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कार्डिनल जोस डे जेसुस पिमिएंटो रॉड्रिग्ज कार्डिनल जोस डे जेसुस पिमिएंटो रॉड्रिग्ज 

कार्डिनल जोस डे जेसुस पिमिएंटो रॉड्रिग्ज की मृत्यु

कार्डिनल जोस डे जेसुस पिमिएंटो रॉड्रिग्ज, मनिज़ेल्स के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष का निधन मंगलवार, 3 सितंबर को हो गया। कार्डिनलों में वे सबसे उम्रदार, 100 वर्ष के थे।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 04 सितम्बर 2019 (रेई) कार्डिनल मंडली में सबसे बुजुर्ग कार्डिनल जोस डे जेसुस पिमिएंटो रॉड्रिग्ज़ का देहांत हो गया इस खबर की घोषणा कोलोम्बिया धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने अपने ट्वीट में प्रकाशित किया।

जूलियो चेसारे पिमिएंटो, दिवंगत कार्डिनल के भातीजे ने पत्रकारों को बतलाया कि उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं चल रहा था। उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से मंगलवार दोपहर को बुकरमंगा महाधर्मप्रांत के फ्लोरिडेब्लैंका शहर में हुई।

कोलंबिया के धर्माध्यक्षों ने कार्डिनल के जीवन और उनकी बुलाहट के लिए ईश्वर का धन्यवाद अदा करते हुए प्रार्थना अर्पित की। उन्होंने देश में शांति स्थापना हेतु उनके प्रयास और लोकधर्मियों के बीच किया गये विकास पूर्ण कार्य हेतु ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कार्डिनल के संबंधियों और बुकरमंगा महाधर्मप्रांत के याजकीय वर्ग तथा लोकधर्ममियों के प्रति अपनी संवेदना के भाव व्यक्त किये।  

कार्डिनल पिमिएंटो रॉड्रिग्ज़ का जन्म 18 फरवरी 1919 को जैपाटोक में हुआ था और वे 14 दिसम्बर 1941 को एक पवन पुरोहित के रुप में अभिषिक्त किये गये थे।  

संत पापा ने पियुस 11वें नें उन्हें दिसम्बर 1955 को पास्तो का सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त किया था। चार सालों के बाद वे संत पापा योहन 13वें के द्वारा मोतेरिया के धर्माध्यक्ष घोषित किये गये जहाँ से उनकी नियुक्ति संत पौलुस 6वें के द्वारा फरवरी 1964 में गार्ज़ोन-नीवा धर्मप्रांत हेतु हुई।

1962 और 1965 के बीच उन्होंने द्वितीय वाटिकन महाधर्म सभा में भाग लिया और 1972 में उन्हें कोलंबिया के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन का अध्यक्ष चुना गया जहाँ उन्होंने सन् 1978 तक अपनी सेवाएँ दीं।

मई 1975 में उन्हें संत पापा पौलुस 6वें ने मनिज़ेल्स का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया जहाँ उन्होंने 77 वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं दी और 21 वर्षों तक धर्मप्रांत की अगुवाई करते हुए सन् 1995 में सेवानिवृत्ति हुए।

अपने 96वें जन्मदिवस की सालगिराह के चार दिन पहले 14 फरवरी 2005 को वे संत पापा फ्रांसिस द्वारा कार्डिनल के सर्वोच्च पद से सम्मानित किये गये। 80 वर्ष की आयु से ऊपर होने के कारण वे कार्डिनलों की मंडली में नहीं आते थे जिन्हें संत पापा के चुनाव हेतु मतदान का अधिकार था।  

उनके देहांत के उपरांत अब कार्डिनल मंडल में कार्डिनलों की संख्या 214 हो गई है जिसमें 118 संत पापा के चुनाव हेतु मतदान के अधिकार हैं जबकि 96 मतदान की सूची से बाहर हैं।

04 September 2019, 15:36