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मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संत पापा ने मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए पवित्र मिस्सा अर्पित किया

संत पापा फ्राँसिस ने 5 नवम्बर को मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए पवित्र मिस्सा अर्पित किया एवं उनके लिए प्रार्थना की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार,5 नवम्बर 2020 (रेई)- संत पापा हर साल नवम्बर के महीने में उन मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए पवित्र मिस्सा अर्पित करते हैं जिनकी मृत्यु उस साल हुई हो।

ख्रीस्तयाग के दौरान उन्होंने संत योहन रचित सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया। जहाँ येसु कहते हैं "पुनरूत्थान और जीवन मैं हूँ। जो मुझपर विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा। और जो मुझमें विश्वास करते हुए जीता है वह कभी नहीं मरेगा।" (यो.11,25-26)

संत पापा ने कहा कि इन शब्दों के प्रकाश ने लाजरूस की मृत्यु से शोक में डूबे लोगों का अंधकार दूर किया। मार्था ने उन शब्दों को स्वीकार किया एवं अपना विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, "हाँ, प्रभु मैं दृढ़ विश्वास करती हूँ कि आप वे मसीह, ईश्वर के पुत्र हैं जो संसार में आने वाले हैं।" (पद. 27)

पुनरूत्थान और जीवन

येसु के ये शब्द मार्था को दूर भविष्य से वर्तमान पर आशा करने के लिए प्रेरित करते हैं। पुनरूत्थान हमारे ही करीब है, यह येसु ख्रीस्त में निहित है। आज येसु के ये शब्द हमें भी चुनौती देते हैं। हम पुनरूत्थान में विश्वास करने के लिए बुलाये गये हैं दूर की वस्तु की तरह नहीं बल्कि वर्तमान में उपस्थित एवं हमारे जीवन में रहस्यात्मक रूप से क्रियाशील वस्तु की तरह। फिर भी, पुनरूत्थान में हमारा विश्वास मौत के सामने मानवीय घबराहट को न तो अनदेखा करती और न ही ढंकने की कोशिश करती है। स्वयं येसु ने लाजरूस की बहनों एवं उनके आसपास उपस्थित लोगों को रोते देखकर अपनी भावुकता को नहीं छिपाया और वे रो पड़े।(यो. 11:35) क्योंकि पाप के अलावा वे सब कुछ में हमारे समान थे। उन्होंने भी दुःख, पीड़ा का अनुभव किया एवं प्रियजन के खो जाने पर आँसू बहाया। इसके बावजूद, इस प्रकाशना की सच्चाई के प्रकाश को धूमिल नहीं किया कि लाजरूस का जी उठना एक महान चिन्ह था।

विश्वास की आँख

आज प्रभु पुनः हमसे कह रहे हैं, "पुनरूत्थान और जीवन मैं हूँ।" (25) वे हम विश्वास करने और पुरूत्थान के प्रकाश में प्रवेश करने का आह्वान दे रहे हैं। यदि हम इस पर विश्वास करेंगे तो हमारे सोचने का तरीका एवं चीजों को देखने का नजरिया बदल जायेगा। विश्वास की आँखें दृश्यमान वस्तुओं में अदृश्यमान वास्तविकताओं को देख पाती हैं। (इब्रा. 11,27)  प्रज्ञा ग्रंथ के अनुसार विश्वास की नजरों में मृत्यु को दुर्भाग्य के रूप में नहीं देखा जाता है बल्कि प्रभु की कृपा के रूप में देखा जाता है। "लोग ज्ञानी की मृत्यु देखेंगे किन्तु वे उनके विषय में प्रभु का प्रयोजन नहीं समझेंगे और यह भी नहीं कि ईश्वर ने उन्हें क्यों सुरक्षित रखा।" (4:17)

मृत विश्वासियों के लिए प्रार्थना

संत पापा ने कहा कि जब हम उन कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं जो इसी साल प्रभु में सो गये हैं, हम प्रभु से प्रार्थना करें कि वे हमारे उस अपवित्र शोक को दूर कर दे जिसमें हम सोचते हैं कि मृत्यु सब कुछ का अंत हैं। हम प्रभु पर पूर्ण भरोसा रख सकें जो कहते हैं, पुनरूत्थान और जीवन मैं हूँ। जो मुझपर विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा। और जो मुझमें विश्वास करते हुए जीता है वह कभी नहीं मरेगा। (यो.11,25-26)

जीवन का सही दृष्टिकोण

इन शब्दों को विश्वास के साथ स्वीकार करना हमें मृत भाई बहनों के लिए प्रार्थना करने हेतु प्रेरित करता है। यह हमें उनके जीवन के सच्चे दर्शन, उनके कार्यों के अर्थ और मूल्य, उनकी क्षमता एवं समर्पण, उनके उदार और निःस्वार्थ प्रेम को समझने में मदद देता है। मृत विश्वासियों के लिए प्रार्थना जो अब प्रभु के सात जीते हैं हमारे लिए भी लाभदायक है क्योंकि यह पृथ्वी में हमारी यात्रा में मददगार है। यह हमारे लिए ईश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए हमारी कोशिश के अर्थ को प्रकट करता है। हमारे हृदय को सच्ची स्वतंत्रता के लिए खोल देता एवं निरंतर अनन्त धन की खोज करने के लिए प्रेरित करता है।

मृतकों के उदाहरणों की याद

संत पापा ने सभी मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हुए एवं उनके लिए प्रार्थना करते हुए कामना की कि हम भी उदाहरणों पर चल सकें। प्रभु अपनी प्रज्ञा हमें प्रदान करें विशेषकर इस संकट की घड़ी में। ऐसे समय में जब यात्रा अधिक कठिन हो जाती है। वे हमें न छोड़ दें बल्कि हमारे बीच रहें, अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार जिन्होंने कहा है, "मैं संसार के अंत तक सदा तुम्हारे साथ हूँ।" मती. 28:20).

05 November 2020, 15:31