खोज

Vatican News
दक्षिण-अफ्रीका काथलिक महिला संघ के सदस्य दक्षिण-अफ्रीका काथलिक महिला संघ के सदस्य 

दक्षिण अफ्रीकी काथलिक महिलाएं प्रार्थना में एकजुट

24 अगस्त को आयोजित ऑनलाइन प्रार्थना महिलाओं को लॉकडाउन में अनुभव किए गए एकांत और अलगाव की भावना को दूर करने, एक दूसरे का समर्थन करने और भाईचारे की भावना को मजबूत करने में मदद करने की उम्मीद है।

माग्रेट सुनीता मिंज- वाटिकन सिटी

दक्षिण अफ्रीका, सोमवार 24 अगस्त 2020 (वाटिकन न्यूज) : दक्षिण-अफ्रीका में काथलिक महिलाओं को 24 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका काथलिक महिला संघ (एसएयूसीड्ब्ल्यूओ) द्वारा आयोजित एक दिवसीय ऑनलाइन प्रार्थना में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

यह पहल की थीम है, "मैं साँस नहीं ले सकती।" । लॉकडाउन में अनुभव किया गया एकांत और अलगाव की भावना को पाटने की इच्छा, एक दूसरे का समर्थन करने और वैश्विक पीड़ा के इस समय में भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया है।

वाटिकन न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में, एसएयूसीड्ब्ल्यूओ  के अध्यक्ष श्रीमती फिकिले मोत्सा ने प्रार्थना के दिन के मकसद और दक्षिण अफ्रीकी काथलिक महिलाओं के लिए इसके महत्व को समझाया। सोमवार 24 अगस्त को दोपहर 2:15 से शाम 4:00 बजे (दक्षिण अफ्रीकी समय) तक होने वाले कार्यक्रम में श्रीमती मोत्सा स्वागत भाषण देंगी। इस अवसर पर दक्षिण अफ्रीकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव सिस्टर हर्मेनगिल्ड मकारो अपना संदेश देंगी।

प्रार्थना का दिन

मोत्सा ने बताया कि ऑनलाइन प्रार्थना का पहल कोविद -19 महामारी और इसके साथ आने वाली कठिन क्षणों के बावजूद महिलाओं तक पहुंचने और उन्हें मजबूत करने की इच्छा से हुआ था।

“हम अपनी महिलाओं को मजबूत करना चाहते हैं जो अब डरी हुई हैं। उनमें से कुछ ने अपनी नौकरी खो दी है, घर पर रह रही हैं, उनके पति बिना नौकरी के हैं और संख्या बढ़ रही है। हमने कोविद -19 के कारण अपनी कई महिलाओं को खो दिया है।”

इस प्रार्थना के समय हम "उन्हें आशावान बनायेंगे। हम एक साथ प्रार्थना करते हैं तो यह  भाईचारे की भावना को मजबूत करता है। हालांकि हम शारीरिक रूप से एक-दूसरे के करीब नहीं होंगे, हम एक दूसरे को नहीं देख सकेंगे परंतु हम प्रार्थना में एक साथ हैं तो हम हमारी चिंताओं और अकेलेपन को जीत सकते हैं।"

अगस्त महीना महिलाओं को समर्पित

यह प्रार्थना पहल अगस्त महीने के संदर्भ में आयोजित की जाती है, जो दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं के लिए समर्पित है। देश प्रतिवर्ष 9 अगस्त को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में 9 अगस्त 1956 की याद में मनाता है जब महिलाओं ने पास कानूनों के खिलाफ याचिका करने के लिए एक राष्ट्रीय मार्च में भाग लिया था (कानून के अनुसार काले लोगों को 'सफेद' क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए एक दस्तावेज ले जाना आवश्यक था जो साबित करे कि उन्हें अनुमति दी गई थी।)

श्रीमती मोत्सा ने कहा कि यह महीना देश की महिलाओं के लिए समर्पित है क्योंकि वे “विशेष” हैं और, "आशा की महिलाओं के रूप में, प्यारी महिलाएं एक साथ काम करती हैं," उन्हें "मजबूत होने की आवश्यकता है जिससे कि वे एक दूसरे को मजबूत कर सकें।" खासकर कोविद -19 के इस समय में, "उन्हें हमारे समर्थन की आवश्यकता है, उन्हें हमारे प्यार की आवश्यकता है।"

"मैं साँस नहीं ले सकती"

"मैं सांस नहीं ले सकती" विषय से संबंधित एक सवाल का जवाब देते हुए, मोत्सा ने बताया कि पहल का मई 2020 में जॉर्ज फ्लॉयड की दुखद मौत से उत्पन्न जातीय समानता के विरोध से कोई लेना-देना नहीं है।

श्रीमती मोत्सा ने स्पष्ट किया, "हमने कोविद -19 के मामलों को देखते हुए इस विषय को चुना है: हमारी बहुत सारी महिलाओं ने अपनी नौकरी खो दी है, उनके घर पर उनके पति हैं, उनके बच्चे स्कूल से बाहर हैं।"

"यह हमारे लिए, सिर्फ महिलाओं के लिए पूरे परिवार का भार उठाना बहुत अधिक है। हम सांस नहीं ले सकते!” इसलिए, यह विषय कोविद -19 महामारी के साथ-साथ अन्य लिंग-संबंधी मुद्दों से उपजी मौतों और अन्य कठिनाइयों से अभिभूत होने की बढ़ती भावना को संदर्भित करता है।

उसने कहा, "हम ईश्वर से सिर्फ हमारे साथ रहने, हमें कठिनाईयों का सामना करने हेतु बल देने की गुहार करना चाहते हैं। इस महामारी ने अनेकों की जानें ले ली है।" दक्षिण अफ्रीका कोरोना वायरस संकट से विशेष रूप से पीड़ित है। शुक्रवार तक, इसमें 90,000 से अधिक सक्रिय मामले दर्ज किए गए और वर्तमान में यह दुनिया का पांचवा सबसे अधिक प्रभावित देश है।

24 August 2020, 13:31