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आगजनी के बाद लेस्बोस के मोरिया शिविर का एक हवाई दृश्य,  तस्वीरः 10.09.2020 आगजनी के बाद लेस्बोस के मोरिया शिविर का एक हवाई दृश्य, तस्वीरः 10.09.2020 

मोरिया शिविर की आग में यूरोप की पहचान हुई तहस-नहस, कार्डिनल

ग्रीस के लेस्बोस द्वीप स्थित मोरिया शरणार्थी शिविर में लगी भीषण आग ने हजारों शरणार्थियों और आप्रवासियों को अपनी जीवन रक्षा हेतु पलायन के लिये बाध्य किया है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

लेसबोस, गुरुवार, 10 सितम्बर 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): ग्रीस के लेस्बोस द्वीप स्थित मोरिया शरणार्थी शिविर में लगी भीषण आग ने हजारों शरणार्थियों और आप्रवासियों को अपनी जीवन रक्षा हेतु पलायन के लिये बाध्य किया है।

मोरिया शिविर में आगजनी के उपरान्त यूरोपीय संघ के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ के अध्यक्ष कार्डिनल जाँ क्लाऊड हॉलेरिख ने यूरोप के नीति-निर्माताओं का आह्वान किया है कि वे अपनी ख्रीस्तीय जड़ों का स्मरण कर उपयुक्त कदम उठायें।  

 मोरिया शिविर

मोरिया शिविर में लगभग 13,000 शरणार्थी शरण ले रहे थे, यह संख्या इस शिविर की क्षमता से चार गुना अधिक थी। विशेषज्ञों और राहत कर्मियों ने बहुत समय पहले से मोरिया में तंग और अस्वास्थ्यकर जीवन यापन की स्थिति की आलोचना की है, जहाँ शारीरिक अलगाव और बुनियादी स्वच्छता के उपायों को लागू करना, विशेष रूप से, कोरोना वायरस महामारी के समय में लगभग असम्भव सा है। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं है। हजारों पुरुष, महिलाएं और बच्चे अब बिना आवास के हैं और ग्रीस के अधिकारी उन्हें शरण देने के लिए प्रयासरत हैं।

सन् 2016 में सन्त पापा प्राँसिस ने ग्रीस के लेसबोस स्थित शरणार्थी शिविर की भेंट की थी, जो अब आगज़नी में नष्ट हो गया है।  

वाटिकन रेडियो के साथ बातचीत में यूरोपीय संघ के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ के अध्यक्ष कार्डिनल जाँ क्लाऊड हॉलेरिख ने कहा कि यूरोप की पहचान शिविर में लगी आग की लपटों में तहस-नहस हो गई है। उन्होंने कहा कि बहुत अधिक समय से शरणार्थियों के लिए एक सामान्य यूरोपीय नीति की प्रतीक्षा रही है।

यूरोप के लिए लज्जा का विषय

कार्डिनल हॉलेरिख ने आग को "यूरोप के लिए शर्म" निरूपित किया और कहा कि लेस्बोस में केवल मोरिया शिविर में ही आग नहीं लगी बल्कि, सम्पूर्ण पुराने महाद्वीप पर ठेस लगी है। उन्होंने कहा कि लेस्बोस आये शरणार्थी मदद की तलाश में यूरोप आए थे, किन्तु हम यूरोपीय लोगों ने उन्हें "छोटे से ग्रीक द्वीप पर उनके हाल पर छोड़ दिया।" हमने केवल शब्दों से उनकी मदद का बीड़ा उठाया, किन्तु कर्म से कुछ भी नहीं किया।"

कार्डिनल महोदय ने कहा, "मेरे ख़्याल से यूरोप को शर्म आनी चाहिये, क्योंकि यह आगजनी लोगों के दिल में समाहित निराशा का परिणाम है।" उन्होंने मोरिया शरणार्थी शिविर में अपनी भेंट का स्मरण दिलाया और कहा उस समय लोगों के साथ बातचीत में उन्होंने उनके दिलों गहन निराशा का अनुभव किया था।

इस तरह की मानवीय आपदाओं को रोकने के लिये कार्डिनल होलेरिख ने यह विश्वास व्यक्त किया कि शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के लिए यूरोपीय संघ के नीति निर्माताओं को एक आम नीति के निर्माण की आवश्यकता है।

ईसाई जड़ों को खोजें 

कार्डिनल हॉलेरिख ने कहा कि वे जानते हैं कि यूरोपीय संघ की जर्मन अध्यक्षता इस संबंध में काम कर रही है तथापि, सभी यूरोपीय लोगों को ज़िम्मेदारी लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा "य़दि हम लोगों को उनकी निराशा पर ही छोड़ देते हैं तो हम यूरोप की ईसाई जड़ों का दावा नहीं कर सकते।"  

इटली का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सन्त इजिदियो काथलिक समुदाय द्वारा खोले गये मानवतावादी गलियारों के माध्यम से इटली के अधिकारियों ने विगत वर्षों में मोरिया शिविर के अनेकानेक शरणार्थियों को अपने यहाँ शरण दी है। उन्होंने प्रश्न किया कि बुरी तरह से कोविद-महामारी से प्रभावित इटली यदि शरणार्थियों को शरण दे सकता है तो यूरोप के अन्य धनी देश ऐसा क्यों नहीं कर सकते? 

10 September 2020, 11:16