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अपने नये विश्व पत्र पर हस्ताक्षर करते संत पापा फ्राँसिस अपने नये विश्व पत्र पर हस्ताक्षर करते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

ऑस्ट्रेलिया व अमरीका धर्माध्यक्षों द्वारा नये विश्व पत्र का स्वागत

संत पापा फ्राँसिस के नये विश्व पत्र फ्रातेल्ली तूत्ती के प्रकाशन पर अमरीका एवं ऑस्ट्रेलिया के धर्माध्यक्षों ने विश्व पत्र की महत्वपूर्ण अपील, एकात्मता एवं मानव भाईचारा पर प्रकाश डाला है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

यूएस, मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020 (वीएन)- संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 4 अक्टूबर को अपने तीसरे विश्व पत्र "फ्रातेल्ली तूत्ती" (सभी भाई एवं बहनें) को प्रकाशित किया जो भाईचारा एवं सामाजिक मित्रता पर आधारित है।

विश्व पत्र का स्वागत करते हुए ऑस्ट्रेलियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष मार्क कोलेरिज ने रविवार को एक बयान में कहा कि एक विश्व जो दिशानिर्देश के बिना वैश्विक महामारी के परे देख रहा है, वह उसे नये विश्व पत्र में प्राप्त कर सकता है जो न केवल विश्वासियों के लिए बल्कि समस्त मानव परिवार के लिए है।

उन्होंने कहा, "यह हरेक व्यक्ति की प्रतिष्ठा का दर्शन है जहाँ से, भाईचारा एवं संवाद की नई संस्कृति के निर्माण हेतु निमंत्रण प्रवाहित होता है।"  

सभी भाई और बहनें

महाधर्माध्यक्ष कोलेरिज इशारा करते हैं कि संत पापा का नया विश्व पत्र 2015 में प्रकाशित विश्व पत्र "लौदातो सी" से भिन्न है जिसमें उन्होंने आमघर पृथ्वी की देखभाल पर चर्चा की है। "फ्रातेल्ली तूत्ती" में उन्होंने एक-दूसरे एवं परिवार की देखभाल करने की बात कही है जो एक ही आमघर में निवास करते हैं।     

उन्होंने गौर किया है कि संत पापा अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिष्ठा को स्वीकार करने के द्वारा हम भाईचारा के लिए एक सार्वभौमिक आकांक्षा के पुनर्जन्म में योगदान कर सकते हैं। संत पापा सभी लोगों को "एक ही मानव परिवार" के सदस्य के रूप में कल्पना करते हैं, हरेक व्यक्ति अपनी धरोहर, अपनी आस्था एवं धारणा को अपनी आवाज सभी भाइयों एवं बहनों के रूप में ला सकता है।"

एकात्मता की आवश्यकता

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि संत पापा ने विश्व पत्र पर काम करना कोविड-19 महामारी से पहले शुरू की थी जो एकात्मता की अधिक आवश्यकता के महत्व पर प्रकाश डालता है जैसा कि इसने कई लोगों में, समुदाय में परस्पर निर्भरता की भावना एवं मानव प्राणी की अपने आपमें दुर्बलता की भावना को उजागर किया है।  

संत पापा के शब्दों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य संकट के गुजरने के बाद हमारी सबसे खराब प्रतिक्रिया "बेताब उपभोक्तावाद और नए रूपों के आत्म-संरक्षण" में उतरना होगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान विभाजन एवं संघर्ष कहीं जाने के रास्ते नहीं हैं और उन पर रोक लगाये जाने के बाद हम "उनके" और "वे" जैसे शब्दों को नहीं बल्कि सिर्फ "हमारा" को सोच सकते हैं।

