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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (AFP or licensors)

"आध्यात्मिक वार्तालाप" की समृद्धि की खोज

दक्षिण एशियाई जेस्विट पुरोहितों ने संत इग्नासियुस की आध्यात्मिक परम्परा की समृद्धि की पुनः खोज पर खुशी जाहिर की है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पुणे, बुधवार, 1 मई 2019 (मैटर्स इंडिया)˸ दक्षिण एशिया के कुल 19 प्रांतों से करीब 200 जेस्विट पुरोहितों ने 25 से 28 अप्रील तक एक सभा में भाग लिया। सभा का आयोजन पुणे के ज्ञानदीप विद्यापीठ के जेस्विट ईशशास्त्र एवं दर्शनशास्त्र केंद्र में किया गया था, जिसकी विषयवस्तु थी, "पुनर्गठित जीवन और मिशन के लिए पारस्परिकता।" 

फादर पाट्टेरी ने कहा कि जेस्विट पुरोहितों द्वारा संत इग्नासियुस के खजाने की पुनः खोज की जा रही है जो हमेशा प्रस्तुत रही है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक वार्तालाप की तकनीकी आध्यात्मिक ऊर्जा को संरक्षित रखती है। उन्होंने सभी येसु समाजियों को निमंत्रण दिया कि वे आध्यात्मिक वार्तालाप की तकनीक को गहरा और मजबूत करें तथा इसका प्रयोग अपने समुदायों में करें।

फादर पाट्टेरी ने बतलाया कि आत्मजाँच के अस्त्र को इग्नासियुस ने प्रस्तुत किया है। सम्मान पूर्वक सुनने से उन लोगों के लिए सच्चा लोकतांत्रिक स्थान मिलता है जो इसमें संलग्न होते हैं।

उनके अनुसार आध्यात्मिक वार्तालाप के दो प्रमुख तत्व हैं -  उद्देश्य के साथ सुनना तथा सजग रहना।

10 सदस्यों का दल बना कर प्रतिभागियों ने "आध्यात्मिक बातचीत" के चार सत्रों में भाग लिया।  

केरल प्रोविंस के फादर प्रीन्स क्लारेंस ने कहा कि सभा ने उनके लिए अंतर-संबद्धता के नये रास्ते एवं आध्यात्मिक बातचीत की सुन्दरता को प्रस्तुत किया।  

उन्होंने कहा कि दल में चर्चा ने उन्हें बदल दिया है जिसके कारण वे अपने आराम क्षेत्र में शांति और समझौता के साथ नहीं रह सकते।

01 May 2019, 17:06