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उत्तरी इटली के मोलिनेत्ते अस्पताल का आपातकालीन विभाग उत्तरी इटली के मोलिनेत्ते अस्पताल का आपातकालीन विभाग  (AFP or licensors)

कोरोना वायरस से लड़ने में धर्मबहनें पहली पंक्ति पर

संत कमिल्लुस की पुत्रियों के धर्मसमाज की धर्मबहनें कोरोनो वायरस आपातकाल का सामना साहस के साथ कर रही हैं। वे अपने जीवन को खतरे में डाल कर बीमारों की सेवा में लगी हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

इटली, मंगलवार, 23 मार्च 20 (रेई) : संत कमिल्लुस की पुत्रियों के धर्मसमाज की धर्मबहनें कोरोनो वायरस आपातकाल का सामना साहस के साथ कर रही हैं क्योंकि वे बीमार लोगों की सेवा करते हुए कई बार अपने जीवन को खतरे में डाल देती हैं। 

कई लोगों की नजरों से छिपी, ये दीन धर्मबहनें इन दिनों कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रही हैं। चाहे वे नर्स हों या एकांत मठवासी, गरीबों की मदद करती हों या परिवारों का साथ देती हों, उनके दो शक्तिशाली हथियार हैं प्रार्थना और स्नेह।

संत कमिल्लुस की धर्मबहनें जिनका कारिज्म है बीमार एवं बुजूर्गों की सेवा करना, वे महामारी शुरू होने के समय से ही डटकर अपनी सेवा दे रही हैं।

इटली में कमिल्लीयन्स धर्मबहनों के पाँच अस्पताल हैं जो रोम, त्रेंतो, त्रेभिजो, ब्रेशा और क्रेमोना में स्थित हैं। उत्तरी इटली में स्थित त्रेभिजो, ब्रेशा और क्रेमोना वे स्थल हैं जहाँ कोरोना वायरस का प्रभाव सबसे अधिक है।

दूसरों के लिए जीवन अर्पित करने हेतु तैयार

त्रेभिजो स्थित संत कमिल्लो अस्पताल की निदेशिका एवं धर्मसमाज की महासचिव सिस्टर लेन्सी एझुपारा ने वाटिकन रेडियो से कहा, “हमारे सभी संस्थाओं में नर्स धर्मबहनें निःस्वार्थ रूप से अपना जीवन जोखिम में डाल रही हैं किन्तु धर्मबहनें भयभीत नहीं हैं। हम संत कमिल्लुस की धर्मबहनें तीन सुसमाचारी सलाहों, शुद्धता, निर्धनता एवं आज्ञापालन के अलावा चौथा व्रत लेती हैं, वह है, बीमारों की सेवा करना चाहे इसके लिए जान ही गवाँना क्यों न पड़े।”

उन्होंने कहा कि यह व्रत आज और अधिक अर्थपूर्ण हो गया है जब धर्मबहनें कोविड-19 संक्रमण का सामना करते हुए अलग किये गये अस्पतालों में जाती हैं। सिस्टर लेन्सी ने बतलाया कि त्रेभिजो अस्पताल में संक्रमित रोगियों के लिए करीब सौ से अधिक बेड हैं किन्तु समस्याएँ अनन्त हैं क्योंकि वहाँ संसाधनों की कमी है। उन्होंने कहा, “एक धर्मबहन के रूप में जिसका मिशन एक संदेशवाहक के रूप में येसु के मिशन को पूरा करना है, संत कमिल्लुस की पुत्रियाँ, साहस एवं तत्पता में पीड़ितों के नजदीक रहने हेतु कुछ भी करने का बल प्राप्त करती हैं। उनका पूर्ण समर्पण एवं तत्परता आकर्षित करनेवाला है। हम जानते हैं कि हम भी मर सकते हैं किन्तु प्रार्थना एवं संत कमिल्लुस से निवेदन हमें बल प्रदान करता है।”

प्रार्थना : एक शक्तिशाली हथियार

अस्पतालों में नर्स धर्मबहनों द्वारा सेवा दिये जाने के साथ-साथ हजारों धर्म बहनें प्रार्थना द्वारा वायरस से लड़ने का प्रयास कर रही हैं। बेरगमों जो महामारी से बहुत अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है वहाँ संत ग्राता की बेनेडिक्टाईन धर्मबहनों का एकान्त मठवास है। वाटिकन रेडियो से बातें करते हुए समुदाय की सुपीरियर सिस्टर मरिया तेरेसा ने कहा, “हमारे पास इंटरनेट एवं टेलीविजन की सुविधा है, अतः हम विश्व में इस समय के दुःख को जान पा रहे हैं।" उन्होंने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण समय में धर्मबहनों ने अपनी प्रार्थनाओं को तेज किया है। निश्चय ही हम प्रार्थना के सच्चे मैराथन में भाग ले रहे हैं।

सिस्टर ने बतलाया कि धर्मबहनों को विश्वभर से प्रार्थना का आग्रह मिल रहा है और हम रोजरी, नोवेना एवं मठ की परम्परागत प्रार्थनाएँ जिनको हमारे पूर्वजों ने आपदाओं के समय किया था, सहर्ष कर रही हैं।

सिस्टर मरिया ने बतलाया कि वे शहर स्थित अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों से भी फोन द्वारा जुड़ी हैं जिसके माध्यम से उन्हें हर प्रकार की खबरें मिल रही हैं। उन्होंने कहा, “हम अपना भाग पूरा करती हैं यह मानते हुए कि शरीर में एक आत्मा भी है जिसकी रक्षा की जानी चाहिए। इस तरह यह भी एक रास्ता है जिसके द्वारा कोरोना वायरस पर विजय पाया जा सकता है।”

24 March 2020, 16:23