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पापुआ में विरोध प्रदर्शन पापुआ में विरोध प्रदर्शन  (ANSA)

इंडोनेशियाई धर्माध्यक्ष द्वारा पश्चिम पापुआ में बातचीत हेतु अपील

पश्चिम पापुआ प्रांत में एक काथलिक प्रचारक की हत्या के बाद, कलीसिया के नेताओं ने इंडोनेशिया के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी के साथ बैठक कर सरकार से बातचीत और सम्मान के माध्यम से तनाव कम करने का आग्रह किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

इंडोनेशिया, बुधवार 4 नवम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज) : इंडोनेशिया में विशेष रूप से पश्चिम पापुआ प्रांत की काथलिक कलीसिया के प्रतिनिधियों ने देश के राजनीतिक, कानूनी और सुरक्षा मामलों के समन्वय मंत्री श्री महफूद के साथ बातचीत की है।

यह बैठक रविवार को श्री महफुद एमडी के आवास पर आयोजित की गई थी और इसका उद्देश्य अशांत प्रांत की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करना था।

बैठक में इंडोनेशिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल इग्नासियस सुहैरो हरदोजतमाजो, अगाट्स के धर्माध्यक्ष अलोसियुस मुर्वितो और अंबोइना के धर्माध्यक्ष पेत्रुस कनिसियुस मंडागी थे, जो  मैरुके के प्रेरितिक प्रशासक भी हैं।

इंडोनेशियाई नेशनल आर्मी ने 26 अक्टूबर को एक काथलिक प्रचारक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसे अलगाववादी आंदोलन से संबंधित होने का संदेह था। हत्या पश्चिम पापुआ के इंटन जया रीजेंसी में, सुलेपा जिले के जाले गांव में हुई थी।

हानिकारक प्रभाव

धर्माध्यक्ष मंडागी ने उका न्यूज़ को बताया कि घंटे भर की बैठक "पापुआ में विभिन्न समस्याओं, विशेष रूप से हिंसा" को संबोधित करने के लिए की गई थी।

उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया के धर्माध्यक्ष  स्थिति के बारे में चिंतित हैं, हालांकि उन्होंने कोई विशेष मामलों पर चर्चा नहीं की गई थी। बातचीत में हिंसा से पीड़ित स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

संवाद, हिंसा नहीं

धर्माध्यक्ष मंडागी ने बताया कि उन्होंने श्री महफूद से कहा कि पापुआ के लोगों के साथ बातचीत का विस्तार तनाव कम करने में मदद कर सकता है। स्थानीय काथलिक कलीसिया संवाद के लिए हमेशा खुली है।

उन्होंने कहा, "पापुआ वासी अच्छे लोग हैं, पापुआ में आने वाले सैन्य, पुलिस और कलीसिया के कार्यकर्ताओं को उन्हें उपेक्षा की निगाहों से नहीं देखना चाहिए। पापुआ के लोगों का सम्मान करते हुए और बिना हिंसा के हम सभी को पापुआ की समस्याओं को बातचीत से निपटाना होगा।”

धर्माध्यक्ष ने कहा कि सैन्य हस्तक्षेप केवल तनाव को कम करने के लिए होना चाहिए।

लंबे समय से चल रही अशांति

1960 के दशक के उत्तरार्ध से इंडोनेशिया के पश्चिम पापुआ और पापुआ प्रांतों में एक अलगाववादी आंदोलन उतरा है, जब यह क्षेत्र इंडोनेशिया का हिस्सा बन गया था।

पापुआ वासियों ने सरकारी अधिकारियों से अपने मानवाधिकारों के हनन और भेदभाव की शिकायत की। कलीसिया के नेताओं के साथ बैठक के बाद, श्री महफूद ने कहा कि सरकार पश्चिम पापुआ और पापुआ के धर्माध्यक्षों के साथ-साथ अन्य धार्मिक नेताओं के साथ बातचीत को आगे बढ़ाएगी।

धर्माध्यक्ष मंडागी ने हिंसा को रोकने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि पापुआ प्यार का देश बने, युद्ध क्षेत्र नहीं।"

04 November 2020, 15:16