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फिलिपिन्स में आतंकवाद विरोधी विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन- 04.06.2020 फिलिपिन्स में आतंकवाद विरोधी विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन- 04.06.2020  

फिलीपीनी ईसाई नेता आतंकवाद विरोधी नए कानून के खिलाफ एकजुट

फिलीपींस के ख्रीस्तीय नेताओं ने देश में प्रस्तावित आतंकवाद विरोधी कानून का विरोध करने के लिए अपनी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि यह कानून मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के प्रति सम्मान को नष्ट कर देगा।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

फिलीपिन्स, शुक्रवार, 5 जून 2020 (वाटिकन न्यूज़): फिलीपींस के ख्रीस्तीय नेताओं ने देश में प्रस्तावित आतंकवाद विरोधी कानून का विरोध करने के लिए अपनी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि यह कानून मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के प्रति सम्मान को नष्ट कर देगा।

कई ख्रीस्तीय नेताओं ने इस विधेयक पर आपत्ति जताई है, जो सांसदों के अनुसार, आतंकवाद का मुकाबला करने में मददगार होगा।  

धार्मिक नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित कानून "मार्कोस मार्शल लॉ के काले दिनों की पुनरावृत्ति है।" राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस ने 1972 से 1981 तक फिलीपींस पर मार्शल लॉ लगाया था।

आतंकवाद विरोधी विधेयक

राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की सरकार विधेयक 6875 पर यह कहते हुए ज़ोर दे रही है कि "आतंकवादी कृत्यों के ख़तरों पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है।"

कांग्रेस के निचले सदन ने बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिससे यह कानून बनने के करीब पहुंच गया है। सीनेट ने फरवरी में इसी तरह का विधेयक पारित किया था।

विधेयक 6875 किसी भी तरह से आतंकवादी कार्रवाई से जुड़े लोगों के लिए, पैरोल के बिना, आजीवन कारावास की अनुमति देगा, तथा संदिग्धों को 24 दिनों तक, गिरफ्तारी वारंट के बिना, हिरासत में रखने की अनुमति देगा।

नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन

बुधवार को एक संयुक्त वकतव्य प्रकाशित कर फिलिपिन्स के ख्रीस्तीय नेताओं ने दावा किया कि उक्त विधेयक "लोकतांत्रिक स्थान को और अधिक सिकुड़ देगा तथा सार्वजनिक संभाषण को कमज़ोर कर देगा।" वकतवय् में कहा गया, "हमारा मानना है कि आतंकवाद विरोधी बिल मानवाधिकारों और अन्य नागरिक स्वतंत्रता के सम्मान से लोगों को वंचित कर देगा।"

ख्रीस्तीय नेताओं का दावा है कि उक्त विधेयक आतंकवाद शब्द के "अत्यधिक व्यापक" उपयोग पर टिका हुआ है। इसका दुरुपयोग असहमति पर रोक लगाने तथा नागरिक अधिकारों के अतिक्रमण के लिये किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह न्याय प्रणाली के "कमजोर पड़ने" और सरकार की अन्य शाखाओं पर नियंत्रण और संतुलन की अति का कारण बन सकता है। बिना वारंट के गिरफ्तारियों के साथ-साथ बिना किसी सबूत के वायर-टैपिंग और निगरानी में वृद्धि पर भी ख्रीस्तीय नेताओं ने चिन्ता व्यक्त की।

05 June 2020, 11:05