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Vatican News
स्कॉटलैंड का संत ब्रिजिट गिरजाघर स्कॉटलैंड का संत ब्रिजिट गिरजाघर   (ANSA)

गिरजाघरों के द्वार इस समय अधिक खुले होने की जरूरत

स्कॉटलैंड के धर्माध्यक्षों ने कोविड-19 महामारी के बीच पूजा स्थलों की आवश्यकता पर जोर दिया है जिसके अभाव में अवसाद और आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

स्कॉटलैंड, बृहस्पतिवार, 8 अक्टूबर 2020 (वीएन)- स्कॉटलैंड के धर्माध्यक्षों ने देश के 500 पल्लियों में पत्र भेजकर काथलिक समुदाय से आग्रह किया है कि वे कोविद -19 के प्रसार को रोकने के लिए सावधानीपूर्वक सुरक्षा उपायों का पालन करें।

पुरोहितों, पल्लीवासियों एवं स्वयंसेवकों के सहयोग और कार्यों के लिए उनकी सराहना करते हुए धर्माध्यक्षों ने गौर किया है कि स्कॉटलैंड "नाजुक विन्दु" पर हैं। उन्होंने कोविड-19 संक्रमण की दर की ओर इशारा किया है जो पूरे स्कॉटलैंड में बढ़ रहा है एवं लोगों की चिंता भी बढ़ रही है।

चुनौतिपूर्ण समय

"इस विकट समय में" धर्माध्यक्षों ने लोगों से कहा है कि वे वायरस के प्रसार की जोखिम को कम करने का प्रयास जारी रखें तथा यह सुनिश्चित करे कि हमारे पल्लियों एवं समुदायों में सभी संक्रमण नियंत्रण उपायों का पालन किया जा रहा है।"

सरकार के देशानिर्देश के अनुसार लोग सामुदायिक प्रार्थनाओं में भाग ले सकते हैं बशर्ते कि वे उन स्थानों में सुरक्षा उपायों का पालन करें। विवाह और अंतिम संस्कार भी किये जा सकते हैं किन्तु उनमें भाग लेने वालों की संख्या सीमित होनी चाहिए।

पत्र में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि महामारी और आपदा के लम्बे अनुभव से, कलीसिया जानती है कि प्रार्थना और विश्वास की कमी कैसे राष्ट्रों की आध्यात्मिक भलाई और हमारी सार्वजनिक पूजा को नुकसान पहुंचा सकती है जबकि राष्ट्रीय परेशानी के समय ईश्वर अपनी दिव्य सहायता प्रदान करते हैं।

धर्माध्यक्षों ने रेखांकित किया है कि पहले से कहीं अधिक इस समय, हमारे गिरजाघरों के द्वार को खुला रहने की जरूरत है और आज हमारी कड़ी मेहनत हमारे लिए एवं हमारे देश के लिए आशीर्वाद सुनिश्चित करेगी। 

महामारी का प्रभाव

पिछले कुछ महीनों में महामारी ने लोगों के जीवन में जो प्रभाव डाला है उस पर ध्यान देते हुए स्कॉटलैंड के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उप-अध्यक्ष, धर्माध्यक्ष जॉन कीनन ने गौर किया है कि अवसाद, निराशा और आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा है कि जीवन के सभी पहलुओं में सामान्य स्थिति न रहना बेचैनी और एकाकीपन की भावना को बढ़ा दिया है जिसके कारण आध्यात्मिक सांत्वना की आवश्यकता पहले से कही अधिक हो गई है।

धर्माध्यक्ष कीनन ने जोर दिया है कि विपत्ति के समय ही हमें सबसे अधिक "सार्वजनिक पूजा द्वारा आध्यात्मिक सांत्वना प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, जिसकी आवश्यकता पहले की अपेक्षा इस समय अधिक है, हमारे गिरजाघरों के द्वारों को खोला जाना चाहिए ताकि सुरक्षित रूप से पूजा को जारी रखा जा सके।"     

08 October 2020, 15:51