खोज

Vatican News
ची के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एवं अन्य धर्माध्यक्ष ची के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एवं अन्य धर्माध्यक्ष 

धर्माध्यक्षों ने पूजा स्थलों को पुनः खोलने का आग्रह किया

राँची काथलिक महाधर्मप्रांत के धर्माध्यक्षों ने झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन को एक पत्र लिख कर, सार्वजनिक रूप से उपासना करने हेतु पूजा स्थलों को पुनः खोलने का आग्रह किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

राँची, शनिवार, 30 मई 2020 (वीएन हिन्दी)- राँची के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एस.जे एवं राँची के सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास एस एफ एक्स ने 29 मई को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कोविड-19 संकट एवं तालाबंदी के समय सरकार एवं उनके सहयोगियों के महत्वपूर्ण कार्यों की सराहना की है। उन्होंने लिखा है, "हम आपके नेतृत्व की सराहना करते हैं जिसकी विशेषता है गरीबों, प्रवासियों और हाशिये पर जीवन यापन करनेवाले लोगों के प्रति सहानुभूति एवं कार्यकुशलता। आप बिलकुल पहली पंक्ति पर दृढ़ता से कार्यों का संचालन कर रहे हैं किन्तु प्रचार अथवा मीडिया के शोरगुल के बिना।"

धर्माध्यक्षों ने पत्र में कोविड-19 संकट के समय राँची जिला प्रशासन के कार्यों की भी सराहना की है जिसमें उपायुक्त राय महीपात रे और स्थानीय पुलिस के निर्देशन में पूरे क्षेत्र के स्वास्थ्य एवं प्रवासियों और हाशिये पर जीवनयापन करने वालों पर ध्यान दिया जा रहा है।

कलीसिया द्वारा राहत कार्य

कोरोना वायरस महामारी का सामना करने के लिए काथलिक कलीसिया सरकार का पूरा साथ दे रही है। जिलाभर में पुरोहितों, धर्मबहनों, धर्मबंधुओं, महिलाओं और युवाओं द्वारा राँची में फंसे प्रवासियों के लिए 14 शेल्टर होम खोले गये हैं जिनमें से प्रत्येक में 200 लोगों के ठहरने के लिए स्थान तैयार किया गया है। जिलाभर में 15 दिनों तक हजारों परिवारों को राशन प्रदान किया गया। दो सामुदायिक किचन भी खोले गये हैं। पिछले दो सप्ताह से राह चलते प्रवासियों को चौराहों एवं मुख्य मार्गों में सूखा भोजन प्रदान किया जा रहा है। इस तरह काथलिक कलीसिया अन्य राज्यों में भी कई तरह की सेवाएं प्रदान कर रही है।

आध्यात्मिक शक्ति की जरूरत

आकस्मिक एवं लम्बे समय तक जारी तालाबंदी के कारण समाज के कई विभागों में दबाव है जिससे अब धीरे धीरे कई गतिविधियाँ सामान्य हो रही हैं। लॉकडाउन के कारण धार्मिक पूजा-पाठ एवं सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। धर्माध्यक्षों ने कहा है कि भारत एक गहरी आध्यात्मिकता का देश है और गरीबी, लाचारी एवं पीड़ाओं के बीच भी लोग ईश्वर पर अपने विश्वास एवं सामूहिक उपासना द्वारा पुष्ट और पोषित होते हैं। कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण से बचने पर ध्यान देने के साथ साथ आध्यात्मिक शक्ति की भी जरूरत है।

सरकार से अपील

तालाबंदी के दौरान पर्व एवं रविवारों को ख्रीस्तयाग का सीधा प्रसारित किया जिसके लिए सरकार की ओर से मदद दी गई थी। धर्माध्यक्षों ने इसके लिए अपना आभार प्रकट किया है। हालांकि, सीधा प्रसारण के द्वारा भी पूजा पाठों में भाग लिया जा सकता है किन्तु यह पूर्ण नहीं है। इसके लिए लोगों को एक साथ आने और साक्षात् रूप में उपस्थित होने की जरूरत है। अतः काथलिक कलीसिया ने सरकार से अपील की है कि वे पूजा पाठों में सार्वजनिक रूप से भाग लेने के लिए उनके आग्रह को भारत सरकार के पास रखे ताकि लोगों के स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सामाजिक दूरी और स्वच्छता के नियमों के पालन के साथ लोग सार्वजनिक उपासना में भाग ले सकें। 24 मार्च को तालाबंदी की पहली घोषणा के बाद यह 31 मई तक जारी है।    

30 May 2020, 15:05