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कोंगो के शिविरों में रह रहे लोग कोंगो के शिविरों में रह रहे लोग  (ANSA)

कार्डिनल द्वारा उत्तरी किवू के लिए राष्ट्रपति से समाधान की मांग

कोंगो के राष्ट्रपति शिसेकेदी ने संत पापा से मुलाकात के पूर्व किनशसा के कार्डिनल से मुलाकात की। मुलाकात में उन्होंने देश में जारी संघर्ष पर विचार-विमर्श किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

कोंगो, बृहस्पतिवार, 16 जनवरी 2020 (रेई)˸ कोंगो के राष्ट्रपति फेलिक्स अंतोइने शिसेकेदी ने किनशसा स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को कार्डिनल फ्रिडोलिन अमबोगो से मुलाकात की। कार्डिनल अमबोगो कोंगो के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उपाध्यक्ष हैं। 

इस मुलाकात का मुख्य कारण था, राष्ट्रपति का संत पापा फ्राँसिस से वाटिकन में आगामी मुलाकात। मुलाकात में कार्डिनल की यात्रा पर भी प्रकाश डाला गया जिसमें उन्होंने पिछले दिसम्बर को उत्तरी किवू का दौरा किया था।

कार्डिनल ने कहा, "मैंने पीड़ित जनता को देखा। यह समझ के बाहर है कि कैसे एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकता है। एक चरवाहे के रूप में इसने मुझे बहुत अधिक प्रभावित किया।"  

सैन्य संघर्ष की झलक

उत्तरी किवू का क्षेत्र राजनीतिक रूप से देश का एक सबसे अस्थिर प्रांत है, जहाँ संघर्ष जारी है। संघर्षों में जातीय समूह, नागरिक सेना और विद्रोही दल, इस्लामवादी एवं सैन्य बल एक-दूसरे से संघर्ष कर रहे हैं, जबकि नागरिक  छापे और हिंसक हमलों से पीड़ित हैं।

बाद के वर्षों में, इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ईबोला महामारी जो उत्तरी किवु में अभी भी जारी है, पर ध्यान देने के कारण स्थिति में सुधार हुआ है।

मुलाकात के बाद कार्डिनल ने कहा कि इस परिस्थिति से समाधान पाने के लिए राष्ट्रपति प्रयासरत हैं तथा रक्तपात को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने उन्हें इस बात से भी आश्वस्त किया है कि राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाएगा और देश का कोई भी हिस्सा नक्शे से नहीं मिटेगा।

कार्डिनल अम्बोगो ने कहा कि "हम पीड़ितों का साथ देना, उन्हें प्रोत्साहित करना और उनके लिए प्रार्थना करना चाहते हैं, लेकिन अधिकारियों, राज्य के प्रमुख को चुनौती देना भी हमारा कर्तव्य है, इस स्थिति को समाप्त करने के लिए सेनाओं के प्रयासों को सुदृढ़ करना है।"

उत्तरी किवू प्रांत में हजारों लोग विस्थापित हैं और शिविरों में रह रहे हैं। वे एक अंधकारमय भविष्य का सामना कर रहे हैं।

16 January 2020, 16:20