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सिंगापूर का गिरजाघर सिंगापूर का गिरजाघर 

सिंगापूर की कलीसिया की 200वीं जयन्ती

सिंगापूर में सुसमाचार प्रचार की दो सौ वर्षीय जयन्ती मनायी जा रही है। जिसकी विषयवस्तु है, "विश्वास से प्रज्वलित एवं चमकना"। सभी काथलिकों को निमंत्रण देता है कि वे जीवंत, प्रचार करनेवाली और मिशनरी कलीसिया के निर्माण में हाथ बढ़ायें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

सिंगापूर, मंगलवार, 15 दिसम्बर 2020 (वीएन)- सिंगापूर की काथलिक कलीसिया देश में सुसमाचार प्रचार की 200वीं वर्षगाँठ मना रही है जिसमें विश्वासियों को निमंत्रण दे रही है कि वे अपने मिशनरी उत्साह को नवीकृत करें। साल भर मनाये जानेवाली जयन्ती समारोह का उद्घाटन 13 दिसम्बर को सिंगापूर के महाधर्माध्यक्ष विलियम गोह के द्वारा वर्चुवल ख्रीस्तयाग अर्पित करने के द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह में जयन्ती वेबसाईट एवं प्रतीक चिन्ह जारी किया गया तथा सबसे छोटे दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र में काथलिक चर्च के सामाजिक प्रभाव पर एक वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग की गई।  

विश्वास से प्रज्वलित एवं चमकना

जयन्ती वर्ष की विषयवस्तु है, "विश्वास में प्रज्वलित एवं चमकना" जो अधिक जीवंत, प्रचार करनेवाली और मिशनरी कलीसिया को आकार देने हेतु सिंगापूर महाधर्मप्रांत के प्रेरितिक दर्शन के अनुकूल है। जयन्ती वर्ष में विभिन्न कार्यक्रमों में चार मुख्य कार्यों ˸ विश्वास को गहरा करने, आत्मपरख करने, साक्ष्य देने और मनाने के द्वारा काथलिक समुदाय के विश्वास को नवीकृत करने पर ध्यान दिया जाएगा। जयन्ती वर्ष का समापन 11 दिसम्बर 2021 को सिंगापूर की सभी पल्लियों में एक साथ ख्रीस्तयाग अर्पित करने के साथ किया जाएगा। सिंगापूर महाधर्मप्रांत में कुल 360,000 काथलिक है जो 32 पल्लियों में रहते हैं।

उदगम

ब्रिटिश राजनेता सर स्टैमफोर्ड रैफल्स को 1819 में ब्रिटिश साम्राज्य के व्यापारी अधिकारी के रूप में आधुनिक सिंगापुर की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। दो साल बाद, पेरिस विदेशी मिशन सोसाइटी (एमईपी) के एक फ्रांसीसी काथलिक पादरी, फादर लॉरेंट इल्बर्ट ने 11 दिसंबर, 1821 को इसके किनारे पैर रखा था। जिसको पोर्ट सिटी में काथलिक कलीसिया की शुरूआत माना जाता है।

अतीत, वर्तमान एवं भविष्य पर नजर डालना

मार्च में द्विवर्षीय समारोहों के बारे में बात करते हुए, महाधर्माध्यक्ष गोह ने कहा कि यह ऐतिहासिक मील का पत्थर, काथलिकों को अतीत, वर्तमान और भविष्य की ओर नजर डालने हेतु प्रेरित करने का अवसर होगा। उन्होंने कहा, "हम जितना दूर आये हैं उसे कृतज्ञता और धन्यवादी भावना के साथ मनाना चाहते हैं। हमें अपने काथलिकों को सशक्त करना है ताकि वे अपने विश्वास में एवं सुसमाचार प्रचार में उत्साही बन सकें। हमें लोगों को भविष्य के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित करना है, जब मानवता एवं सृष्टि अपनी पूर्णता ईश्वर में प्राप्त करती है।"

जयन्ती समारोह के दौरान काथलिक समुदाय एक साथ अपने मिशनरी पुरोहितों के लिए प्रार्थना करेंगे एवं आज, अपने विश्वास को जीने की चुनौतियों पर चिंतन करेंगे। पल्ली स्तर पर कलीसिया में आध्यात्मिक एवं सामुदायिक क्रिया कलापों का आयोजन किया जाएगा ताकि उनके विश्वास को गहरा किया जा सके। विश्वासी जीवन के विभिन्न आयामों को ध्यान में रखते हुए सभा, प्रवचन एवं विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।  

जयन्ती समिति के उप-अध्यक्ष फादर भलेरियन केओंग के अनुसार विश्वास के नवीनीकरण के दृष्टिकोण से काथलिकों के लिए साल 2021 एक विशेष वर्ष होगा। उत्सव उन्हें विगत 200 सालों में सिंगापूर के विकास में कलीसिया के योगदान की सराहना करने का भी अवसर देगा, खासकर, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सामाजिक सेवा एवं अंतरधार्मिक वार्ता के क्षेत्र में।

उन्होंने कहा कि कलीसिया न केवल काथलिक बल्कि सिंगापूर के सभी लोगों को निमंत्रण देना चाहती है कि वे इस जयन्ती समारोह में भाग लें, अपने विचारों को साझा करे ताकि बेहतर एवं अधिक चिंता करनेवाले समाज का निर्माण किया जा सके।  

संत पापा जॉन पौल द्वितीय

संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने 20 नवम्बर 1986 को सिंगापूर की यात्रा की थी। वे पहले संत पापा हैं जिन्होंने सिंगापूर की भूमि में पांव रखा था। यात्रा के दौरान उन्होंने सिंगापूर के प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति से मुलाकात की थी तथा राष्ट्रीय स्टेडियम में ख्रीस्तयाग अर्पित किया था जिसमें 70,000 लोगों ने भाग लिया था।  

15 December 2020, 15:53