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संत पापा जॉन पॉल द्वितीय संत पापा जॉन पॉल द्वितीय 

एक संत और उनका परिवार

प्रभु में अटूट विश्वास, मरियम के प्रति समर्पण, त्याग की भावना, जीवन को जोखिम में डालते हुए भी अपने पड़ोसी के प्रति प्रतिबद्धता, करोल वोइतिला ने इन सभी गुणों को अपने परिवार में पाया, इन्हें अपने स्वयं के जीवन में और एक असाधारण तरीके से अपने परमाध्यक्षीय काल में भी विकसित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 18 मई 2020 (वाटिकन न्यूज) : ʺईश्वर के लोगों की सेवा में, संत जॉन पॉल द्वितीय परिवार के परमाध्यक्ष थे।ʺ 6 साल पहले 27 अप्रैल को करोल वोइतिला और एंजेलो रोंकल्ली के संत घोषणा समारोह के दौरान संत पापा फ्राँसिस के ये शब्द आज एक विशेष अर्थ रखते हैं क्योंकि हम पोलिश पापा के जन्म की शतवर्षीय जुबली मना रहे हैं। वास्तव में, उनके सांसारिक जीवन की शुरुआत का समारोह मनाने से स्वाभाविक रूप से हमें उनके परिवार से "मिलने" की इच्छा होती है, ताकि हम उनके माता-पिता के "रहस्य" की खोज कर सकें। पोलैंड में पिछले सप्ताह माता-पिता के धन्य घोषणा की तैयारी शुरु हो गई। अपनी माँ एमिलिया और पिता करोल के मूल जीवनी संबंधी डेटा को पढ़कर, कोई भी समझ सकता है कि क्यों पिता का नाम अपने बेटे को दिया गया था। उनकी गवाही ने भविष्य के पोप के व्यक्तित्व पर कितना गहरा प्रभाव डाला था। बेशक, यह कहा जा सकता है कि उनका पुरोहिताई जीवन का स्तंभ , फिर क्राकोव के महाधर्माध्यक्ष के रुप में और फिर रोम के धर्माध्यक्ष के रुप में, अपने जीवन के शुरुआती वर्षों में पोलैंड के सुदूर दक्षिण में, एक छोटे से शहर वादोविच में रखा गया था, जहाँ उनका जन्म 18 मई 1920 को हुआ था।

करोल वोइतिला की माता इमीलिया
करोल वोइतिला की माता इमीलिया

आपकी सफेद कब्र के ऊपर

जीवन के सफेद फूल -

आपके बिना इतने साल

कितने लोग दृष्टि से दूर हो गए हैं?

सन् 1939 ई.  के वसंत में युवा करोल वोइतिला ने अपनी मां को समर्पित ये मार्मिक कविता लिखी थी। यह तब हुआ जब वे केवल 9 वर्ष के थे। एमिलिया ने स्वास्थ्य खराब होने पर भी कठिनाइयों के बीच अपनी गर्भावस्था पूरी की। हालांकि उसके स्वास्थ्य को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे गर्भपात कराने की सलाह दी थी। करोल के जन्म के बाद उसे लगातार अस्पताल में भर्ती किया जाता रहा और अंत में नौ साल बाद उनकी मृत्यु हो गई। मानव जीवन की आवेशपूर्ण रक्षा, विशेष रूप से नाजुकता की स्थितियों में - वोइतिला के परमाध्यक्षीय कार्यों के विशिष्ट लक्षणों में से एक है- जो उसे अपनी माता से मिला।

अपनी माँ की अकाल मृत्यु के तीन साल बाद, एक और गहरा दुःख वोइतिला परिवार पर आया। 26 साल की उम्र में, प्यारे बड़े भाई एडमंड की दुःखद मौत। करोल ने अपने भाई को आदर्श के रुप में देखा था। एडमंड एक असाधारण व्यक्ति थे। एडमंड एक डॉक्टर थे और पोलैंड में सेवा दे रहे थे, जिन्होंने स्कार्लेट ज्वर से पीड़ित एक कम उम्र की लड़की की सेवा में अपना जीवन अर्पित कर दिया। स्कार्लेट ज्वर एक ऐसी बीमारी थी जिसका उस समय कोई टीका नहीं था। युवा चिकित्सक संभावित परिणामों को जानता था, लेकिन भले समारी की तरह अपनी सेवा दी। जैसा कि संत पापा ने कई वर्षों बाद याद किया, एडमंड की मृत्यु उनके लिए एक झटका था। वे अपनी मां की मृत्यु के बाद से अधिक परिपक्व हो गए थे। अपने भाई की "कर्तव्य के लिए शहादत" का उदाहरण उनकी स्मृति में हमेशा के लिए छाप बना दिया था। एडमंड ने उसे अपनी पढ़ाई में प्रोत्साहित किया था, उसे खेल खेलना सिखाया और अपने पिता के साथ, अपनी माँ की मृत्यु के बाद युवा करोल का पालन-पोषण किया था।

