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अमृतसर में फंसे प्रवासी सरकार से मदद की अपील करते हुए अमृतसर में फंसे प्रवासी सरकार से मदद की अपील करते हुए  (ANSA)

घर लौटते प्रवासियों की मदद हेतु सुप्रीम कोर्ट की अपील

एक महिला अपने बच्चे के सामने भूख से मर गयी। विशेष ट्रेन लम्बी यात्रा के बाद गलत स्थान पर पहुंची। बिना रिफंड के उड़ाने रद्द की गईं। वसाई की कलीसिया द्वारा मदद। भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से प्रवासियों की मदद की मांग की है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

मुम्बई, बृह्पतिवार, 28 मई 2020 (एशियान्यूज)- 24 मार्च से जारी तालाबंदी के कारण लाखों प्रवासी मजदूरों की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गई है और दिहाड़ी श्रमिक काम, भोजन एवं आवास से वंचित हैं। यह स्थिति बदतर होती जा रही है।

मृत मां के साथ बच्चा

सोशल मीडिया में एक वायरल विडियो देखा जा सकता है कि एक छोटा बच्चा अपनी माँ पर ढंके कपड़े को हटाने का प्रयास कर रहा है जो बिहार के मुज़फ्फरपुर के रेलवे प्लेटफ़ार्म पर अत्यधिक गर्मी, भूख और प्यास के कारण जमीन पर लेटी मृत पड़ी है।

वह अभी अभी प्रवासियों के लिए चलाये जा रहे विशेष ट्रेन द्वारा गुजरात से बिहार अपने गाँव लौटी थी। उनके परिवार वालों के अनुसार वह शनिवार को वहाँ से रवाना हुई थी और भोजन तथा पानी के अभाव में ट्रेन में अच्छा महसूस नहीं कर रही थी।

दो महिनों के लिए तालाबंदी के कारण यातायात के साधन बंद थे। शहरों में भूख और असुविधाओं से बचने के लिए लोग अपने गाँव लौटने लगे। उनमें से कुछ लोग हजारों किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर घर लौटे।

ट्रेनों की गड़बड़ी से लगो परेशान

करीब एक सप्ताह पहले सरकार ने प्रवासियों की मदद के लिए विशेष ट्रेन की सुविधा मुहैया करायी ताकि वे अपने घर जा पहुँच सकें किन्तु यह भी कम जटिल नहीं रही। भारत की मीडिया के रिपोर्ट अनुसार करीब 40 विशेष (श्रमिक) ट्रेन गलत गंतव्यों में भेजी गईं।

उदाहरण के लिए, वसाई (महाराष्ट्र) के प्रवासी मजदूरों को गोरखपुर ले जाने के लिए विशेष ट्रेन चली किन्तु वह राऊरकेला (ओडिशा) पहुँची, जो करीब 900 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।

दूसरे श्रमिक ट्रेन को प्रवासी मजदूरों को गुजरात से बिहार ले जाना था जबकि वह कर्नाटक पहुँच गयी। उसी तरह पटना से मुम्बई जाने वाली ट्रेन पुरूलिया (पश्चिम बंगाल) पहुँच गयी।

विमानों से परेशानी

हवाई जहाजों में भी कई गड़बड़ियाँ हो रही हैं जब उड़ानों को बिना सूचना के रद्द किया जा रहा है। तीन मजदूर बिना मजदूरी के मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) में दो महीनों से फंसे हुए हैं। पहले उन्होंने ट्रेन से घर जाने की कोशिश की किन्तु असफल रहे। जब उन्होंने सुना कि हवाई जहाज फिर से शुरू किये जा रहे हैं तब उनके परिवार वालों ने कुछ जानवरों को बेचकर सोमवार को तीनों लोगों के मुम्बई-कोलकत्ता टिकट के लिए 30,600 रूपया जमा किया। दुर्भाग्य से, बिना पैसा वापस किये ही विमान रद्द कर दिया गया।

कलीसिया द्वारा मदद

गोरेत्ती खलखो जो एक समाज सेवी हैं वसाई में प्रवासियों की मदद कर रही हैं, उन्होंने एशिया न्यूज को बतलाया कि "प्रवासी थक चुके हैं, त्याग दिए जाने की भावना से कड़वाहट महसूस कर रहे हैं। हर कोई वापस जाना चाहता है किन्तु यह कठिन है। मैं ट्रेन और विमान से कुछ यात्राओं की व्यवस्था करने की कोशिश कर रही हूँ। आज रात वसाई से राँची (झारखंड) के लिए 24 प्रवासी उड़ान भर रहे हैं किन्तु हम नहीं जानते। हमारे पास कुछ उदार लोग हैं जिन्होंने उनके लिए टिकट किया है।"    

सुप्रीम कोर्ट की मांग

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रवासियों की दयनीय स्थिति के बारे कहा है। एक वक्तव्य में कोर्ट ने कहा है कि "हम प्रवासी मजदूरों की समस्याओं और दुःखों का संज्ञान लेते हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए थे।" जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एम. आर. शाह ने कहा कि "भोजन और पानी" के बिना "लंबी दूरी पैदल और साइकिल से तय करनेवाले प्रवासी मजदूरों की स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय है। पूरे देश में लॉकडाउन की वर्तमान स्थिति में, समाज के इस वर्ग के लिए संबंधित सरकारों द्वारा विशेष रूप से कदम उठाये जाने और मदद दिये जाने की जरूरत है।"

 

28 May 2020, 17:14