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संत पापा फ्राँसिस एवं प्राधिधर्माध्यक्ष बर्थोलोमियो प्रथम संत पापा फ्राँसिस एवं प्राधिधर्माध्यक्ष बर्थोलोमियो प्रथम 

कलीसिया का जीवन एक प्रयुक्त पारिस्थितिकी है, प्राधिधर्माध्यक्ष

मंगलवार को प्रकाशित संदेश में कुस्तुनतुनिया के प्राधिधर्माध्यक्ष बर्थोलोमियो प्रथम ने कहा है कि "पारिस्थितिक अर्थव्यवस्था की दिशा में परिवर्तन एक अटूट आवश्यकता है।"

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 1 सितम्बर 2020 (वीएन)- कुस्तुनतुनिया के प्राधिधर्माध्यक्ष बर्थोलोमियो प्रथम ने ऑर्थोडोक्स धर्माध्यक्षों एवं विश्वासियों के लिए एक संदेश जारी किया है तथा उन्हें पर्यावरण की रक्षा करने हेतु नवीकृत प्रतिबद्धता के लिए निमंत्रण दिया है।

उनका यह संदेश 1 सितम्बर को सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर जारी किया गया है जब बिजेनटाईन कलीसियाई वर्ष की शुरूआत के रूप में मनाया जाता है। प्रार्थना दिवस के रूप में इस दिन की घोषणा प्राधिधर्माध्यक्ष के पूर्वाधिकारी दिमित्रियोस ने सन् 1989 में की गई थी और बाद में इसे अन्य ऑर्थोडोक्स कलीसियाओं के द्वारा भी अपनाया गया। 2015 को संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तीय एकता के चिन्ह स्वरूप घोषणा की कि काथलिक कलीसिया भी 1 सितम्बर को प्रार्थना दिवस के रूप में मनायेगी।

अपने संदेश में प्राधिधर्माध्यक्ष ने कहा है, "यह एक आम धारणा है कि हमारे समय में, प्राकृतिक पर्यावरण पर खतरा जितना बढ़ा है मानव इतिहास में उतना पहले कभी नहीं था।" आधुनिक तरक्की ने बहुत अधिक लाभ प्रदान किया है किन्तु यह विनाश भी कर सकता है यदि इसका गलत प्रयोग किया जाए।   

प्राधिधर्माध्यक्ष ने कहा है कि सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा करना और प्राकृतिक पर्यावरण की अखंडता बनाये रखना, पृथ्वी पर जीवनयापन करनेवाले सभी निवासियों की आम जिम्मेदारी है। यद्यपि कई लोगों एवं समुदायों ने पर्यावरण की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दिखायी है तथापि विभिन्न राष्ट्र एवं आर्थिक एजेंट, पर्यावरण के हित के लिए निर्णय नहीं कर पा रहे हैं।  

उन्होंने कहा, "कब तक प्रकृति, फलहीन बातचीत एवं परामर्श झेलती रहेगी, साथ ही, इसके संरक्षण के लिए निर्णायक कार्रवाई करने में देरी सहती रहेगी? "

पर्यावरण संकट के लिए मानव का दोष

कोरोनोवायरस आपातकाल के दौरान लॉकडाउन और अन्य उपायों के परिणामस्वरूप होने वाले प्रदूषण में कमी “समकालीन पारिस्थितिक संकट के मानवजनित प्रकृति” को प्रदर्शित करती है अतः पर्यावरण के प्रति बदलाव लाने की जरूरत है।

पर्यावरण के लिए वास्तविक चिंताओं के अनुकूल आर्थिक चिंताएं संतुलित होनी चाहिए: यह समझ से बाहर है कि हम उनके पारिस्थितिक परिणामों को ध्यान में रखे बिना आर्थिक निर्णय लेते हैं।

पर्यावरण की रक्षा के अग्रदूत

प्राधिधर्माध्यक्ष ने हाल के दशकों में पर्यावरण की रक्षा के क्षेत्र में ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता के प्रयासों पर गौर किया। उन्होंने कहा, "यह समर्पण अपने स्वयं के आत्म-चेतना का एक विस्तार है, "न कि केवल" एक नई घटना के लिए संयोगात्मक प्रतिक्रिया।"  

उन्होंने कहा कि ऑर्थोडोक्स कलीसिया की पारिस्थितिक चिंता कलीसिया के स्वभाव का हिस्सा है, कलीसिया का जीवन ही पारिस्थितिकी से जुड़ा है। सृष्टि की देखभाल करना, ईश्वर की महिमा का कार्य है जबकि सृष्टि को नष्ट करना सृष्टिकर्ता के विरूद्ध अपराध है।  

विश्वास ख्रीस्तीय साक्ष्य को बल प्रदान करता

अंततः प्राधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो ने संदेश में कहा है कि पर्यावरण के लिए देखभाल की ऑर्थोडोक्स कलीसिया की परम्परा समकालीन संस्कृति के कुछ पहलुओं के खिलाफ एक रक्षा प्रदान करती है, जो "प्रकृति पर मनुष्य के वर्चस्व" के विचार पर स्थापित है।

पर्यावरणीय संकट की गंभीर चुनौतियों के सामने, मसीह में विश्वास हमें न केवल वर्तमान संस्कृति के साथ समस्याओं को देखने में मदद कर सकता है, बल्कि "समकालीन सभ्यता की संभावनाओं और उम्मीदों" को देखने में भी हमारी मदद कर सकता है।

बार्थोलोमियो ने ऑर्थोडोक्स कलीसिया के युवाओं और महिलाओं का विशेष रूप से आह्वान किया है कि वे वफादार मसीहियों और समकालीन लोगों के रूप में जीने के महत्व को महसूस करें।

01 September 2020, 15:36