करोल अपने पिता के साथ
करोल अपने पिता के साथ

बारह वर्ष की उम्र में, भाई की मृत्यु के बाद करोल ने खुद को अपने पिता के साथ अकेला पाया, जो पोलिश सेना में सैनिक थे। उनके पिता एक अच्छे और गंभीर व्यक्ति थे, जिनकी आस्था, इतनी व्यक्तिगत त्रासदियों के बावजूद, अपरिवर्तित रही। उसके पिता ने स्वयं के उदाहरण से - अखंडता, देशभक्ति और माता मरियम के लिए प्यार जैसे मूल्य युवा करोल को दिया। करोल वोइतिला ने इन सारे गुणों को अपने में विकसित किया। जब वे रोम के धर्माध्यक्ष बने तो अपने पत्रकार मित्र, एंड्रे फ्रॉस्टर्ड के साथ एक बातचीत में अपने पिता को याद करते हुए कहा, "मेरे पिता अद्भुत व्यक्ति थे और लगभग मेरी सारी बचपन की यादें उन्हें संदर्भित करती हैं।" उन्होंने कई दुःखद धटनाओं को याद किया जिसे उन दोनों ने एकसाथ मिलकर सामना किया था। वे याद करते हैं कि उनके पिता घुटनों के बल प्रार्थना में घंटों बिताया करते थे। वे दुखों को प्रार्थना में बदल देते थे। करोल के पुरोहिताई जीवन का चुनाव करने के पीछे उनके पिता का बहुत बड़ा हाथ रहा है।

पुरोहित के रुप में संत पापा जॉन पॉल द्वीतीय
पुरोहित के रुप में संत पापा जॉन पॉल द्वीतीय

अपने पुरोहितिक जीवन की 50 वीं वर्षगांठ के लिए प्रकाशित आत्मकथा, ‘उपहार और रहस्य’ में, संत जॉन पॉल ने अपने पिता के साथ, "पुरोहित बनने के बारे में कोई बात नहीं की। लेकिन उनके लिये पिता का उदाहरण किसी तरह से पहला सेमिनरी, एक प्रकार का घरेलू सेमिनरी था। विटोरियो मेसोरी के साथ हुए अपने साक्षात्कार में, संत जॉन पॉल ने अपने पिता द्वारा दी गई एक पुस्तक को याद किया जिसमें पवित्र आत्मा के लिए प्रार्थना शामिल थी। "उन्होंने इसे रोजाना प्रार्थना करने के लिए कहा। उस दिन से उन्होंने रोज ही प्रार्थना करने की कोशिश की।

कार्डिनल के रुप में संत पापा जॉन पॉल द्वीतीय
कार्डिनल के रुप में संत पापा जॉन पॉल द्वीतीय

करोल और उनके पिता अब क्राकोव में रहते थे। एक युवा के रूप में जब वे विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे थे नाजी दखल शुरु हुआ। 21 साल की उम्र में, करोल ने अपने पिता को भी खो दिया, जिनकी 18 फरवरी, 1941 की ठंडी रात में मृत्यु हो गई थी, जो शायद उनके जीवन का सबसे दर्दनाक समय था। करोल वोइतिला दुनिया में अकेले थे, फिर भी उसके माता-पिता का प्यार, उदाहरण और उसके भाई के शिक्षण ने उसे आगे बढ़ने की हिम्मत दी। वे जानते थे कि एक आशा है जिसे कोई बीमारी या मृत्यु उससे ले नहीं सकती। अपने जीवन की लंबी यात्रा में, पूरी दुनिया की यात्रा कर सुसमाचार की घोषणा करते हुए, करोल वोइतिला ने हमेशा अपने परिवार को अपने साथ रखा। अपनी माँ की तरह, उन्होंने साहस के साथ जीवन की रक्षा की। अपने भाई की तरह, उन्होंने अंत तक खुद को दूसरों के लिए दिया। अपने पिता की तरह, वह दुःख से डरता नहीं था। उसने दरवाजा खोला और मसीह के लिए दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए।

18 May 2020, 17:11