एकता, विभाजन नहीं

महाधर्माध्यक्ष कोलेरिज ने उस विचारधारा के खिलाफ संत पापा के आह्वान को रेखांकित किया है जो जोड़ने के बदले बांटने की कोशिश करता है तथा आर्थिक प्रणाली जो व्यक्ति और ग्रह के ऊपर लाभ को प्राथमिकता देता है, खासकर, उन्होंने उन लोगों की ओर इशारा किया है जिनका जिक्र संत पापा अक्सर किया करते हैं - महिला, बुजूर्ग, अजन्मे शिशु, आदिवासी और आप्रवासी जिनको कम महत्व दिया जाता है एवं उनके साथ असमानता का वर्ताव किया जाता है। महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि ऐसे लोगों को ऑस्ट्रेलिया में भी हाशिये पर छोड़ दिया जाता है। अतः उन्होंने चेतावनी दे कि संत पापा के संदेश को दुनिया के दूसरे हिस्से के लोगों के लिए है, न सोचा जाए।    

महाधर्माध्यक्ष ने कहा है कि विश्व पत्र में संत पापा फ्राँसिस मानव अंतरसंबंध का बड़ा किन्तु सरल दर्शन प्रदान करते हैं क्योंकि हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं, जबकि उन रास्तों के बारे हम शायद ही कल्पना करते हैं।

अमरीकी धर्माध्यक्ष

ऑस्ट्रेलिया के धर्माध्यक्षों की तरह अमरीकी धर्माध्यक्षों ने भी संत पापा फ्राँसिस के नये विश्व पत्र को स्वीकार किया है। यूएस काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष जोश एच. गोम्स ने कहा, "अमरीका की काथलिक कलीसिया की ओर से, मैं मानव भाईचारा पर संत पापा के नये विश्व पत्र का स्वागत करता हूँ। इससे पहले लौदातो सी के समान ही फ्रातेल्ली तूत्ती, सामाजिक धर्मशिक्षा की कलीसिया की समृद्ध परम्परा में एक महत्वपूर्ण योगदान है।"

उन्होंने कहा कि विश्व पत्र में संत पापा की शिक्षा प्रगाढ़ और सुन्दर है जो दिखलाता है कि ईश्वर ने सभी मानव जाति की समान पवित्रता, प्रतिष्ठा, समान अधिकार एवं कर्तव्य के साथ सृष्टि की है। ईश्वर ने हमें बुलाया है कि हम एक ही मानव परिवार का निर्माण करें जिसमें हम भाई और बहन के रूप में जी सकें।

कलीसिया और समाज के लिए लागू

महाधर्माध्यक्ष गोम्स ने इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि संत पापा का संदेश हमें मानवता के लिए ईश्वर की योजना का स्मरण दिलाता है जिसका हमारे जीवन के हर पहलू के लिए निहितार्थ है, जिसमें हमारे व्यक्तिगत संबंध शामिल हैं और हम अपने समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को कैसे व्यवस्थित करते हैं।

इस प्रकार, आज दुनिया में परिस्थितियों का विश्लेषण करने के लिए, संत पापा ने  "राजनीति और राजनीतिक एवं आर्थिक संस्थानों के नैतिक नवीकरण के लिए एक शक्तिशाली और तत्काल दर्शन" प्रदान किया है, जो हमें एक आम भविष्य का निर्माण करने के लिए कहता है जो मानव व्यक्ति की अच्छाई को बचाता है।

उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया है कि कलीसिया के लिए, संत पापा ने हमें चुनौती दिया है कि हम व्यक्तिवाद से ऊपर उठें और प्रत्येक व्यक्ति में ख्रीस्त को देखते हुए प्रेम से पड़ोसी की सेवा करें और न्याय, करुणा एवं आपसी सहानुभूति के समाज की खोज करें।

अंत में, महाधर्माध्यक्ष ने प्रार्थना की है कि काथलिक विश्वासी और सभी भली इच्छा रखने वाले संत पापा के शब्दों पर चिंतन करें और मानव परिवार की एकता की खोज की नई प्रतिबद्धता में प्रवेश करें।   

06 October 2020, 15:26