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अपदूतग्रस्त को बाहर निकालते प्रभु येसु ख्रीस्त अपदूतग्रस्त को बाहर निकालते प्रभु येसु ख्रीस्त   (©ruskpp - stock.adobe.com)

अपदूतग्रस्त चंगाई आनंद, प्रकाश और शांति की प्रेरिताई, निर्देशिका

वाटिकन स्थित याजकवर्ग सम्बन्धी परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के सौजन्य से काथलिक अपदूतग्रस्त निवारकों के लिये प्रकाशित नवीन निर्देशिका के अनुसार, अपदूतग्रस्त चंगाई अंधकार में डूबा हुआ कोई अस्पष्ट अभ्यास नहीं है, अपितु यह आनंद, प्रकाश और शांति की प्रेरिताई है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

रोम, शुक्रवार, 31 जुलाई 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित याजकवर्ग सम्बन्धी परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के सौजन्य से काथलिक अपदूतग्रस्त निवारकों के लिये प्रकाशित नवीन निर्देशिका के अनुसार, अपदूतग्रस्त चंगाई अंधकार में डूबा हुआ कोई अस्पष्ट अभ्यास नहीं है, अपितु यह आनंद, प्रकाश और शांति की प्रेरिताई है।

अपदूतग्रस्त निवारकों के अन्तरराष्ट्रीय संगठन द्वारा नवीन निर्देशिका तैयार की गई है जिसमें विश्वास एवं धर्मसिद्धान्त सम्बन्धी तथा दिव्यभक्ति सम्बन्धी धर्मसंघों का भी योगदान रहा है। निर्देशिका मई माह में इताली भाषा में प्रकाशित हो चुकी है तथा जल्द ही यह अँग्रेज़ी भाषा में भी प्रकाशित की जायेगी।

यथार्थ विश्वास से प्रेरित चंगाई

निर्देशिका के प्रक्कथन में, अपदूतग्रस्त निवारकों के अन्तरराष्ट्रीय संगठन के अध्यक्ष, फादर फ्राँन्चेसको बामोन्ते ने लिखा, "जब वास्तविक शैतानी आसक्तियों की स्थितियों में तथा कलीसिया द्वारा स्थापित मानदंडों के अनुसार यह चंगाई यथार्थ विश्वास और आवश्यक विवेक से प्रेरित होकर लागू की जाती है तब इसकी उद्धारकारी और सकारात्मक प्रकृति की प्रकाशना होती है, जिसकी विशिष्टत्ता पवित्रता, प्रकाश और शांति का जीवित अनुभव होता है।"

उन्होंने कहा, "हम कह सकते हैं कि इस चंगाई का प्रमुख नोट आनन्द, पवित्रआत्मा के फल तथा विश्वास के साथ ईश वचन का स्वागत करनेवालों से की गई प्रभु येसु की प्रतिज्ञा है।" उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भूत भगाने के विषय का सम्पूर्ण उपचार नहीं, लेकिन अपदूतग्रस्त को चंगाई प्रदान करने हेतु पुरोहितों के लिये एक उपकरण के रूप में लिखी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि काथलिक अपदूतग्रस्त निवारक कोई ओझा, झाड़फूँक करनेवाला अथवा जादू-टोना करनेवाला नहीं है।

कार्डिनल दोनातिस

फादर बामोन्ते ने कहा कि उक्त पुस्तक का उपयोग काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों एवं धर्मप्रान्तों द्वारा विश्वासियों की मदद के लिये किया जा सकता है। पुस्तक के प्राक्कथन में रोम के प्रतिधर्माध्यक्ष कार्डिनल आन्जेलो दे दोनातिस ने कहा, "अपदूतग्रस्त निवारक अपने विवेक से आगे नहीं बढ़ सकता, क्योंकि वह एक आधिकारिक मिशन के ढांचे के भीतर काम करता है जो उसे किसी तरह से येसु मसीह और कलीसिया का प्रतिनिधि बनाता है।"

कार्डिनल दोनातिस ने कहा, "अपदूतग्रस्त निवारक की प्रेरिताई बहुत ही संवेदनशील है, बहुबिध ख़तरों के बीच इसका अस्तित्व होता है, इसमें विवेक और प्रज्ञा की नितान्त आवश्यकता है, इसके लिये उपयुक्त और उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता रहा करती है, ताकि प्रार्थना के बल पर तथा सही लक्ष्य एवं मनोरथ के साथ पुरोहित अपदूतग्रस्त व्यक्ति को चंगाई प्रदान कर सके।"

31 July 2020, 11:26