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अखिल भारतीय काथलिक यूनियन का लोगो अखिल भारतीय काथलिक यूनियन का लोगो 

गरीबों को याद रखें, महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स

अखिल भारतीय काथलिक यूनियन (एआइसीयू) की बैठक में कहा गया कि महामारी के दौरान गरीब लोगों को और भी अधिक हाशिए पर रखा गया है।

माग्रेट सुनीता मिंज- वाटिकन सिटी

मुंबई, मंगलवार 18 अगस्त 2020 (वाटिकन न्यूज) : भारतीय धर्माध्यक्षों और देश के सबसे पुराने लोकधर्मी काथलिक संगठन ने सभी काथलिकों से गरीबों के साथ एकजुटता से खड़े होने का आग्रह किया है, जिन्हें कोविद -19 महामारी के दौरान और भी अधिक हाशिए पर रखा गया है।

जैसा कि राष्ट्र अभी भी सामाजिक समारोहों को प्रतिबंधित करने के लिए संघीय सरकार के दिशानिर्देशों का पालन कर रहा है, अखिल भारतीय काथलिक संघ (एआईसीयू) ने एक वेबिनार के माध्यम से अपनी वार्षिक आम बैठक आयोजित की।

गरीबों की दुर्दशा

इस बैठक का उद्घाटन 16 अगस्त को मुंबई में काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआइ) के महासचिव वसई के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स मचाडो ने किया था। महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स ने कहा,“हमें गरीबों को बिना किसी अधिकार और समाज के लिए एक बाधा या महत्वहीन व्यक्ति के रुप में नहीं मानना चाहिए। यह चिंता का विषय है और हमें उनकी दुर्दशा को समझना चाहिए और उनके साथ समान व्यवहार करना चाहिए।”

"वैश्वीकरण के कारण, लाखों गरीब लोगों को बेकार वस्तु के रूप में माना जाता है और आर्थिक प्रणाली द्वारा उनका उपयोग कर बाद में फेंक दिया जाता है।"

भारतीय काथलिकःहमारी पहचान

महाधर्माध्यक्ष मचाडो ने कहा, “एक भारतीय नागरिक के रुप में सभी भारतीयों की गरिमा बराबर हैं और काथलिक के रूप में, ईश्वर के समक्ष दुनिया के सभी लोग गरिमा में समान हैं। ”

“हम भारतीय हैं और एक ही समय में ख्रीस्तीय हैं। दोनों को न तो अलग किया जा सकता है और न ही उनकी पहचान की जा सकती है। हम दोनों के प्रति निष्ठा रखते हैं क्योंकि हमारी पहचान ‘भारतीय काथलिक’ होना है।”

प्रसंग

कलीसिया ने स्पष्ट रूप से अन्य धर्मों के लोगों के साथ बातचीत करने की अपनी इच्छा प्रकट की है।  एआईसीयू के अध्यक्ष लान्सी डी'कुन्हा ने 18 अगस्त को कहा कि बैठक के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें ईसाई उत्पीड़न, भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) और कोविद -19 लॉकडाउन की आड़ में नागरिक अधिकारों का क्षरण शामिल थे।

भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( एनईपी) की आलोचना सीबीसीआई  और एआईसीयू दोनों ने की है। एआईसीयू ने एनईपी पर निरंतर परामर्श की मांग की है और आश्वासन दिया है कि यह राज्यों या धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करेगा और सार्वभौमिक शिक्षा के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करेगा।

एआईसीयू के अध्यक्ष ने कहा कि काथलिक कलीसिया धार्मिक कट्टरपंथियों से बड़े खतरों का सामना कर रही है। अन्य मुद्दे पर्यावरण कानूनों में बदलाव और महामारी से लड़ने के लिए सीबीसीआई और एआईसीयू की एकजुट प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। "हम अन्य ईसाई संप्रदायों के साथ ही सभ्य समाज और सभी धर्मों के समान विचारधारा वाले लोगों के साथ सहयोग करने की जरूरत है।"

अखिल भारतीय काथलिक यूनियन, भारतीय  काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त लोकधर्मियों का संगठन है, जिसे 1919 में दक्षिण भारत में मद्रास में स्थापित किया गया था, जिसे अब चेन्नई कहा जाता है। यह भारत में लगभग 16 मिलियन काथलिकों का प्रतिनिधित्व करता है।

19 August 2020, 14:34