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कोरोना वायरस से रक्षा कोरोना वायरस से रक्षा  (ANSA)

कोरोना वायरस से लड़ने हेतु कार्डिनल बो की अपील

जब पूरा विश्व कोरोना वायरस की चपेट में है, एशियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने विश्व बंधुत्व की अपील की है कि संकट से बचने के लिए प्रार्थना एवं सहायता प्रदान की जाए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

म्यानमार, बुधवार, 26 फरवरी 2020 (वीएन)˸ एशियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ के अध्यक्ष (एफएबीसी) एवं म्यानमार के कार्डिनल चार्ल्स बो ने मंगलवार को लिखा, "हमारी गहरी सहानुभूति इस जानलेवा वायरस से संक्रमित लोगों एवं देशों के लिए है। यह मानवता के विश्व बंधुत्व का समय है।" 

संत पापा की अपील दुहराते हुए उन्होंने लिखा, "हम प्रत्येक दिन अपनी प्रार्थनाओं में उन भाई–बहनों के लिए प्रार्थना करें जो संक्रमित हैं।"

मध्य चीनी शहर वुहान में वायरस के प्रकोप ने दुनिया भर में करीब 80,000 से अधिक लोगों को संक्रमित किया है जिसके द्वारा चीन में 2,663 लोगों की मौत हो गयी है। चीन के बाहर 40 से अधिक देश इस वायरस से प्रभावित हैं। लगभग 500 मिलियन लोग या तो बंद स्थितियों में हैं या अपने घरों तक सीमित रहने के लिए बाध्य हैं।  

कार्डिनल बो ने वायरस द्वारा कई देशों में गंभीर आर्थिक प्रभाव पर गौर किया। वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए, कई देश यात्राओं पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, जो पर्यटन क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।

प्रार्थना एवं भाईचारा

कर्डिनल के अनुसार "आपदा मानवीय भाईचारा का समय है जब युद्ध, आपदा अथवा वायरस के प्रकोप के समय नक्शे और सीमाएँ गिर जाते हैं, तब अच्छे लोगों द्वारा सारे महादेशों में प्रशंसनीय बंधुत्व दिखाई पड़ता है।"

यह स्मरण दिलाते हुए कि "जीवन के स्वामी प्रभु हैं जो लोगों को बुराई से बचाते हैं," उन्होंने प्रार्थना, मिस्सा एवं आराधना द्वारा उनसे इस बीमारी से रक्षा करने हेतु याचना करने का प्रोत्साहन दिया।  

आत्मा की खोज

कार्डिनल बो ने सभी लोगों से चिंतन हेतु आग्रह किया है कि यह प्रकोप, मानव जीवन के असली अर्थ और अंतिम लक्ष्य एवं मानव के अहंकार और दुस्साहस पर आत्मनिरीक्षण करने एक अवसर है। एक अदृश्य वायरस, शक्तिशाली नेताओं एवं आर्थिक रूप से ताकतवर देशों को उनके घुटनों पर ला सकती है।  

मानव जीवन की पवित्रता

उन्होंने कहा कि यह दीनतापूर्वक हमारी मानवीय दुर्बलताओं एवं मरणशील स्वभाव को  स्वीकार करने का समय है। हमारे जीवन पर पूर्ण अधिकार सिर्फ ईश्वर को है। उन्होंने खेद प्रकट किया कि मानव जीवन की पवित्रता का स्थान आर्थिक लाभों ने ले लिया है जो आर्थिक और पर्यावरणीय अन्याय में प्रकट होता है।   

कार्डिनल ने कहा कि एक ऐसा विश्व जो मानव जीवन के पारलौकिक मूल्य को महत्व नहीं देता, वह हर पवित्रता का भौतिकीकरण करने की कोशिश करता है और बाजार की अर्थव्यवस्था में मानव जीवन को एक कोहरा से भी कम आंकता है।

कार्डिनल ने चेतावनी देते हुए कहा कि "आपदा एवं वायरस की महामारी हमें विशेष रूप से याद दिलाती है कि हमारी सिर्फ एक ही पृथ्वी है। इसके लिए हम या तो एक साथ खड़े हो सकते हैं अथवा एक साथ पतन के गर्त में गिर सकते हैं।"

26 February 2020, 16:04