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दिल्ली के बेघर और दिहाड़ी मजदूर यमूना नदी के तट पर दिल्ली के बेघर और दिहाड़ी मजदूर यमूना नदी के तट पर  (REUTERS)

लॉकडाउन में काथलिक स्कूल दिल्ली द्वारा भूखों को खिलाने की पहल

कोरोना वायरस महामारी के कारण राष्ट्रव्यापी तालाबंदी में एक काथलिक स्कूल दिल्ली के प्रवासियों, निराश्रितों और बुजुर्गों को खिला रहा है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शनिवार 4 अप्रैल, 2020 (मैटर्स इंडिया) : उत्तरी दिल्ली जिले के नरेला में रोज़री स्कूल के प्रिंसिपल फादर सावरीराज ने 30 मार्च को व्हाट्सएप में प्राप्त संदेशों और हताश लोगों द्वारा फोन पर मदद की मांग करने पर भूखों को खिलाना शुरू किया।

फादर सावरीराज ने मैटर्स इंडिया को बताया कि उन्होंने जूम ऐप पर स्कूल के शिक्षण कर्मचारियों की एक बैठक बुलाई और उन्हें राशन दान करने की अपील की। सभी ने उदारता और स्वेच्छा से सकारात्मक जवाब दिया।"

इस बीच, फादर सावरीराज ने किराने का सामान वितरित करने की अनुमति लेने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस कार्यालय से संपर्क किया और एसएचओ से लिखित अनुमति ली।

3 अप्रैल को फादर सावरीराज ने अपने एक कर्मचारी प्रताप के साथ गरीब और जरुरतमंद लोगों के बीच राशन और भोजन वितरित किया।उन्होंने दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित, फिलोमेना पैराडाइज वृद्धाश्रम में भी खाद्य सामग्री पहुँचाई।

फादर सावरीराज ने कहा, "लॉकडाउन के कारण हजारों प्रवासी फ्लाईओवर के नीचे रहने को मजबूर हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन का आदेश दिया। लेकिन इससे प्रवासी, गरीब और दिहाड़ी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।"

उनके अनुसार, तालाबंदी ने दैनिक ग्रामीणों को बेरोजगार बना दिया है। कुछ रिक्शा चालक हैं, जिन्हें अपने वाहनों को अपने मालिकों को सौंपना पड़ा।

उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन और कर्मचारी केवल दर्शक बनने के बजाय कर्ता बनना चाहते हैं क्योंकि घातक वायरस का कहर विश्व में बढ़ता जा रहा है। वायरस राष्ट्रीयता या जातीयता, गुटबाजी या विश्वास, अमीर या गरीब की परवाह नहीं करता है। इसका शिकार "सबसे कमजोर महिलाएं हैं, बच्चे हैं,  विस्थापित और हाशिए पर जाने वाले लोग हैं।"

फादर सावरीराज ने उम्मीद जताई कि उनके "छोटे उदार के कार्य" आने वाले दिनों में अधिक लोगों को उदार बनने के लिए प्रभावित करेंगे। उन्होंने शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों और प्रधानाध्यापिका सिस्टर संजुक्ता को धन्यवाद दिया।

इसी तरह देश के अनेक भागों में भी गैर सरकारी संस्थाओं और काथलिक कलीसिया द्वारा गरीबों, रोजगार मजदूरों की आर्थिक तौर पर मदद की जा रही है।

04 April 2020, 15:26