत किया है और कहा है कि इसकी अत्याधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा है कि एक विश्वासी के रूप में हम समझते हैं कि चंगाई एक वरदान है जिसको हम सिर्फ ईश्वर के हाथों से ग्रहण कर सकते हैं। इस बात को स्वीकार करते हुए कि केवल ईश्वर हमारे हृदयों को जानते एवं हमारी चाहतों पर न्याय कर सकते हैं, महाधर्माध्यक्ष ने प्रार्थना की कि ईश्वर हमारे नये राष्ट्रपति एवं हम सभी को पूरी ईमानदारी के साथ सार्वजनिक हित की खोज करने की कृपा प्रदान करें।  

उन्होंने इस नई परिस्थिति में अपनी सभी आशाओं एवं चिंताओं को धन्य कुँवारी मरियम को समर्पित किया कि वे हमें शांति की राह पर संचालित करे जिससे कि हम प्रज्ञा एवं सच्ची देशभक्ति और देश के प्रति प्रेम की कृपा पा सकें।

21 January 2021, 14:53