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लेसबोस में जला हुआ मोरिया शरणार्थी कैंप लेसबोस में जला हुआ मोरिया शरणार्थी कैंप 

आंतरिक रूप से विस्थापितों को बढ़ावा देने हेतु शामिल करें

106वें विश्व प्रवासी और शरणार्थी दिवस 27 सितंबर से पहले फादर नोएल विस्थापित व्यक्ति के रूप में बचपन में ही सब कुछ खोने के अपने अनुभव को साझा करते हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 09 सितम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की प्रेरितिक देखभाल के लिए, 27 सितंबर को 106वें विश्व प्रवासी और शरणार्थी दिवस के रुप में निर्धारित किया है।

वार्षिक उत्सव के लिए संत पापा के संदेश की विषय वस्तु है, "पलायन के लिए येसु मसीह की तरह मजबूर।" उनका चिंतन येसु के अनुभव से प्रेरित है जिसने बचपन में अपने माता-पिता के साथ विस्थापित शरणार्थियों का जीवन व्यतीत किया था।

संत पापा ने कहा, "कभी-कभी दूसरों की सेवा करने के हमारे उत्साह में, हम उनके पास मौजूद हुनर को देखने में विफल होते हैं।" "यदि हम वास्तव में उन लोगों को बढ़ावा देना चाहते हैं जिन्हें हम सहायता प्रदान करते हैं, तो हमें उन्हें अपनी उन्नति हेतु सक्रिय भागीदार बनने में मदद देना चाहिए।"

नए सिरे से शुरू करना

वाटिकन के प्रवासी और शरणार्थी विभाग ने इस साल के समारोहों से पहले वीडियो की श्रृंखलाओं में पांचवीं वीडियो जारी की है। इस नये वीडियो की शीर्षक है, "बढ़ावा देने के लिए शामिल करें।"

वीडियो में, फादर नोएल ने एक बच्चे के रूप में आंतरिक रूप से विस्थापित (आईडीपी) होने और अपना सब कुछ खोने के अनुभव को साझा किया है।

वे बताते हैं, "एक आईडीपी होने का मतलब है कि मैंने सब कुछ खो दिया," “हमें सब कुध नये तौर से ही शुरु करना था। और जब मैं ’सब कुछ’ कहता हूँ, तो इसका मतलब है कि रिश्ते, हमारी आजीविका, स्कूल, दोस्ती… सब कुछ शुरु से प्रारंभ करना था।

दरिद्रता

फादर नोएल याद करते हैं कि गरीबी के कारण उसका जीवन अन्य बच्चों के समान नहीं था। जब अन्य बच्चे खेलते थे, तब उसे एक गोल्फ क्लब में काम करना पड़ता था और गोल्फ बैग को ढोना पड़ता था तभी जाकर उसे रोजी रोटी मिलती थी।

फादर नोएल विस्थापित व्यक्ति के रूप में जीवन के कठिन अनुभव की याद करते हुए कहते है कि यह भी उनके बुलाहटीय जीवन का एक हिस्सा था। गरीबी के कारण उसकी मां उसे घर से स्कूल भेजने में असमर्थ थी, उसे एक काथलिक गिरजाघर के पास ही एक बोर्डिंग हाउस में रखा गया। यहीं उसे आध्यत्मिक जीवन को विकसित करने का वातावरण मिला और उसने पुरोहिताई जीवन का चुनाव किया।

 अनुभव से सीखना

अपने पुरोहिताभिषेक के बाद, फादर नोएल विस्थापितों के लिए काम करते है वे दूसरों की तुलना में विस्थापितों की स्थिति को बेहतर ढंग से समझते हैं। उन्हें समझने के लिए खुद आईडीपी होने का अनुभव सक्षम बनाता है।

फादर नोएल ने कहा,"आईडीपी होने के नाते, वास्तव में उन्हें किसी की स्वीकृति और सहारे की ज़रूरत होती है, विशेष रूप से कलीसिया के नेताओं से।" जब आईडीपी यात्रा करते हैं और कलीसिया के नेता उनके साथ होते हैं, तो वे "खुश होते हैं" और "वे सुरक्षित महसूस करते हैं।"

09 September 2020, 14:54