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कलीसिया द्वारा राशन प्राप्त करने के लिए एकत्रित राँची के रिक्शा चालक कलीसिया द्वारा राशन प्राप्त करने के लिए एकत्रित राँची के रिक्शा चालक  

हिंदुओं ने भारतीय ईसाइयों पर धर्मांतरण का आरोप लगाया

झारखंड में एक दक्षिणपंथी हिंदू दल ने दावा किया है कि कोरोना वायरस महामारी में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण बढ़ गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

झारखंड, मंगलवार, 16 जून 2020 (ऊकान)- विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र विमल ने झारखंड सरकार पर जानबूझकर आंखें मूंदने का आरोप लगाया है।

राजधानी रांची में विहिप के मुख्यालय में 14 जून को मीडिया से बात करते हुए, विमल ने दावा किया कि राज्य में आदिवासी लोगों के बलपूर्वक धर्मांतरण में कलीसिया शामिल हैं। उन्होंने कहा, "हमें कई रिपोर्ट मिले हैं कि लॉकडाउन के दौरान धर्मांतरण बढ़ गए हैं। हम प्रत्येक मामले में गवाह एकत्र कर रहे हैं।"

उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया कि वह राज्य में 2017 के धर्मांतरण विरोधी कानून के अनुसार धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।

विमल ने कहा, "अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो हम बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे।"

कलीसिया द्वारा खंडन

उनके आरोपों का खंडन करते हुए राँची महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर आनन्द डेविड खलखो ने कहा, "कलीसिया हमेशा गरीबों और दलितों की सेवा करती रही है और इसने अतिरिक्त प्रयास किए क्योंकि देश वैश्विक महामारी से लड़ रहा है। गरीबों की मदद करने के हमारे काम को कुछ लोगों को पसंद नहीं आया और हम पर धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया जा रहा है।"

"हमारे ऊपर धर्मांतरण का आरोप लगाने वाले समूह के पास, अपने आरोप को साबित करने का कोई आधार नहीं है। चूँकि वे इस कठिन समय में गरीबों की मदद करने में असफल रहे और जब कलीसिया पूरे हृदय से राहत कार्यों में शामिल हुई तो वे नाराज हो गये।"

झारखंड में काथलिक कलीसिया धर्मांतरण को बढ़ावा नहीं देती और न उसका प्रचार नहीं करती है। जैसा कि विहिप का दावा है, उन्हें इसे साबित करने दें। झूठे आरोपों के बजाय, उन्हें जमीनी स्तर पर काम (मदद) करना चाहिए।

यदि वे हमारे काम से ईर्ष्या महसूस करते हैं तो हम इसके लिए कुछ नहीं कर सकते। हम बहुत ईमानदारी और निष्ठा से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं और अपने अच्छे कामों के बारे में आश्वस्त हैं, कि इसके द्वारा कई लोगों की जरूरतों में उनकी मदद कर रहा है, खासकर, जब लोग भूख और बीमारी से लड़ रहे हैं।”

झारखंड आदिवासी सलाहकार समिति के सदस्य रतन तिरकी ने ऊका न्यूज को बतलाया कि विहिप जैसे दलों के लिए अच्छा होता यदि वे गरीबों की मदद में लगे होते। उन्होंने कहा, "यह दूसरों पर आरोप लगाने का समय नहीं है जो पहले ही मुप्त में अपनी सेवा दे रहे हैं।" रतन ने कहा कि "हमें आरोप के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए क्योंकि समय-समय पर ये दल लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करता है। हमें अपने काम के धर्मांतरण विरोधी कानून बारे में सावधान रहना चाहिए और अपना काम निःस्वार्थ भाव से करना चाहिए।”

धर्मांतरण विरोधी कानून

झारखंड में 2017 में पारित धर्मांतरण विरोधी कानून कहता है कि बलप्रयोग या लालच देकर किये गये धर्मांतरण के लिए, तीन साल की जेल की सजा और 50,000 रुपये का जुर्माना है। कानून के अनुसार, अगर कोई धर्मांतरण करना चाहता है, तो उसे धर्मांतरण के कारणों को शीर्ष जिला अधिकारी को सूचित करना होगा। नाबालिगों और महिलाओं के साथ-साथ आदिवासी अल्पसंख्यकों एवं निचली जातियों के सदस्यों के धर्मांतरण में "बल" प्रयोग करने पर अधिक गंभीर दंड का प्रावधान है।

हिंदू राष्ट्रवादी अक्सर ईसाईयों पर आरोप लगाते हैं कि वे दबाव डालकर अथवा लालच देकर लोगों का धर्मांतरण कराते हैं जबकि वे स्वयं ख्रीस्तियों पर दबाव डालकर उन्हें हिन्दू अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर करते हैं।

2018 में धर्मांतरण कानून लागू करनेवाला उत्तराखंड नौवां राज्य बन गया है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में यह कानून पहले ही लागू हो चुका है।

झारखंड में कुल 33 मिलियन आबादी में से 1.4 मिलियन ख्रीस्तीय हैं, जिनमें से ज्यादातर आदिवासी हैं।

16 June 2020, 17:46