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 कोक्स बाजार में रोहिंग्या शरणार्थी शिविर कोक्स बाजार में रोहिंग्या शरणार्थी शिविर   (AFP or licensors)

बंगलादेश में रोहिंग्याई शरणार्थियों के लिए काथलिक कारितास की पहल

कारितास, जीआरएस और सीआरएस ने एक नई योजना में, एक साथ हजारों रोहिंग्याई लोगों की मदद करने का निर्णय लिया है जो म्यानमार में अपने घर रखाईन से बंगलादेश भाग गये हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

बंगलादेश, मंगलवार, 24 नवम्बर 2020 (एशियान्यूज)- बहुउद्देशीय किशोर केंद्र, कारितास बंगलादेश, जेस्विट शरणार्थी सेवा (जीआरएस) और अमरीका के काथलिक राहत सेवा (सीआरएस) द्वारा संचालित बंगलादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए है।

उका न्यूज के अनुसार इसका उद्देश्य है बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास के लिए सहायता देना, परामर्श देना और किशोर लोगों को अपनी क्षमताओं के विकास में मदद करना, गर्भवती माताओं, शिशुओं एवं विशेष आवश्यकताओं के साथ बच्चों की देखभाल करना।  

योजना का उद्घाटन कोक्स बाजार में 15 नवम्बर को आयोजित एक बैठक के बाद किया गया जो 2021 तक चलेगा और 12-18 साल के किशोरों के लिए होगा। एक अधिकारी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर योजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।   

कारितास आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्यक्रम (ई आर पी) के कर्मचारी, जीआरएस और सीआरएस के प्रतिनिधि, राज्य शरणार्थी राहत के अधिकारी और प्रत्यावर्तन आयोग ने 2020 में काम के मूल्यांकन में भाग लिया और 2021 के लिए एक रणनीतिक योजना तैयार की।

बहुउद्देशीय किशोर केंद्र का कार्य आसान नहीं है। शरणार्थी शिविर में अत्याधिक भीड़ के बीच, सफाई की समस्या एवं सामाजिक दूरी बनाकर रखना एक बड़ी समस्या है।  

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, बांग्लादेश में सोमवार को 28 मौतें दर्ज की गईं, इसके साथ ही यहाँ कुल 6,419 लोगों की मौत हुई हैं। सोमवार को वायरस के 2,419 नए मामलों की पुष्टि की गई, जिससे संक्रमित लोगों की कुल संख्या 449,000 से अधिक हो गई है।

रोहिंग्या कौन हैं

रोहिंग्या बड़े पैमाने पर मुस्लिम जातीय समूह है जो बंगलादेश की सीमा पर पश्चमी म्यानमार के रखाईन क्षेत्र में रहते हैं। बौद्ध बहुल देश म्यानमार रोहिंग्याई लोगों को बंगलादेश से अवैध प्रवासी मानता है यद्यपि वे कई पीढ़ियों से उस देश में रह रहे हैं।

1982 में सरकार के सैन्य शासन द्वारा पारित राष्ट्रीयता कानून के तहत वे नागरिकता से वंचित हैं तथा उन्हें आंदोलन की स्वतंत्रता और अन्य बुनियादी अधिकार से वंचित रखा गया है। रोहिंग्या 2012 में अंतर-जातीय हिंसा के शिकार हुए जिसमें सैंकड़ों लोगों की जानें गई तथा करीब 1,40,000 लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था जहाँ वे अब भी रह रहे हैं।  

2017 में म्यानमार में क्रूर कारर्वाई के कारण 7,00,000 से अधिक मुस्लिम अपने पड़ोसी देश बंगलादेश भाग गये थे जिससे बंगलादेश में शरणार्थियों की संख्या 1.3 मिलियन हो गई थी। उनमें से अधिकांश लोग बंगलादेश के कॉक्सबाजार के 30 शिविरों में शरण लिये हुए हैं।

कारितास

कारितास 2017 से ही रोहिंग्या शरणार्थी शिवरों में सक्रिय है। विश्वभर के काथलिक एजेंसियों की मदद से कारितास 1,46,819 शरणार्थियों तक पहुँची है, साथ ही 8,641 मेजबान समुदाय के सदस्य भोजन, गैर-खाद्य पदार्थों, पानी और स्वच्छता द्वारा सहायता कर रहे हैं।  

कारितास इआरपी के प्रमुख अधिकारी इमानुएल चेयन बिस्वास ने कहा कि सुरक्षा के लिए जेआरएस अनुदान, खासकर सुरक्षा विभाग के लिए था, जबकि सीआरएस आपदा जोखिम कम करने, आश्रय और सुरक्षा के लिए सहायता प्रदान करता है। इसके साथ ही सीआरएस तकनीकी एवं परामर्शात्मक सहयोग प्रदान करता है।  

उन्होंने कहा कि जेआरएस और सीआरएस मानसिक स्वास्थ्य और कौशल विकास के लिए वित्त पोषण और सहायता प्रदान करते हैं। ये दोनों एजेंसी कारितास बंगलादेश को तकनीकी सहायता एवं परामर्श भी देते हैं।

165 देशों के काथलिक राहत और विकास एजेंसियों के वैश्विक परिसंघ कारितास इंटरनेशनल के अध्यक्ष फिलिपीन्स के कार्डिनल लुइस अंतोनियो ताग्ले ने दिसंबर 2018 और जुलाई 2019 में कॉक्स बाजार के कुछ शरणार्थी शिविरों का दौरा किया था।

जेआरएस

जेआरएस, जिसने 14 नवंबर को अपनी स्थापना की  40वीं वर्षगांठ मनाई, अप्रैल 2018 में रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच काम करना शुरू किया है।

बंगलादेश में जेआरएस के प्रतिनिधि जेस्विट फादर जेरी गोम्स ने उका न्यूज को बतलाया कि जेआरएस 11 बाल मित्रता केंद्रों का संचालन करता है जिसमें मौलिक शिक्षा के साथ करीब 4000 लाभार्थी हैं। विगत तीन सालों में जेआरएस ने इसके लिए 2.5 मिलियन अमरीकी डॉलर प्रदान किया है।

उन्होंने बतलाया कि जेआरएस बंगलादेश में कारितास के माध्यम से कार्य कर रहा है एवं सरकार के नियमों एवं नीतियों का पालन करता है। उन्होंने गौर किया कि कई सरकारों ने इस पर रोक लगाई, खासकर, शिक्षा के क्षेत्र में।

फादर गोम्स ने कहा कि "यदि बंगलादेश शरणार्थी बच्चों को औपचारिक शिक्षा देने की अनुमति देती है तो हम खुशी से उनकी मदद करेंगे।"

 

24 November 2020, 15:33