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रोम के आभास दल के साथ झान के काथलिक धर्माध्यक्ष रोम के आभास दल के साथ झान के काथलिक धर्माध्यक्ष 

कलीसिया में जागरूकता, एकता व सहयोग की आवश्यकता, झान धर्माध्यक्ष

भारत के झान (झारखंड, अण्डामन) के काथलिक धर्माध्यक्षों ने आभास के सदस्यों के साथ, रोम के जेस्विट आवास पीटर कनिस्यो में 10 सितम्बर को आयोजित एक छोटी सभा में, भारत की कलीसिया की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की तथा कलीसिया में जागरूकता, एकता और सहयोग को अत्यावश्यक बतलाया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 11 सितम्बर 2019 (वीएनएच)˸ भारत की काथलिक कलीसिया के धर्माध्यक्ष इन दिनों संत पापा के साथ अपनी पाँच वर्षीय अद-लीमिना मुलाकात हेतु रोम पधारे हैं। वे 5 से 13 सितम्बर तक वाटिकन में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं तथा 13 सितम्बर को उनकी विशेष मुलाकात संत पापा फ्राँसिस से होगी।

सभा में सिमडेगा के धर्माध्यक्ष विन्सेंट बारवा, खूँटी के धर्माध्यक्ष विनय कंडुलना, हजारीबाग के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो, दुमका के धर्माध्यक्ष जुलयुस मरांडी, अण्डमान के प्रेरितिक प्रशासक फादर सेलवाराज और धर्माध्यक्ष गाब्रिएल कुजूर ने भाग लिया।

कलीसिया की चुनौतियाँ

धर्माध्यक्षों ने कहा कि छोटानागपुर की कलीसिया विभिन्न चुनौतियों के बावजूद बढ़ रही है। लोगों में जागृति आ रही है वे अपने विश्वास में बढ़ रहे हैं और अधिकारों को समझ रहे हैं। वे वर्तमान चुनौतियों के प्रति सचेत हो रहे हैं एवं एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं।

सरकार की नीतियों से मिलने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यद्यपि यह हमारी कलीसिया एवं समाज को बुरी तरह झकझोर रही है किन्तु यह हमारे लोगों को जागरूक बना रही है। इसके कारण लोग अपने आप को व्यवस्थित कर रहे हैं और समय की मांग को पहचानने लगे हैं।

कमजोरियाँ जिनसे उठना अति आवश्यक

हालांकि झान के धर्माध्यक्षों ने यह भी स्वीकार किया कि चुनौतियाँ जिस गति से भारत की कलीसिया को घेर रही हैं उनका सामना करने के लिए वह बिलकुल तैयार नहीं हैं। सक्षम नेताओं का अभाव है। बहुत धीमी गति से कदम उठाये जा रहे हैं। आपस में एकता की कमी है। धार्मिक नेताओं एवं लोकधर्मियों के बीच आपसी संबंध कमजोर है। बहुत सारे युवा उद्देश्यहीन दिखाई पड़ते हैं। कुछ लोगों को अशिक्षा के कारण निकट भविष्य में पड़ने वाली विपत्ति का कोई आभास ही नहीं हुआ है।

प्रभु सेवक कोन्सटंट लीवन्स की देन

सभा में भाग ले रहे रोम स्थित परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर फादर लीनुस कुजूर एस. जे. ने समाज को सुसंगठित करने का उपाय बतलाते हुए कहा कि यदि छोटानागपुर की कलीसिया को बचाना है तो प्रभु सेवक कोन्सटंट लीवन्स येसु समाजी के धरोहर को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि छोटानागपुर के प्रेरित प्रभु सेवक कोन्सटंट लीवन्स ने आदिवासी समाज में लोगों को न्याय दिलाया था। उन्हें उनकी पहचान, संस्कृति और अस्मिता को वापस दिलायी थी। उन्होंने न केवल आध्यात्मिकता के क्षेत्र में लोगों की मदद की थी बल्कि सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक हर दृष्टिकोण से लोगों का मार्गदर्शन किया था। उसी तरह आज हमें अपनी पहचान को बनाये रखने के लिए न्याय और नीति के हथियारों द्वारा संघर्ष करना होगा। इसके लिए लोगों को प्रशिक्षित करना होगा। उन्हें एकता में आने के लिए प्रोत्साहन देना और अगुवाई करने का गुण सिखाना होगा। फादर लीनुस ने सभा के सामने प्रभु सेवक कोन्सटंट लीवन्स के संत घोषणा हेतु लिखी किताब का मसौदा प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने उनके जीवन और मिशन की कार्य प्रणाली पर विशेष प्रकाश डाला है।

सभा में छोटानागपुर की संरक्षिका ढोरी की माता मरियम की मध्यस्ता द्वारा प्रार्थना की गयी तथा सम्पूर्ण कलीसिया को ईश्वर के हाथों में समर्पित किया गया।  

11 September 2019, 14:52