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 प्रदर्शन करती हुईं कश्मीर की महिलाएँ प्रदर्शन करती हुईं कश्मीर की महिलाएँ  (ANSA)

जम्मू-कश्मीर के धर्माध्यक्ष द्वारा शांति की अपील

धर्माध्यक्ष इवान पेरेइरा ने कहा कि कश्मीर में लोग अशांति से परेशान हैं। विद्यार्थी राष्ट्रवादियों एवं युवा कार्यकर्ताओं के कारण स्कूल जाने से डरते हैं। काथलिक भी डरे हुए हैं। ख्रीस्तियों को अन्य दलों द्वारा सराहा जा रहा है क्योंकि हम जहाँ कहीं जाते हैं शांति के अस्त्र बनते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शनिवार, 24 अगस्त 2019 (एशियान्यूज)˸ जम्मू और कश्मीर में तनाव जारी है। क्षेत्र पर भारत और पाकिस्तान दोनों दावा कर रहे हैं। उक्त बातें जम्मू-कश्मीर के धर्माध्यक्ष इवन पेरेइरा ने एशियान्यूज़ से कही।

उन्होंने कहा, "जम्मू और कश्मीर में काथलिक कलीसिया के धर्मगुरू होने के नाते मैं सरकार से अपील करना चाहता हूँ तथा लोगों से आग्रह करता हूँ कि वे विवाद का हल शांति पूर्ण तरीके से करें। राज्य के मंत्रियों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को उपयुक्त तरीके से सुलझायें। पूरा काथलिक समुदाय जम्मू और कश्मीर की शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है।"  

जम्मू और कश्मीर में संकट 5 अगस्त को शुरू हुआ, जब भारत की सरकार ने राज्य से अनुच्छेद 370 को हटा दिया जो उसे विशेष राज्य का दर्जा देता था। परिणामतः कश्मीर घाटी में हिंसा और तनाव फैल गया है।  

धर्माध्यक्ष ने कहा, "जम्मू में स्थिति सामान्य हो चुकी है। टेलीफोन सेवा और संचार सुविधायें पुनः चालू हो गयी हैं। स्थिति शांत है जबकि कश्मीर में जीवन ठहर-सा गया है। इंटरनेट अब भी काम नहीं कर रहा है। लोग शांतिमय ढंग से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।"

स्कूलों को इसी सप्ताह पुनः खोला गया किन्तु स्कूल अधिकारी अभिभावकों को सूचना देने में असमर्थ हैं। वे यह सुन कर विस्मित हैं कि स्कूल फिर से चालू हो चुका है।

यद्यपि अधिकारियों ने विद्यार्थियों को स्कूल वापस बुलाया है किन्तु लोग इस डर से कि क्या होगा, स्कूल जाने का साहस नहीं कर रहे हैं। उन्हें राष्ट्रवादियों एवं युवा कार्यकर्ताओं से भय हैं।  

श्रीनगर में इस सप्ताह रातभर में पोस्टर दिखाई दिये जिसमें भारत और पाकिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह द्वारा विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। शुक्रवार की प्रार्थनाओं के दौरान फिर से तनाव न हो उसके लिए अधिकारियों ने पूरे शहर में अधिक सैन्य बलों को तैनात कर रखा था।

इस बीच, स्थानीय अस्पताल से प्राप्त जानकारी अनुसार करीब 152 लोगों को आँसू गैस एवं पैलेट गण के कारण चोट पहुँची है जिसको पुलिस ने कार्रवाई के दौरान छोड़ी था।  

धर्माध्यक्ष ने बतलाया कि हिंसा को देखते हुए काथलिक कलीसिया यद्यपि छोटी है बहुत डरी हुई है।

उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि यह (सरकार का निर्णय) धर्म (हमारे) के खिलाफ नहीं है किन्तु एक राजनीतिक मामला है। इस समय धार्मिक बातों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है, फिर भी यहाँ रहने वाले काथलिकों के बीच डर समाया हुआ है।"

उन्होंने कहा कि ख्रीस्तियों एवं अन्य धार्मिक समुदायों के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण हैं, हिन्दू, बौद्ध और मुस्लिम धर्मावलम्बियों के साथ संबंध अच्छे हैं। यहाँ के दूसरे धर्मावलम्बियों, सरकार और लोगों के द्वारा ख्रीस्तीय धर्म की खूब सराहना की जाती है क्योंकि हम जहाँ कहीं जाते हैं, धर्मों के बीच शांति के अस्त्र बनते हैं।    

24 August 2019, 17:44