खोज

Vatican News
प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (2020 Getty Images)

ख्रीस्तीय पत्रकारों का 25वां राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस

वास्तविकता की सच्चाई का सम्मान करना एवं आवाजहीनों की आवाज बनना, ये दो ध्रुवीय तारे हैं जो ख्रीस्तीय संचार सेवा से संलग्न लोगों के कार्यों का मार्गदर्शन करते हैं। उक्त बातें आयोजित ख्रीस्तीय पत्रकार संगठन के 25वें राष्ट्रीय सम्मेलन में कही गयी, जिसका आयोजन नई दिल्ली में भारतीय काथलिक प्रेस संगठन (आईसीपीए) द्वारा की गयी थी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, बुधवार, 4 मार्च 2020 (रेई)˸ सम्मेलन की विषयवस्तु थी, "पत्रकारिता आज ˸ सिद्धांतों पर व्यावहारिक विजय"। सम्मेलन में देशभर के संप्रेषण विद्यार्थी एवं पत्रकारों ने भाग लिया। मौलिक सिद्धांतों के बीच व्यावहारिकता का त्याग, इसी विषय पर विभिन्न हस्तक्षेप में प्रकाश डाला गया, जिसमें खासकर, सच्चाई के प्रति सम्मान या सत्ता का दबाव अथवा सनसनी की खोज प्रमुख थे।   

दिल्ली के महाधर्माध्यक्ष अनिल जोसेफ थॉमस कुटो ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा, "संचार एक पेशा एवं एक मिशन है अतः ख्रीस्तीय पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे सच्चाई की रक्षा करें एवं दलितों, आदिवासियों, शोषितों एवं आवाजहीन लोगों के लिए आवाज उठायें।"  

उन्होंने इस पेशे की नीति का सम्मान नहीं करने बल्कि सत्ताधारियों के प्रशंसक बननेवाले पत्रकारों की ओर इशारा करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से रक्षक, आराम करने वाले बन गये हैं जो सनसनीखेज की दौड़ में कई बार तथ्यों पर नियंत्रण नहीं करते जो प्रजातंत्र देश के लिए बहुत खतरनाक है।

महाधर्माध्यक्ष कुट्टो ने भारत में प्रेस की आजादी की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की तथा याद किया कि देश, हाल में विश्व रैंकिंग में 140वें से 180वें स्थान पर आ गया है। महाधर्माध्यक्ष के अनुसार नई दिल्ली में हिन्दू मुस्लिम दंगों के समय पत्रकारों पर हमला भारत में मीडिया के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।

आईसीपीए के अध्यक्ष इग्नासियुस गोनजाल्स ने इस बार पर प्रकाश डाला कि एक ऐसी दुनिया में जो सच्चाई सुनना नहीं चाहती उसे सच्चाई बतलाना आसान नहीं है।

आईसीपीए की स्थापना 1963 में जेस्विट फादर जॉन बार्रेट के द्वारा की गई थी। आज इसके 110 सदस्य हैं जिसमें देश की प्रमुख काथलिक पत्रिकाएँ और प्रकाशन गृह शामिल हैं।

 

04 March 2020, 16:36