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सोमालिया मोंगाडिशु में बाढ़ सोमालिया मोंगाडिशु में बाढ़  

पूर्वी अफ्रीका में बाढ़ सहायता हेतु कलीसिया की अपील

पूर्वी अफ्रीका के देशों में कई स्थानों में बाढ़ का पानी घरों में घुस जाने की वजह से कई लोगों की मौत हो गई और कई लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं एक स्थानीय धर्माध्यक्ष और कारितास एजेंसी ने लोगों से मदद की गुहार लगायी है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

पूर्वी अफ्रीका, बुधवार 30 अक्टूबर 2019 (वाटिकन न्यूज) : भारी वर्षा ने केन्या, दक्षिण सूडान और सोमालिया के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया है, जिससे व्यापक बाढ़ और विनाश हुआ है।

केन्या

केन्या के एक सरकारी मंत्री के अनुसार, पिछले हफ्ते केन्या में कम से कम 29 लोगों की मौत हुई। देश के उत्तरी और पूर्वी भागों में लगभग 12,000 लोग विस्थापित हुए हैं। 10,000 से अधिक जानवरों बाढ़ में मारे गए। खेतों की उपज भी पानी में डूबकर बर्बाद हो गये।

मौसम विभाग के अधिकारी ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इथियोपिया की सीमा के पास के एक क्षेत्र में, सामान्य रूप से पूरे बरसात के मौसम में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी।

‘कारितास केन्या’ ने जरूरतमंद लोगों को भोजन, प्राथमिक चिकित्सा आपूर्ति और वितरित करना शुरू किया है।

दक्षिण सूडान

मालाकाल के धर्माध्यक्ष स्टीफन न्योधो अडोर मजवोक, दक्षिण सूडान की सरकार से बड़े पैमाने पर बाढ़ से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा की स्थिति की घोषणा करने का आह्वान किया है। उन्होंने फीदेस समाचार एजेंसी को बताया कि उसके धर्मप्रांत का लगभग 283,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पानी में है।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से दक्षिण सूडान के विशाल इलाकों में बारिश ने तबाही मचाई है। गीले मौसम ने 32 जिलों में मानवीय परिस्थितियों को बदतर बना दिया है, जहां 3 मिलियन से अधिक लोगों को पहले से ही सहायता की आवश्यकता थी।

सोमालिया

सोमालिया में, बाढ़ के कारण 182,000 से अधिक लोग अपने घरों से भागने के लिए मजबूर हो गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि प्रभावित होने वालों में से अधिकांश केंद्रीय शहर बेल्डेवेन के हैं, जहां पिछले सप्ताह 3 लोग डूब गए थे। एक बचाव नाव के पलट जाने से गत सोमवार को 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि अन्य 20 लापता हो गए।

बारिश जारी है

पूर्वानुमानकर्ताओं का कहना है कि पूर्वी अफ्रीका में बरसात का मौसम, जो अक्टूबर से दिसंबर तक रहता है, इस साल असामान्य रूप से बारिश होने की संभावना है।

हिंद महासागर में पानी के तापमान में वृद्धि के कारण बहुत ज्यादा जल का वाष्पीकरण होता है, इस प्रक्रिया को हिंद महासागर द्विध्रुवीय कहा जाता है। यही वायुमंडलीय आर्द्रता वर्षा के रुप में धरती पर गिरती है।

30 October 2019, 16:04