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वेस्टमिनिस्टर के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल विंसेन्ट निकोल्स ने सिस्टर बर्कमन्स को बेनेडिक्ट पदक से सम्मानित किया।   वेस्टमिनिस्टर के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल विंसेन्ट निकोल्स ने सिस्टर बर्कमन्स को बेनेडिक्ट पदक से सम्मानित किया।  

शिक्षा में योगदान के लिए आयरिश धर्मबहन सम्मानित

ग्रेट-ब्रिटेन के एक काथलिक विश्वविद्यालय ने सिस्टर बर्कमन्स को, अपने सबसे सम्मानित पुरस्कार बेनेडिक्ट पदक से सम्मानित किया। उन्हें पाकिस्तान में 65 सालों तक बच्चों को शिक्षा देने के लिए सम्मानित किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

इन 65 सालों में उन्होंने पाकिस्तान के अधिकतर मुस्लिम, ख्रीस्तीय, पारसी और हिन्दू बच्चों को पढ़ाया।

सिस्टर बर्कमन्स ने हजारों बच्चों को प्रेरित किया है। उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय बेन्जीर भूट्टो एवं नोबेल पुरस्कार विजेता नर्गिस मावलवाला को भी शिक्षा दी थी।

आयरिश धर्मबहन जो अब 89 साल की हो चुकी हैं जिन्होंने शिक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में कई अन्य पहचान भी प्राप्त की हैं।

वेस्टमिनिस्टर के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल विंसेन्ट निकोल्स ने विगत सप्ताह सिस्टर बर्कमन्स को बेनेडिक्ट पदक से सम्मानित किया।  

यह पुरस्कार लंदन के संत मेरीस विश्वविद्यालय से प्रदान किया जाता है जिसे ससम्मान सेवानिवृत संत पापा बेनेडिक्ट 16वें के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 2010 में इसका दौरा किया था। इस पुरस्कार के विजेताओं को शिक्षा, अंतरधार्मिक संबंधों एवं सार्वजनिक जीवन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवा के लिए प्रदान की जाती है।

उच्च सम्मान

सम्मान समारोह में सि. बर्कमन्स को सम्मानित करते हुए कार्डिनल निकोल्स जो संत मेरीस विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं उन्होंने उनके समर्पण एवं प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा, "समावेश एवं सम्मान का उनका उदाहरण, हमारे विद्यार्थियों एवं भावी पीढ़ी को मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जब वे खुद अध्यापन यात्रा में आगे बढ़ेंगे।  

इस समारोह में आयरलैंड के राष्ट्रपति माइकेल हिगिन्स भी उपस्थित थे जिन्होंने सिस्टर बर्कमन्स को समाज में उनके योगदान के लिए बधाइयाँ दीं। उन्होंने कहा कि अपने कार्यों एवं शिक्षा में समर्पण के द्वारा, वे अध्यापन की सुन्दरता एवं क्षमता में एक प्रभावशाली छवि बन गयी हैं। वे समावेशी एवं अंतर-व्यक्तित्व के सशक्त शक्ति के द्वारा एक उत्कृष्ट आदर्श बनी हैं।    

ग्रेटब्रिटेन के लिए पाकिस्तान के उच्चायुक्त मोहम्मद नाफीस ज़ाकारिया ने उन्हें लोगों के लिए एक प्रकाशस्तम्भ कहा। उन्होंने कहा, "हमें सिस्टर बर्कमन्स के समान लोगों से प्रेरणा लेना चाहिए और उनके एक या दो गुणों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए, क्योंकि आज दुनिया को पहले से कहीं ज्यादा उनके जैसे लोगों की जरूरत है।”

मिशनरी आदर्श

सिस्टर जॉन बर्कमन्स कोनवे आर.जे.एम का जन्म आयरलैंड के कौन्टी क्लेर में सन् 1930 में हुआ था। उन्होंने लंदन के विल्लेस्डेन के येसु और मरिया धर्मसमाज में सन् 1951 में प्रवेश किया था।

पाकिस्तान में एक मिशनरी के रूप में उन्होंने लाहौर, मुर्री और कराची में शिक्षा दी।

उन्हें पाकिस्तान में सितारा-ई-क्वाइद-ई-अजाम पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

25 July 2019, 16:45